महंगाई: अनाज के दाम आधे पर खुदरा बाजार के नहीं आए अच्छे दिन, डीजल-पेट्रोल की कीमत से जनता परेशान
सुखेंद्र मिश्रा @ सतना। अच्छे दिन लाने का वादा कर सत्ता में आई भाजपा सरकार से जनता को उम्मीद थी कि अब आम आदमी की जरूरत की चीजें सस्ती होंगी। डीजल-पेट्रोल के दाम आम आदमी के बजट में आएंगे। आटा, दाल, सब्जी सब आधे दाम में मिलेंगे। लेकिन, बीते चार साल में एेसा कुछ नहीं हुआ। केंद्र सरकार ने खाद्य सामग्री की बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए अनाज के दाम आधे कर दिए। बीते चार साल में अनाज के दाम में 30 फीसदी की गिरावट आई, इसके बाद भी दाल, आटा एवं चीनी जैसी जरूरत की चीजों के दाम नहीं घटे।
अनाज के दाम गिरने से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। एक ओर मंडियों में अनाज के दाम न मिलने से उन्हें खती से लागत निकालना मुश्किल हो रहा तो दूसरी ओर किराना के भाव में 15 फीसदी तक वृद्धि से आम आदमी की जेब कट रही। बीते चार साल में जनता को महंगाई से कितनी राहत मिली, इसकी पड़ताल के लिए जब अक्टूबर 2014 व अक्टूबर 2018 में अनाज, दाल, तेल व किराना के भाव को सामने रखकर तुलना की गई तो आंकड़े चौकाने वाले सामने आए।
11.60 रु. गिरी रुपए की साख
सरकार द्वारा पहले नोटबंदी फिर जीएसटी लागू करने से देश की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई है। देश की अर्थ व्यवस्था कमजोर होने की मार देश की साख रुपए पर पड़ी है। 2014 में एक डालर की कीमत 61.74 रुपए थी जो बीते चार साल में घटकर 73.34 रुपए हो गई है। बीते चार साल में डालर के मुकाबले रुपए की कीमत में 11.60 रुपए की गिरावट आई है।
बिचौलिये काट रहे मलाई
सरकार ने महंगाई पर लगाम कसने के लिए विदेशी दाल आयात की। इससे देश के अंदर अनाज के दाम 30 फीसदी तक घट गए। थोक में अनाज-सब्जी एवं किराना के भाव कम होने से लोगोंं में आस जगी थी कि अब खुदरा बाजार के भी अच्छे दिन आएंगे पर थोक मंडियों में खाद्य सामग्र्री व अनाज के दाम गिरने के बाद भी बिचौलियों की मनमानी से खुदरा बाजार में तेजी बरकरार है।
जनता को दाल अभी भी 55 रुपए
इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि अक्टूबर 2014 में अरहर के दाम 45 रुपए प्रति किलो थे, जबकि अरहर दाल फुटकर मंडी में 67 रुपए किलो मिल रही थी। 2018 में अरहर के दाम गिरकर 30 रुपए किलो हो गए। लेकिन, जनता को दाल अभी भी 55 रुपए में मिल रही। मिल संचालकों का कहना है कि इस समय अरहर दाल के फुटकर भाव 50 रुपए से अधिक नहीं होने चाहिए।
20 फीसदी बढे़ डीजल-पेट्रोल के दाम
बीते चार साल में जनता पर सबसे अधिक मार डीजल-पेट्रोल के दाम बढऩे से परी है। भाजपा ने डीजल 35 रुपए और पेट्रोल के दाम 45 रुपए करने का वादा कर वोट मांगे थे। लेकिन पेट्रोलियम पदार्थ के दाम नहीं घटा पाई। बीते दो साल में डीजल-पेट्रोल के दाम 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
पेट्रोलियम के दाम छू रहे हैं नई ऊंचाई को
वर्तमान में पेट्रोलियम के दाम नई ऊंचाई को छू रहे हैं। डीजल-पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी का असर खेती की लागत, किराया, ट्रांसपोर्ट सहित खाद समग्री के दाम पर पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई ने आम आदमी का बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
दलहनी फसलों के भाव गिरने से दाल के थोक दाम में गिरावट आई है। बाजार में बिचौलियों का राज होने के कारण खुदरा बाजार में दाल एवं अन्य खाद्य सामग्री के दाम कम नहीं हुए। जनता अभी भी लुट रही है।
राजकुमार गुप्ता, मिलर
महंगाई कम करने मोदीजी ने विदेशों से दाल खरीद ली। इससे अनाज के दाम घटकर आधे हो गए लेकिन दालों के भाव कम नहीं हुए। अब दुकान में जनता और मंडी में किसान दोनों लुट रहे हैं।
इंद्रजीत पाठक, किसान नेता