पांच मुख्यमंत्रियों और दर्जनभर सांसदों को लिखे पत्र
सतना। खजुराहो से चित्रकूट व सतना रूट से पुरी के लिए सीधी ट्रेन चलाने की मांग की गई है। आरटीआइ एक्टिविस्ट राजीव खरे ने इस आशय का पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पांच राज्यों के मुख्यमंत्री व एक दर्जन सांसदों को भेजते हुए मांग की है कि खजुराहो जैसे विश्व धरोहर स्थल से पुरी तक सीधी ट्रेन चलाई जाए। पत्र में दावा किया गया कि इस ट्रेन से जहां विंध्य व बुंदेलखण्ड के दर्शनार्थियों व पर्यटकों का सफर सुगम होगा वहीं रेलवे को भी आय होगी।
आरटीआइ एक्टिविस्ट ने मांग की है कि ट्रेन खजुराहो से पुरी वाया महोबा, बांदा, चित्रकूट, सतना, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, बिलासपुर, चांपा, जांजगीर से राउरकेला से होकर कटक भुवनेश्वर पुरी मार्ग पर चलाई जाए। इस ट्रेन को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में अटल सद्भावना एक्सप्रेस नाम से विंध्य व बुंदेलखण्ड के लोगों को सौगात दी जाए। आरटीआइ कार्यकर्ता ने पत्र के साथ ही खजुराहो से पुरी ट्रेन रूट सुझाते हुए ड्राइंग भी भेजी है।
रखी थी ललितपुर-खजुराहो रेललाइन की आधारशिला
आरटीआइ एक्टिविस्ट खरे ने बताया कि बुंदेलखण्ड का पिछड़ापन दूर करने के लिए दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1998 में अपने कार्यकाल के दौरान ललितपुर-खजुराहो रेललाइन की आधारशिला रखी थी। पिछड़े इलाके में ट्रेन दौड़ाने का स्वप्न दिवंगत प्रधानमंत्री ने देखा था जिसे पूरा करने का दारोमदार अब वर्तमान सरकार पर है।
क्यों जरूरी है खजुराहो से पुरी डायरेक्ट ट्रेन
पीएम व सीएम को भेजे पत्र में आरटीआइ एक्टिविस्ट ने बताया है कि आखिर खजुराहो से पुरी के लिए ट्रेन क्यों जरूरी है। पुरी जाने के लिए भुवनेश्वर, रायगढ़, चंपा आदि क्षेत्रों से कोई भी ट्रेन सीधे सतना, मैहर, चित्रकूट व इलाहाबाद को जोडऩे वाली नहीं है। पुरी से कलिंग एक्सप्रेस, हीराकुण्ड एक्सप्रेस, वलसाड़ पुरी सहित पांच ट्रेनें चलती हैं।
पुरी जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है
लेकिन ये सभी गाडि़यां वाया कटनी, सागर दमोह निकल जाती हैं। इसी तरह सतना से गुजरने वाली सारनाथ एक्सप्रेस, गरीब रथ, बेतवा एक्सप्रेस, गोंदिया बरौनी, गोरखपुर दुर्ग सभी ट्रेनें बिलासपुर-रायपुर रूट से चलती हैं। एेसे में खजुराहो, चित्रकूट, मैहर व इलाहाबाद के दर्शनार्थियों को पुरी जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है।