ट्रेन लेट होना आम बात है लेकिन ट्रेन लेट होने पर रेलवे से जुर्माने के साथ पैसा वसूलना नई बात है। आप भी जानें कैसे उठा सकते हैं लाभ।
सहारनपुर। ट्रेन के लेट होने पर अगर आपको अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ रही है तो इसकी जिम्मेदार रेलवे है और रेलवे को ऐसे में आपका पूरा पैसा वापस करना होगा यदि रेलवे ऐसा नहीं करती है तो आप कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। सहारनपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। ट्रेन 19 घंटे लेट हो गई और इस कारण सहारनपुर के परिवार ने अपने टिकट रद्द करा दिए।
जब यह परिवार रेलवे से टिकट का पैसा वापस लेने पहुंचा तो रेलवे ने यह कह दिया कि ट्रेन तो चली थी लेकिन आपने खुद ही अपने टिकट रद्द कराए हैं ऐसे में पैसे वापस देना नहीं बनता है। रेलवे ने इस परिवार को जब टिकट का पूरा पैसा वापस नहीं दिया तो परिवार ने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया और सहारनपुर की उपभोक्ता अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए यात्रा रद्द होने को रेलवे की सेवा में कमी माना। कोर्ट ने कहा कि जब ट्रेन 19 घंटे लेट हो गई तो इस परिवार को मजबूरन अपने टिकट रद्द कराने पड़े और अपनी यात्रा भी रद्द करनी पड़ी यह सब रेलवे की गलती से हुआ है। ऐसे में रेलवे को इनके टिकट का पूरा भुगतान देना चाहिए था।
अदालत ने इसे सेवा में कमी करार देते हुए रेलवे को इस परिवार को टिकट का पूरा पैसा वापस करने के आदेश दिए हैं। साथ ही रेलवे पर 5000 रु का जुर्माना भी लगाया है इसके अलावा वाह्य खर्च के रूप में 3000 रुपये भी देने होंगे। यानि अब रेलवे इस परिवार को टिकट का पूरा पैसा तो वापस देगा ही साथ में 8000 रुपये जुर्माना भी देगा। अदालत के इस फैसले को ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है और आए दिन ट्रेन लेट होने से यात्रियों को होने वाली परेशानी में यह फैसला बेहद मददगार साबित होगा। साथ ही इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि अगर ट्रेन लेट है और ट्रेन लेट होने की वजह से आप अपनी यात्रा रद्द कर रहे हैं तो इसके लिए आप नहीं बल्कि रेलवे जिम्मेदार है और ऐसी परिस्थितियों में रेलवे को टिकट का पूरा पैसा वापस करना होगा।
यह है मामला
सहारनपुर की कपिल विहार कॉलोनी के रहने वाले अशोक वालिया ने दिसंबर 2015 में सहारनपुर से हावड़ा और उसी दिन हावड़ा से पुरि के लिए अपना और अपनी पत्नी का टिकट बुक कराया था। 5 दिन बाद के इन्होंने पूरी से सहारनपुर के लिए रिटर्न टिकट भी बुक कराए थे अशोक वालिया के मुताबिक तय समय से 1 घंटा पहले वह टपरी रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि ट्रेन लेट है। कुछ देर बाद उन्हें पता चला कि ट्रेन 19 घंटे लेट हो गई। ट्रेन के 19 घंटे लेट हो जाने पर उन्हें अपनी तीनों यात्रा निरस्त करनी पड़ी।
जब यात्रा निरस्त करने के बाद वह टिकट का पूरा पैसा वापस लेने के लिए पहुंचे तो रेलवे ने सहारनपुर से हावड़ा के टिकट के तो पूरे पैसे वापस कर दिए लेकिन रेलवे ने अग्रिम दो यात्राओं का पैसा वापस नहीं किया और कह दिया कि केवल एक यात्रा में ट्रेन लेट हुई थी अगर इन यात्राओं का इन से कोई संबंध नहीं है इसलिए दो अन्य यात्राओं का पैसा रेलवे ने वापस नहीं किया इस पर अशोक वालिया ने विरोध किया और सुनवाई न होने पर क्लेम अफसर उत्तर प्रदेश रेलवे स्टेशन अधीक्षक सहारनपुर को पार्टी बनाते हुए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
अपने पक्ष में अशोक वालिया ने यही कहा कि पहली यात्रा की ट्रेन लेट हो जाने की वजह से उन्हें अपनी अग्रिम तीनों यात्राएं रद्द करनी पड़ी इससे उनका बेहद जरूरी काम भी बिगड़ गया और मानसिक परेशानी भी उठानी पड़ी ऐसे में रेलवे को उनका पूरा पैसा वापस करना चाहिए। इस मामले पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष लुकमान उल हक व सदस्य डॉ सनत कौशिक ने इसे रेलवे की लापरवाही और सेवा में कमी माना और आदेश दिया कि रेलवे की सेवा में कमी होने के कारण ही अशोक वालिया दंपत्ति को टिकट के पूरे वापस करने के साथ-साथ 8000 जुर्माने के रुप में भी दिए जाने के आदेश रेलवे को दिए गए हैं।