Sambhal News: संभल में हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बारिश ने गेहूं और मक्का की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। तापमान में अचानक गिरावट और मौसम में बदलाव से किसानों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए अलर्ट जारी किया है।
Hail rain damage crops Sambhal: संभल जिले में हाल ही में हुई ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने मौसम की तस्वीर बदलकर रख दी है। मंगलवार सुबह 8 बजे संभल का तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि दिन में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले महीने के औसत तापमान से लगभग 6 डिग्री कम है।
हवा की गति 8 किलोमीटर प्रति घंटे थी और मौसम विभाग ने 29 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंके आने की संभावना जताई है। इन अप्रत्याशित बदलावों का असर स्वास्थ्य पर भी देखा जा रहा है, जिससे छोटे बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
20 मार्च को हुई बारिश के बाद संभल और चंदौसी तहसीलों में गेहूं की लगभग 60 प्रतिशत फसल पहले ही खराब हो चुकी थी। अब हाल ही में हुई ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने बची हुई फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। इस अचानक मौसम परिवर्तन का असर मक्का की फसल पर भी पड़ा है। हालांकि, गुन्नौर तहसील क्षेत्र में बारिश न होने के कारण वहां के किसानों की गेहूं की फसल सुरक्षित बनी हुई है।
गांव हिरौनी निवासी किसान विजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि ओलावृष्टि और बारिश से सभी फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, "इस समय हमारे खेतों में गेहूं, सरसों, आलू और मक्का की फसलें लगी थीं। मेरे 28 बीघा खेत में लगी गेहूं की फसल बारिश और ओले गिरने के कारण काफी क्षतिग्रस्त हो गई है।"
गांव शोभापुर खालसा के होराम सिंह यादव ने भी ओलावृष्टि और बारिश से हुए नुकसान की पुष्टि की। उन्होंने बताया, "ओले गिरने और लगातार बारिश के कारण मेरी 40 बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह प्रभावित हुई है। मक्का की फसल भी इससे अछूती नहीं रही।"
मौसम विभाग ने संभल जिले के लिए अगले तीन दिनों के लिए अलर्ट जारी किया है। विभाग ने किसानों और आम जनता से सावधानी बरतने का आग्रह किया है। विभाग ने बताया कि अगले दिनों हल्की से मध्यम बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। खासकर सुबह और देर शाम के समय खेतों में काम करने वाले किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
किसानों का कहना है कि लगातार मौसम की मार ने फसलों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों पर असर डाला है। कुछ किसानों का अनुमान है कि गेहूं और मक्का की लगभग 70 प्रतिशत फसल इस बार खराब हो सकती है। कई किसान स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से आर्थिक मदद और मुआवजे की उम्मीद कर रहे हैं। मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञ भी फसल की स्थिति का आंकलन करने और बचाव के उपाय सुझाने के लिए खेतों का निरीक्षण कर रहे हैं।