रामनगर क्षेत्र से पीडि़ता को लेकर आइ थी पुलिस, एमएलसी के एक घंटे बाद दूसरे डॉक्टर ने लिया ब्लड सेम्पल
15 साल की एक बलात्कार पीडि़ता अपने 10 दिन के बच्चे को लेकर पुलिस के साथ 60 किमी की दूरी तय कर जिला अस्पताल पहुंची। यहां उसका मेडिकल परीक्षण होने के बाद डीएनए जांच के लिए ब्लड सेम्पल लेना था। रविवार की दोपहर तीन बजे अस्पताल पहुंचने के बाद पीडि़ता ढाई घंटे तक डॉक्टर का इंतजार करती रही। जैसे तैसे डॉक्टर ने आकर मेडिकल परीक्षण किया तो डीएनए जांच के लिए ब्लड सेम्पल लेने से मना कर दिया। एेसे में परेशानी और बढ़ गई। जब अस्पताल के सिविल सर्जन और अन्य डॉक्टरों से संपर्क किया तब एक घंटे बाद रक्त नमूना लिया जा सका। स्वास्थ्य महकमा की यह लापरवाही एक नाबालिग दुष्कर्म पीडि़ता को परेशान करती रही।
सतना. मां-बाप का साया सिर से उठने के बाद अपने ननिहाल में रह रही 15 साल की बालिका बलात्कार का शिकार हो गई। जब वह गर्भवती हुई तो बुजुर्ग नाना-नानी लोक लज्जा के डर से बात को दबाए रहे। हाल ही में जब पीडि़ता ने एक बच्चे को जन्म दिया तो गांव में बात उजागर हो गई। आरोपी ने भी पीडि़ता का साथ देने से मना दिया दिया। एेसे में पीडि़त परिवार रामनगर थाना पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस ने गंभीरता बरती और आरोपी संदीप सिंह गोड़ के खिलाफ बलात्कार व पाक्सो एक्ट के तहत मुकद्मा कायम कर लिया। रविवार को महिला पुलिस आरक्षकों के साथ एएसआइ एसएल रावत को पीडि़ता का मेडिकल परीक्षण कराने जिला अस्पताल भेजा गया। पुलिस टीम पीडि़ता को लेकर दोपहर तीन बजे यहां पहुंच गई थी।
डॉक्टर की तलाश
पीडि़ता का मेडिकल परीक्षण कराने के लिए जब पुलिस टीम ने स्वास्थ्य महकमा से संपर्क किया तो पता चला कि दोपहर दो से रात आठ बजे तक ड्यूटी में किसी भी महिला डॉक्टर का नाम रजिस्टर में दर्ज नहीं है। एेसे में डॉक्टर शांति चहल को इमरजेंसी में बुलाने के लिए अस्पताल से कर्मचारी को भेजा गया। उनका फोन बंद और घर में ताला लगा मिलने पर कर्मचारी लौट आया। इसके बाद मेटरनिटी ओटी प्रभारी डॉ. रेखा त्रिपाठी से संपर्क करते हुए उन्हें जानकारी दी गई।
डॉक्टर से हुई बहस
अस्पताल में परेेशान हो रही पीडि़ता के लिए पुलिस ने कई प्रयास किए। जिसके बाद डॉ. मंजू सिंह ने शाम 5.29 बजे एमएलसी किया। जब डॉक्टर से डीएनए जांच के लिए ब्लड सेम्पल लेने को कहा गया तो उन्होंने मना कर दिया। इस बीच डॉक्टर माया पाण्डेय से महिला आरक्षक की बहस भी हुई। इसके बाद भी ब्लड सेम्पल नहीं लिया गया। फिर टीआइ शंखधर द्विवेदी को महिला आरक्षक ने जानकारी दी तो उन्होंने सीन ऑफ क्राइम यूनिट से संपर्क किया। इसके बाद सिविल सर्जन से भी बात की गई। तब डॉक्टर अमर सिंह ने शाम करीब साढ़े 6 बजे ब्लड सेम्पल लिया।
कब तक होगी लापरवाही
स्वास्थ्य सेवाओं का यह हाल कोई नया नहीं है। कुछ दिन पहले ही दुष्कर्म पीडि़ता को जांच के लिए घंटो इंतजार कराने के मामले में लापरवाही सामने आने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जिला अस्पताल के एक डॉक्टर को सेवा समाप्ति का नोटिस देकर जबाव तलब कर चुका है। बावजूद इसके व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो सका। यही वजह है कि नाबालिग पीडि़ता को फिर से परेशानी का सामना करना पड़ा।