सतना

इंडियन रेलवे की बड़ी लापरवाही, WCR के इस फाटक को बनाया रेलवे स्टेशन, दिल्ली तक हड़कंप

डीएमयू का अघोषित रेलवे स्टेशन बना टिकरिया फाटक, अनाधिकृत रूप से चढ़-उतर रहे यात्री, डकैत प्रभावित इलाके में रेलवे की लापरवाही

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May 05, 2018
big mistake of Indian Railway in hindi
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सुरेश मिश्रा @ सतना। सतना-मानिकपुर रेलखंड के मध्य स्थित टिकरिया फाटक में रेलवे की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां कैम्प कर रहे आरपीएफ जवानों के लिए खड़ी होने वाली ट्रेन में रोजाना कई लोग अनाधिकृत रूप से चढ़ उतर रहे हैं। 29 जुलाई 2017 को टिकरिया फाटक से गेटमैन सहित एक युवक का 5.30 लाख के इनामी डकैत बबुली कोल ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने आरपीएसएफ की एक कंपनी तैनात की थी।

उनको टिकरिया स्टेशन व मारकुंडी स्टेशन के मध्य टिकरिया फाटक क्रमांक-400 में डूय्टी पर लगाया गया था। आरपीएसएफ जवानों के लिए मंडल मुख्यालय की अनुमति के बाद लाने-ले जाने के लिए डीएमयू रुकने लगी। अब आलम है कि आम यात्री भी भारी संख्या में यहां से ट्रेन में सवार हो रहे हैं। इधर, रेलवे को रोजाना हजारों रुपए के राजस्व का चूना भी लग रहा है।

patrika IMAGE CREDIT: patrika

स्टेशन जैसे लगता है यात्रियों का मजमा
पत्रिका टीम जब टिकटिया फाटक पर पड़ताल करने पहुंची तो गेट बंद था। पता चला कि सुबह 9 बजे डीएमयू ट्रेन आने वाली है। लेकिन आसपास भीड़ देखने के बाद जब आम जन से जानकारी चाही तो बताया गया कि लोग ट्रेन में चढऩे के लिए खड़े है। यहां रोजाना ट्रेन रुकती है तो लोग स्टेशन जाने की बजाय यहीं से चढऩे-उतरने लगे हैं। कुछ देर में टे्रन भी आ गई और सभी यात्री ट्रेन में चढ़कर सतना के लिए रवाना हो गए। बाद में पता चला आरपीएसएफ के जवान इस ट्रेन से आते जाते है इसलिए ट्रेन रुकती है।

ये है मामला
29 जुलाई 2017 की मध्य रात्रि यूपी के सपा नेता निर्भय सिंह संतू के पुत्र विजय सिंह और गेटमैन बलवंत का डकैत बबुली कोल ने बंदूक की नोक पर टिकरिया फाटक से अपहरण कर लिया। फिर एमपी-यूपी की सीमा में आतंक का पर्याय बने हुए बदमाश ने सपा नेता के पुत्र सहित रेलवे के अधिकारियों से 50 लाख के फिरौती की मांग की। अपहरण की सूचना के बाद यूपी पुलिस और एमपी पुलिस ने ज्वाईंट ऑपरेशन कर आरपीएफ की मदद से तीसरे दिन दोनों को बदमाशों से मुक्त कराया। ऐहतियातन रेलवे फाटक सहित रेल लाइन की सुरक्षा के लिए रेलवे मुख्यालय जबलपुर द्वारा आरपीएसएफ की एक कंपनी तैनात की गई। कंपनी का मुख्यालय मारकुंडी स्टेशन को बनाया गया। जहां दो शिफ्ट में आरपीएसएफ जवानों को मारकुंडी स्टेशन, टिकरिया फाटक और टिकरिया रेलवे स्टेशन में गार्ड को तैनात किया गया।

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दो डीआरएम को लिखी चिठ्ठी, नहीं मिला वाहन
जानकारों की मानें तो डीएमयू पैसेंजर से टिकरिया फाटक तक आने व जाने में आरपीएसएफ को सहूलियत से ज्यादा परेशानी होती है। कई बार डीएमयू देरी से चल रही होती है जिसके चलते कंपनी स्टेशन में ही इंतजार करती रहती है। डीएमयू के ज्यादा लेट होने पर जबलपुर कंट्रोल से अन्य गाडि़यों का स्टॉपेज मांगा जाता है। बताया गया कि मारकुंडी से टिकरिया फाटक व स्टेशन में मूवमेंट के लिए आरपीएफ को वाहन की दरकार है। सूत्रों के अनुसार पश्चिम मध्य रेल जबलपुर मंडल के वर्तमान व पूर्व के डीआरएम को इस आशय के पत्र भी लिखे गए थे, लेकिन अब तक वाहन उपलब्ध नहीं हो सका है जिसके चलते कंपनी डीएमयू पर ही निर्भर है।

वारदात की आशंका
दो अपहरण की घटना के बाद रेलवे 7-8 महीने में एक कंपनी पर करोड़ों रुपए फूंक चुकी है। फिर भी जिम्मेदारों को बड़ी वारदात का इंतजार है। क्योंकि जिस तरह टिकरिया पाटक के आसपास एक सैकड़ा यात्रियों का रोजाना मजमा लगाया जा रहा है। उससे यह आशंका भी बनी रहती है कि डकैत फिर न कोई वारदात कर दें।

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फैक्ट फाइल
- टिकरिया फाटक क्रमांक-400 का मामला
- टिकरिया स्टेशन से टिकरिया फाटक की दूरी 4 किमी.
- मारकुंंडी स्टेशन से टिकरिया फाटक की दूरी 4 किमी.
- मारकुंडी स्टेशन में एक कंपनी आरपीएसएफ की तैनात
- टिकरिया फाटक दिन में 6 जवान और रात में 10 जवान
- बरामाफी 3 जवान आरपीएसएफ
- टिकरिया स्टेशन 6 आरपीएसएफ और 1 आरपीएफ जवान

अगर इस तरह हो रहा है तो गंभीर मामला है। आसपास के ग्रामीण यात्रियों को हिदायत दी जाएगी। अगर नहीं मानते हैं तो रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मान सिंह, आरपीएफ पोस्ट प्रभारी

Updated on:
05 May 2018 12:56 pm
Published on:
05 May 2018 02:11 pm