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संभल में बर्क परिवार के बयान से सियासी तूफान: “कयामत” टिप्पणी पर राजनीति में उबाल, तेज हुई बयानबाजी

Sambhal News: यूपी के संभल में सपा सांसद जिया उर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क के बयान ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

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Jan 19, 2026
संभल में बर्क परिवार के बयान से सियासी तूफान | Image - FB/@ziaurrahmanbarq

Mamlukur Rahman Barq Statement Sambhal: संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क का हालिया बयान राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। बिना किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लिए उन्होंने दावा किया कि मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है और मसाजिद व मदरसों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं।

इसके साथ ही उन्होंने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जे, मॉब लिंचिंग और बलात्कार जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए मौजूदा हालात पर गंभीर सवाल उठाए। उनके बयान की भाषा और भावनात्मक अपील ने इसे सामान्य टिप्पणी से आगे बढ़ाकर एक सियासी संदेश के रूप में पेश कर दिया है।

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शेरो-शायरी में दी गई चेतावनी

ममलूकुर्रहमान बर्क ने अपने बयान में शेरो-शायरी का सहारा लेते हुए कहा, “हमारी बर्बादियों पर ना मुस्कुराओ ए चमन वालों, एक दिन गुजारने तुम्हारे सिर से भी क़यामत है।” इस पंक्ति को उन्होंने सामाजिक असंतोष और भविष्य की चेतावनी के रूप में प्रस्तुत किया। इस कथन के बाद समर्थकों और विरोधियों दोनों के बीच प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

बिजली कर्मियों को धमकाने का मामला फिर आया चर्चा में

ममलूकुर्रहमान बर्क का नाम इससे पहले भी विवादों में रह चुका है। 19 दिसंबर 2024 को संभल के थाना नखासा में उनके खिलाफ बिजली कर्मियों को धमकाने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। यह मामला उस समय सामने आया जब बिजली विभाग का चेकिंग अभियान चल रहा था और कथित तौर पर उन्होंने कर्मियों को धमकी दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे सरकार बदलने पर बिजली कर्मियों का “कबाड़ा” करने जैसी बात कहते दिखाई दिए थे। यह प्रकरण आज भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है।

राजनीतिक विरासत और परिवार की भूमिका पर नजर

बर्क परिवार की राजनीति में लंबी पहचान रही है। ममलूकुर्रहमान बर्क के पिता स्वर्गीय डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क का 27 फरवरी 2024 को 94 वर्ष की आयु में निधन हुआ था। उनके निधन के बाद उनके पौत्र जिया उर्रहमान बर्क को समाजवादी पार्टी ने संभल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। जिया उर्रहमान इससे पहले मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र में एक युवा चेहरे के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।

AIMIM से सपा तक का सफर

जिया उर्रहमान बर्क का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वर्ष 2017 में उन्होंने समाजवादी पार्टी से बगावत कर AIMIM के टिकट पर संभल विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2022 में उन्होंने कुंदरकी सीट से सपा के टिकट पर चुनाव जीतकर वापसी की। इस दौरान उनके पिता स्व. डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने चुनावी मंच से समर्थन देकर परिवार की राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया।

बयान के बाद प्रशासन और राजनीति में बढ़ी सतर्कता

ममलूकुर्रहमान बर्क के हालिया बयान के बाद स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक दलों की नजरें संभल पर टिकी हुई हैं। बयान को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे सामाजिक सौहार्द के लिए चुनौती बताया है, जबकि समर्थक इसे समुदाय की भावनाओं की अभिव्यक्ति करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक मंचों और जनसभाओं में और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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