UP News: यूपी के संभल जिले में नाबालिग के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। बीएनएस के तहत दोषी गुड्डू और संजय को 20-20 साल की सजा और 58-58 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
BNS UP Minor Rape Case: संभल जिले के चंदौसी क्षेत्र में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह ने दोषी गुड्डू और संजय को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर 58-58 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला उत्तर प्रदेश में बीएनएस लागू होने के बाद चौथी बड़ी सजा है, जबकि मुरादाबाद मंडल में यह दूसरी महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है।
जुनावई थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पिता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी 17 वर्षीय बेटी 15 अक्टूबर 2025 की शाम करीब साढ़े पांच बजे खेत में चारा काटने गई थी। काफी देर तक घर न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इसी दौरान ग्रामीणों से सूचना मिली कि दो युवक उसे जबरन बाइक पर बैठाकर ले गए हैं। सूचना मिलते ही परिवार में हड़कंप मच गया और मामले की रिपोर्ट तुरंत जुनावई थाने में दर्ज कराई गई।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी गुड्डू और संजय उसे जबरन अपने साथ ले गए। पहले उसे नोएडा ले जाया गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद आरोपी उसे गुजरात ले गए, जहां भी उसके साथ लगातार शारीरिक शोषण किया गया। किसी तरह आरोपियों के चंगुल से छूटकर किशोरी जुनावई पहुंची और अपने चाचा व पुलिस को पूरी आपबीती बताई।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 12 जनवरी को आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। इसके अगले ही दिन, 13 जनवरी से मुकदमे की सुनवाई शुरू कर दी गई। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और पीड़िता के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह के अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में कड़ी सजा जरूरी है।
अदालत के इस फैसले को महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बीएनएस के तहत दिया गया यह निर्णय अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय लोगों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए न्यायपालिका पर भरोसा जताया है।