Samastipur Encounter: समस्तीपुर जिले के उजियारपुर में पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने से घायल हुए प्रिंस कुमार से जुड़े मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर पुलिस इसे ऑपरेशन लंगड़ा के तहत एक बड़ी सफलता बता रही है, वहीं दूसरी ओर प्रिंस की मां सुशीला देवी ने इसे पूरी तरह से एक फर्जी एनकाउंटर बताया है।
Samastipur Encounter: बिहार में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का एक विशेष अभियान ऑपरेशन लंगड़ा चल रहा है। इसी अभियान के तहत बुधवार को समस्तीपुर में हुई एक मुठभेड़ अब विवादों के घेरे में आ गई है। दलसिंहसराय और उजियारपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गोली लगने से घायल हुए अपराधी प्रिंस कुमार की मां ने पुलिस के एनकाउंटर वाले दावे को पूरी तरह स्क्रिप्टेड और फर्जी करार दिया। जहां पुलिस इसे एक शातिर लुटेरे के खिलाफ जवाबी कार्रवाई बता रही है, वहीं प्रिंस की मां ने पुलिस प्रशासन पर शोहरत के लिए फर्जी मुठभेड़ की कहानी गढ़ने और घर में घुसकर लूटपाट करने के आरोप लगाए हैं।
दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के भगवानपुर चकशेखू बीआइपी कॉलोनी (वार्ड-14) निवासी प्रिंस कुमार की मां सुशीला देवी ने समस्तीपुर एसपी को एक लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सुशीला देवी का दावा है कि उनका बेटा प्रिंस कुमार 18 मई की सुबह विद्यापति धाम जल चढ़ाने गया था, जहां रास्ते में मोटरसाइकिल दुर्घटना में वह घायल हो गया। उसका इलाज विद्यापतिनगर PHC में हुआ, जिसके बाद वह घर पर आराम कर रहा था।
आरोप है कि 18 मई को ही आधी रात के बाद करीब 2 बजे दलसिंहसराय थाने के पुलिस अधिकारी प्रणव कुमार, रंजीत कुमार और स्थानीय डीएसपी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल उनके घर में घुसी और प्रिंस को जबरन उठाकर ले जाने लगी। विरोध करने पर परिजनों को भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं और बिना कोई स्पष्ट कारण बताए उसे अपने साथ ले गए।
एसपी को सौंपे गए आवेदन में मां ने पुलिसकर्मियों पर जबरन वसूली और लूटपाट का भी आरोप लगाया है। सुशीला देवी के अनुसार, गिरफ्तारी के वक्त पुलिसकर्मियों ने प्रिंस की जेब से 38,000 रुपये नगद निकाले और उसके पिता पिंकू कुमार लाल से बकायदा नोटों की गिनती कराई, लेकिन इसकी कोई जब्ती सूची या सबूत नहीं बनाया। इतना ही नहीं, पुलिस ने उसके पति का मोबाइल भी छीन लिया। मां का आरोप है कि जब वे अगले दिन (19 मई को) दलसिंहसराय थाना पूछताछ करने गए, तो उन्हें गालियां देकर भगा दिया गया।
सुशीला देवी ने आवेदन में बताया कि उन्हें बाद में मालूम हुआ कि पुलिस ने उजियारपुर के देसुआ में उनके बेटे को ऑपरेशन लंगड़ा के तहत पैर में गोली मारकर अस्पताल भेज दिया है। मां का कहना है कि पुलिस केवल वाहवाही लूटने के लिए इस फर्जी एनकाउंटर का खेल खेल रही है। इस आवेदन की प्रतिलिपि बिहार के डीजीपी, गृह विभाग और मानवाधिकार आयोग (पटना) को भी भेजी गई है।
दूसरी तरफ, समस्तीपुर पुलिस प्रिंस कुमार को इलाके का एक बेहद शातिर और सक्रिय अपराधी बता रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रिंस कुमार का अपराध की दुनिया से पुराना नाता है। साल 2022 में दलसिंहसराय पुलिस ने उसे पहली बार बाइक चोरी के आरोप में जेल भेजा था, जिसके बाद वह लगातार बड़ी वारदातों को अंजाम देने लगा। हाल ही में सरायरंजन क्षेत्र में एक ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) से दो लाख रुपये की भीषण लूटकांड में भी प्रिंस के गिरोह की मुख्य भूमिका सामने आई थी। इसके अलावा, डैनी चौक के पास फाइनेंस कर्मी गोविंद राय को कट्टा दिखाकर धमकाने और उजियारपुर थाना क्षेत्र में स्ट्रीम बाइक, टैब और मोबाइल लूट मामले में भी वह नामजद आरोपी है।
पुलिस के अनुसार उजियारपुर थाना क्षेत्र के देसुआ गांव स्थित एक बगीचे में पुलिस की टीम अपराधियों के गुप्त ठिकाने पर हथियार बरामदगी और छापेमारी के लिए गई थी। पुलिस को देखते ही वहां छुपे अपराधियों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक गोली प्रिंस कुमार के पैर में लगी और उसे मौके पर ही दबोच लिया गया, जबकि उसके अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। पुलिस ने दावा किया है कि प्रिंस के पास से पल्सर बाइक, अवैध हथियार (देसी कट्टा/पिस्तौल), कारतूस और लूटी गई नकदी बरामद की गई है।