सतना के बीकॉम छात्र की मौके पर ही मौत, फोन करने के बाद भी नहीं आई डायल-100, बिरला कॉर्पाेरेशन में काम करते हैं पिता
सतना। वर्ष 2017 के जाते-जाते ब्लू व्हेलगेम ने एक और जान ले ली। सतना में एक छात्र ने अपने ही पिता व उनके मित्र के सामने बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर ली। आत्मघाती कदम उठाने से पहले पिता और उनके मित्र ने अपने बेटे को बचाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।
बताया जा रहा है कि बिड़ला कॉर्पाेरेशन के कर्मचारी अभय श्रीवास्तव का पुत्र अक्षय श्रीवास्तव (18) भोपाल में बी-कॉम की पढ़ाई कर रहा था।
तीन दिन पहले सतना आया था। रविवार को सुबह से घर से गायब था। परिजनों ने खोजबीन शुरू की तो देर शाम को पता चला कि करही रोड स्थित बजरंगबली के मंदिर के पास देखा गया है।
बोलने लगा कि टारगेट फिक्स है
उसके बाद पिता अभय श्रीवास्तव व उनके मित्र बिहारी मंगनानी खोजते हुए मौके पर पहुंचे। जहां वो रात 9 बजे मंदिर में मिल गया। वो पिता को देखते ही बोलने लगा कि टारगेट फिक्स है, आप लोग बीच में मत आओ, घर में घटना हो जाएगी, सब चले जाएंगे, आप हट जाओ।
सीधे बिल्डिंग से कूद गया
पिता ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि वे कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे, उसे रोककर सबकुछ बताने को कह रहे थे। तभी उसने हाथ छुड़ाते हुए दौड़ लगा दी और एक बिल्डिंग पर चढ़ गया। वे पीछे-पीछे दौड़े, लेकिन बेटा अक्षय रुका नहीं और सीधे बिल्डिंग से कूद गया। इससे उसकी मौके पर मौत हो गई।
नहीं पहुंची पुलिस
घटना के बाद मौके पर मौजूद पीडि़त पक्ष व आम लोगों ने डॉयल 100 को सूचना दी। लेकिन, पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचे। जबकि वे लोग डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक मौके पर पुलिस का इंतजार करते रहे।
सांसद पहुंचे अस्पताल
घटना की जानकारी मिलने के बाद सांसद गणेश सिंह भी जिला अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने मौके पर मौजूद चिकित्सक व स्टॉफ से जानकारी ली। अक्षय के शव के पास पहुंचे, परिजनों से चर्चा की और संत्वना देने के बाद वापस हो गए।
परिजन शव लेकर पहुंचे जिला अस्पताल
घटना के बाद जब पुलिस मौके पर नहीं पहुंची, तो मौके पर मौजूद लोगों की राय के बाद परिजन ही शव लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां घटना की जानकारी दी। चिकित्सक ने अंतिम परीक्षण किया और मृत घोषित कर दिया। उसके बाद तहरीर चौकी भेज दी गई।
पिता के मित्र ने समझाने का भी किया प्रयास
अभय के मित्र बिहारी मंगनानी ने पत्रिका को बताया कि अक्षय के आत्मघाती कदम उठाने से पहले उन्होंने उसे सड़क पर रोका था। हाथ पकड़कर बात समझाने का प्रयास कर रहे थे। हम लोग बार-बार बेटा बताओ-बताओ कह रहे थे। लेकिन, वो कुछ सुनने को तैयार नहीं था। बस, अपनी ही अजीबो-गरीब बात कर रहा था।
बदले-बदले हाव-भाव
उतैली निवासी अक्षय तीन दिन पहले हीभोपाल से आया था। लेकिन, इस दौरान वो परिवार के सदस्यों के बीच घुल-मिल नहीं पाया। दोस्तों के साथ भी नहीं जा रहा था। बताया जा रहा है कि दो दिन तो उसे बजरंगबली के मंदिर में दिनभर पाठ करते पाया गया। पूछने पर भी घर के सदस्यों को भी कुछ नहीं बता रहा था।