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सहारनपुर की इस भैंस के आगे फेल हुईं बड़ी-बड़ी नस्लें, 1 दिन में इतना दूध दिया कि पूरे यूपी में बन गई नंबर-1

Saharanpur News: सहारनपुर की मुर्रा भैंस गार्गी ने एक दिन में 23 लीटर से ज्यादा दूध देकर पूरे उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर लिया है।

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saharanpur buffalo 23 liter milk record

सहारनपुर की इस भैंस के आगे फेल हुईं बड़ी-बड़ी नस्लें

Buffalo 23 Liter Milk Record:उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के गांव मोहम्मदपुर की एक मुर्रा नस्ल की भैंस गार्गी इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस भैंस ने एक दिन में 23 लीटर से अधिक दूध देकर उत्तर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। खास बात यह है कि गार्गी की इस उपलब्धि के बाद इसकी कीमत लाखों में लग रही है, लेकिन मालिक इसे बेचने के लिए तैयार नहीं हैं। गांव में गार्गी को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं और पशुपालक इसे उन्नत नस्ल की मिसाल मान रहे हैं।

पशुपालन विभाग ने किया सम्मानित

गार्गी की शानदार उपलब्धि के बाद उत्तर प्रदेश कृषि एवं पशुपालन संघ के पदाधिकारी और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ गांव पहुंचे और मालिक परिवार को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। जानकारी के मुताबिक दिसंबर के अंतिम सप्ताह में लखनऊ की टीम ने लाइव टेलीकास्ट के जरिए गार्गी की दूध देने की क्षमता का परीक्षण किया था। हाल ही में जारी परिणामों में गार्गी ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। दूसरे स्थान की भैंस ने 21.700 लीटर और तीसरे स्थान की भैंस ने 21.200 लीटर दूध दिया।

चार साल की उम्र में बनी आकर्षण का केंद्र

करीब चार साल की मुर्रा नस्ल की भैंस गार्गी की ऊंचाई लगभग साढ़े पांच फीट बताई जा रही है। इसका विशाल शरीर और शानदार बनावट लोगों को आकर्षित कर रही है। पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी कम उम्र में इतना अधिक दूध देना बेहद दुर्लभ माना जाता है। गांव में लोग इसे देखने के लिए पहुंच रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी गार्गी की चर्चा तेजी से फैल रही है।

15 साल की मेहनत से तैयार हुई खास नस्ल

भैंस मालिक शेखर चौहान ने बताया कि इस सफलता के पीछे उनके पिता चौधरी विक्रम सिंह की करीब 15 साल की मेहनत छिपी हुई है। उन्होंने हमेशा अपनी नस्ल को बेहतर बनाने पर काम किया और बाहर से पशु खरीदने के बजाय ब्रीडिंग के जरिए उन्नत नस्ल तैयार की। गार्गी का टीका हरियाणा के प्रसिद्ध मुर्रा भैंसे भीम से कराया गया था। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ एक भैंस नहीं बल्कि उनकी पहचान और सम्मान बन चुकी है।

साधारण भैंसों से शुरू किया था सफर

विक्रम सिंह ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में 8 से 9 किलो दूध देने वाली साधारण भैंसों के साथ काम शुरू किया था। लगातार ब्रीडिंग और देखभाल के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे नस्ल को बेहतर बनाया। उनका कहना है कि उन्होंने देशभर में 100 से ज्यादा पशु प्रदर्शनियां देखी हैं, लेकिन गार्गी जैसा आकार और क्षमता वाली भैंस बहुत कम देखने को मिलती है। पहली बार किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पर ही गार्गी ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर लिया।

50 लाख की कीमत भी कम पड़ गई

गार्गी की लोकप्रियता बढ़ने के साथ इसकी कीमत भी लगातार बढ़ती जा रही है। पहले इसकी कीमत 20 लाख रुपए तक लगी थी, लेकिन अब कई लोग 50 लाख रुपए तक देने को तैयार हैं। इसके बावजूद मालिक परिवार ने साफ कर दिया है कि वे गार्गी को किसी भी कीमत पर नहीं बेचेंगे। उनका कहना है कि यह भैंस अब परिवार का हिस्सा बन चुकी है और इसकी वजह से उन्हें पूरे प्रदेश में पहचान मिली है।

पशुपालकों के लिए बनी प्रेरणा

गार्गी की सफलता ने प्रदेश के पशुपालकों को नई प्रेरणा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन और नस्ल सुधार पर लगातार काम किया जाए तो किसान और पशुपालक बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। सहारनपुर की यह भैंस अब सिर्फ एक पशु नहीं बल्कि आधुनिक पशुपालन और मेहनत की मिसाल बन चुकी है।