महिलाओं के लिए ही नहीं दिव्‍यांगों के लिए भी नजीर हैं सहारनपुर की उमा शर्मा
सहारनपुर. आदमी शरीर से नहीं, बल्कि मन से विकलांग होता है। शरीर साथ दे या ना दे अगर आपका हौसला बुलंद है और आपमें हिम्मत है तो विकलांग होते हुए भी आप वह सब कुछ कर सकते हैं, जो एक स्वस्थ आदमी कर सकता है। सहारनपुर की उमा शर्मा ने ऐसी ही मिसाल पेश की है। उमा शर्मा पिछले 10 वर्षों से बेड पर हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इन 10 वर्षों में उमा शर्मा ने जो किया है वह नजीर बन गया है। वह एक ऐसी भारतीय महिला हैं जिन्हें पति और बेटे की मौत के बाद पैरालिसिस का अटैक हुआ और फिर वह कभी बिस्तर से नहीं उठ पाईं। बावजूद इसके वह आज भी स्कूल चलाती हैं, एक स्कूल की प्रिंसिपल हैं और पूरे स्कूल की निगरानी वह करती हैं। उमा शर्मा का केवल चेहरा और हाथ ही चलता है बाकी पूरा शरीर निष्क्रिय है। वह बेड से उठ भी नहीं सकती और शारीरिक रूप से पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं। बावजूद इसके पिछले 10 वर्षों से उमा शर्मा शिक्षा का उजियारा फैला रही हैं वह खुद एक स्कूल की प्रिंसिपल हैं और प्रबंधक भी हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि वह बेड पर लेटकर ही स्कूल चलाती हैं, स्टाफ को दिशा-निर्देश देती हैं और छात्र -छात्राओं से सीधे संवाद करती हैं। इतना ही नहीं, जब इस स्कूल के बच्चों को कोई बात शिक्षकों से समझ नहीं आती तो उस बात को समझने के लिए वह उमा शर्मा के पास उस कमरे में जाते हैं जहां वह पिछले 10 वर्षों से लेटी हुई हैं। यहां वह बच्चों को बेहद सादगी से गणित के सूत्र और कविताओं का सारांश समझाती हैं। केवल अपने स्कूल के ही नहीं बल्कि आसपास के छात्र-छात्राएं भी अगर इनके पास अपने विषय लेकर आते हैं तो उमा शर्मा उनको भी पढ़ाने और समझाने की पूरी कोशिश करती हैं और बच्चों को संतुष्ट करके ही अपने पास से वापस भेजती हैं।
आज से 10 साल पहले आया था अटैक
उमा शर्मा बताती हैं कि उन्हें वर्ष 2007 में आज से करीब 10 साल पहले पैरालाइसिस का अटैक आया था। इससे पहले उनके पति की हृदय गति रुक जाने से मौत हो गई थी। अभी वह पति की मौत से उबर नहीं पाई थी कि एक हादसे में उनके बेटे की भी डेथ हो गई। उनका बेटा पतंग उड़ा रहा था और इसी दौरान गिरने से उसकी किडनी खराब हो गई। इस घटना के कुछ दिनों बाद बेटे की मौत हो गई। जिस महिला ने अपने पति और बेटे को खो दिया हो उसकी मनोदशा आप समझ सकते हैं, लेकिन उमा शर्मा का कहना है कि उनके पास हारने का समय नहीं था और बेटियों की शादी करनी थी। इसलिए उन्होंने हिम्मत जुटाई और अपनी टीचिंग को जारी रखा। इसी दौरान वर्ष 2007 में पति की मौत के करीब डेढ़ साल बाद वह अपने घर पर चाय पी रही थीं और इसी दौरान उन्हें अचानक पैरालाइसिस का अटैक हुआ और इस अटैक के बाद वह आज तक बेड से नहीं उठ पाई।
क्या कहती हैं स्कूल की प्रबंध समिति
नुमाइश कैंप की रहने वाली उमा शर्मा सहारनपुर के बीचों-बीच स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल की डायरेक्टर हैं और प्रिंसिपल भी हैं। वह सीसीटीवी कैमरों और इंटरनेट के जरिए अपने कमरे से ही पूरे स्कूल पर नजर रखती हैं। इतना ही नहीं अलग-अलग विषयों पर वह समय समय पर टीचर्स को अपडेट करती हैं। उनकी मीटिंग लेती हैं और बच्चों की कॉपियों को भी चेक करती हैं। इस दौरान वह कई बार चेकिंग में त्रुटि भी पकड़ चुकी हैं। नेशनल पब्लिक स्कूल के प्रबंधन का कहना है कि उमा शर्मा से उनको समय-समय पर निर्देश मिलते रहते हैं। वह इंटरनेट के जरिए पूरे स्कूल में चल रही गतिविधियों पर नजर रखती हैं और इस दौरान सामने आने वाली खामियों को सामने लाते हुए उनका समाधान कराती हैं।
घर में अकेली रहती हैं उमा शर्मा
पति और बेटे की मौत के बाद उमा शर्मा की सास की भी मृत्यु हो गई और उनकी एक बेटी की भी एक्सीडेंट में मौत हो गई। उमा शर्मा की दो बेटियां हैं जिनकी शादी हो चुकी है। दोनों बेटियों की शादी होने के बाद उमा अब अपने मकान में अकेली ही रहती हैं। उन्होंने अपने पास एक केयरटेकर महिला रखी हुई है और यह महिला ही इनकी देखभाल करती है। उनका कहना है कि स्कूल के प्रिंसिपल रहते हुए उन्हें जो काम करना होता है उससे ही उन्हें हिम्मत मिलती है और उनका अकेलापन भी दूर होता है।