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सिस्टम से हार गया चैंपियन, अब जिंदगी के लिए जोड़ रहा पंचर, देखें वीडियो-

देश-प्रदेश का नाम रोशन करने वाले साइक्‍लिंग चैंपियन शमीम रजा बदहाली में जीवन जीने को मजबूर

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Moradabad

मुरादाबाद. हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह अपने देश का नाम ऊंचा करने और अपने खेल को मुकाम तक पहुंचाने के लिए जी तोड़ मेहनत करे। इस सोच के साथ मुरादाबाद के साइक्लिंग खिलाड़ी शमीम रजा ने भी खूब पसीना बहाया और जिला स्‍तर से लेकर राष्‍ट्रीय स्‍तर तक शहर का नाम रोशन किया, लेकिन आज शमीम बदहाली में जीवन जीने को मजबूर है। बता दें कि साइक्‍लिंग चैंपियन शमीम रजा ने देश और प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए अपनी आधी जिंदगी साइकिल दौड़ाते-दौड़ाते गुजार दी, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं पा सका और आर्थिक तंगी के चलते साइकिल को ही गुजर-बसर का जरिया बना लिया।

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मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के नजदीक सड़क किनारे लकड़ी के खोखे में साइकिलों की मरम्मत और पंचर जोड़ने वाले शमीम बताते हैं कि उन्‍होंने जिला स्तर से साइक्लिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद स्‍टेट लेवल से लेकर नेशनल लेवल तक साइक्‍लिंग रेस मे बुलंदियों को छुआ। देश-प्रदेश का नाम रोशन करते हुए दर्जनों मेडल प्राप्त किए, लेकिन सरकार से कभी इसके बदल मदद यानी नौकरी तक नहीं मिली। परिवार में एक विधवा मां, पत्नी और तीन बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी भी उसी के कांधों पर है। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि उसके पास सि‍र छि‍पाने के लिए मकान भी नहीं हैं। बच्चे भी सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वह अपने नाना के ही मकान कांठ रोड हरथला सोनकपुर गुलाब मस्जिद के पीछे रहता है। साथ दो जून की रोटी के लिए साइकिलों में पंचर जोड़ता है।

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आखिर कब सुधरेगा हमारा सरकारी सिस्टम?

कभी साइक्लिंग के चैंपियन रहे शमीम ने आज हिम्मत हारकर साइकिल को ही अपना पेशा बना लिया है और जैसे-तैसे परिवार का पालन-पोषण कर रहा है। सवाल यह उठता है कि सरकार आखिर ऐसे चैम्पियनों की सुध क्यों नहीं लेती है, जिन्होने देश-प्रदेश का नाम रोशन किया है। आखिर हमारा सरकारी सिस्टम कब सुधरेगा? कब शमीम रजा जैसे नेशनल चैम्पियनों को सरकारे नौकरी देकर उनके कल को संवरने का मौका दिया जाएगा? आज भी देश की सड़कों पर शमीम जैसे सैकड़ों नेशनल चैंपियन नौकरी ना मिलने पर अपनी दुर्दशा पर रोते हैं। अगर ऐसे ही नेशनल चैंपियनों की दुर्दशा होती रही तो आने वाले दिनों में लोग अपने बच्‍चों को खेलों में जाने ही नहीं देंगे।

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सोनकपुर स्टेडियम के कोच और खेल अधिकारी दुखी

वैसे तो कई मेडिल इस चैम्पियन ने देश का नाम रोशन करने के लिए जीते, लेकिन मेडलों की कद्र ना करने वाला सरकारी सिस्टम आंखें बंद किए हुए सो रहा है। अभी तक भी इस गूंगे बहरे सरकारी सिस्टम ने इस नेशनल चैंपियन को सरकारी नौकरी से नहीं नवाजा है, जिससे इस चैम्पियन की जिंदगी और आने वाला कल उज्जवल हो सके। हालांकि मुरादाबाद के सोनकपुर स्टेडियम के कोच और खेल अधिकारी शमीम की हालत से दुखी हैं। साथ ही उनका कहना है कि अगर वो उनके पास आता है तो उसकी पूरी मदद की जाएगी।