सहारनपुर

मदरसों के बाद RSS स्कूलों के सर्वे कराने की उठी मांग, राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

राज्सपाल के नाम प्रेषित किए गए इस ज्ञापन में राष्ट्रवादी सेना के पदाधिकारियों ने कहा है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश सरकार मदरसों का सर्वे कराए जाने की बात कह रही है, ठीक उसी तरह से आरएसएस के स्कूलों का भी सर्वे कराया जाए।
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Updated: 10 Sep 2022, 4:20 PM IST
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योगी सरकार के आदेश के बाद प्रदेश में आज से गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे शुरू हो गया है। हालांकि सरकार के इस फैसले का विपक्ष विरोध कर रहा है। इसी कड़ी में अब मदरसों के साथ-साथ प्रदेश के आरएसएस स्कूलों के सर्वे कराने की मांग भी उठने लगी है। राष्ट्रवादी सेना ने राज्यपाल से मांग की है कि मदरसों के साथ ही आरएसएस स्कूलों का भी सर्वे कराया जाए। साथ ही गुरुकुलों और मठों के भी सर्वे कराए जाने की मांग की गई है। इस बावत देवबंद के उप जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रवादी सेना के अध्यक्ष चौधरी वीरेंद्र सिंह गुर्जर समेत अन्य पदाधिकारियों ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को एक ज्ञापन भी दिया है।

गुरुकुलों और मठों के सर्वे कराए जाने की मांग

बता दें कि राज्सपाल के नाम प्रेषित किए गए इस ज्ञापन में राष्ट्रवादी सेना के पदाधिकारियों ने कहा है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश सरकार मदरसों का सर्वे कराए जाने की बात कह रही है, ठीक उसी तरह से आरएसएस के स्कूलों का भी सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का राष्ट्रवादी सरकार समर्थन नहीं करती है लेकिन जब सरकार इस ओर सोच रही है तो सनातन धर्म, ईसाई धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म समेत आरएसएस की ओर से जो स्कूल संचालित किए जा रहे हैं, वह भी गैर मान्यता प्राप्त हैं। उनका भी सर्वे कराया जाना चाहिए। ऐसा कराए जाने से युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। साथ ही उन्होंने सभी गुरुकुलों और मठों के भी सर्वे कराए जाने की मांग की गई है।

सर्वे का काम 5 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य

गौरतलब है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों ही प्रदेश के गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे कराने का आदेश दिया है। सर्वे कराने के बाद इन मदरसों को या तो मान्यता प्राप्त मदरसों के साथ जोड़ा जाएगा या फिर इन्हें बंद कर दिया जाएगा। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अपनी टीम के साथ सर्वे के काम को अंजाम देंगे। टीम के अलावा शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। अल्पसंख्यक विभाग की टीम को सर्वे कराने का काम पांच अक्टूबर तक पूरा करना है, जबकि 25 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट शासन को भेजनी है। वहीं सरकार के इस फैसले के बाद से ही विपक्ष लगातार उनपर हमलावर है।

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