
Azam Khan Raids: समाजवादी पार्टी के घोसी सांसद राजीव राय ने आजम खान से जुड़े ठिकानों पर चल रही छापेमारी को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब आएंगे, विपक्षी नेताओं और उनके करीबियों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, ये आरोप राजीव राय के राजनीतिक बयान हैं।
पत्रकारों से बातचीत में राजीव राय ने कहा कि सहारनपुर, दिल्ली समेत कई स्थानों पर सुबह करीब पांच बजे से छापेमारी की कार्रवाई चल रही है। इसी को लेकर उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में विपक्ष के खिलाफ दमन और कार्रवाई का सिलसिला तेज हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, जबकि विपक्षी नेताओं को जांच के दायरे में लाया जाता है।
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के आगामी विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने के संकेत पर भी राजीव राय ने प्रतिक्रिया दी। उनसे जब विपक्ष में बौखलाहट को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने पलटकर पूछा कि मायावती आखिर भाजपा को विपक्ष मानती हैं या समाजवादी पार्टी को। राजीव राय ने कहा कि चुनाव को लेकर हर राजनीतिक दल अपनी रणनीति बना रहा है, लेकिन जनता अपना मन बना चुकी है। उन्होंने सपा सरकार के पुराने कार्यकाल के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए दावा किया कि महिलाओं, युवाओं, बेरोजगारों, शिक्षकों और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कामों को जनता याद कर रही है।
यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर की ओर से अखिलेश यादव और शिवपाल यादव की सरकारों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी राजीव राय ने तीखी प्रतिक्रिया दी। राजभर के उस सवाल पर कि पिछली सरकारों के दौरान नक्शे और व्यवस्थाएं दुरुस्त क्यों नहीं की गईं, सपा सांसद ने कहा कि वह उनके आरोपों पर ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते। राजीव राय ने इस दौरान राजभर पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की और उनके बयानों को लेकर तीखा तंज कसा।
आजम खान से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई को लेकर राजीव राय के बयान ने यूपी की सियासत में विपक्ष बनाम सरकार की बहस को फिर तेज कर दिया है। एक तरफ जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर सपा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का दावा कर रही है। फिलहाल राजीव राय के बयान में लगाए गए राजनीतिक आरोपों की पुष्टि इस रिपोर्ट में स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है। आगामी दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और सपा-बसपा की चुनावी रणनीति यूपी की राजनीति के अहम मुद्दे बन सकती है।