मासूम बच्चा लविश अपने दोस्तों के साथ खेत में गेहूं की बाली बीनने गया था। इस दौरान सभी अलग-अलग हो गए तो कुत्तों के झुंड ने लविश पर हमला बोल दिया।
Dog attack: सहारनपुर के फतेहपुर में गेहूं की बाली बीनने गए आठ साल के मासूम को कुत्तों ने नोचकर मार डाला। ग्रामीणों ने किसी तरह डंडों से कुत्तों के झुंड के हटाया और आनन-फानन में घायल मासूम को नजदीकी चिकित्सक के पास लेकर दौड़े लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। चिकित्सक ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से गांव में दहशत है।
यह घटना फतेहपुर थाना क्षेत्र के गांव चाऊपुरा की है। इसी गांव के रहने वाले संदीप का आठ वर्षीय बेटा लशिव गांव के दूसरे बच्चों के साथ गेहूं की बाली बीनने के लिए गांव के पास ही एक खेत में गया था। बाली बीनते हुए बच्चे अलग-अलग हो गए तो यहां कुत्तों ने झुंड ने लविश पर हमला बोल दिया। यह देखकर अन्य बच्चे डरकर गांव की तरफ भाग गए। इन्होंने शोर माचाया तो लविश के चाचा और अन्य ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे। यहां कुत्तों का एक झुंड लविश को नोच रहा था। ग्रामीणों ने डंडों के बल पर इन कुत्तों को दौड़ाया और इसके बाद घायल हालत में लविश को लेकर डॉक्टर की तरफ दौड़े।
चिकित्सक ने लविश को मृत घोषित कर दिया। इस घटना का जब परिवार की महिलाओं के पता चला तो पूरे परिवार में कोहराम मच गया। गांव में भी लोग इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों ने कुत्तों के आतंक से दहशत बताई है। यह पहली घटना नहीं है इससे पहले भी जिले में कुत्ते कई मासूमों के अपना निवाला बना चुके है। पिछले वर्ष एक कुत्ते बेहट क्षेत्र में घर में चारपाई पर सो रहे दो साल के मासूम को जबड़े में पकड़कर उठा ले गया था। छह अगस्त 2021 में भी मुजफ्फराबाद थाना क्षेत्र के गांव पाडली ग्रांट में 9 वर्षीय आमिर को कुत्तों ने नोचकर मार डाला था। चार अप्रैल 2022 को चिलकाना के गांव बुड्ढाखेड़ा में खेत में जा रही लड़की पर कुत्तों ने हमला बोल दिया और उसकी भी इस हमले में मौत हो गई थी। छह दिसंबर 2019 को मिर्जापुर क्षेत्र लकड़ी बीनकर लौट रही आठ वर्षीय बच्ची मिस्बाह पर कुत्तों ने हमला कर दिया था इसकी भी मौत हो गई थी।
इन दिनों गेहूं की फसल की कटाई चल रही है। जब किसी खेत से गेहूं की फसल काट ली जाती है तो उस समय कुछ बालियां ( गेहूं की फसल ) खेत में टूटकर गिर जाती है। किसान जब खेत खाली कर देता है तो उस खेत में बच्चे और मजदूर किसान इन बालियों को चुगकर इकट्ठा कर लेते हैं। बाद में इनमें से गेहूं निकालकर या तो उसे अनाज के रूप में अपने घर में इकट्ठा कर लेते हैं या फिर बेचकर कुछ पैसे मिल जाते हैं। भयंकर गर्मी में पूरे खेत में पैदल चलकर एक-एक बाली चुगकर इकट्ठा करने की इस मेहनत को गेहूं की बाली बीनना कहते हैं।