सतना

बड़ी खबर: रिमारी हिंसा में अब तक जा चुकी है 3 जानें, एक नजर में जानिए पूरा मामला

सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से दो एसएएफ कंपनी सहित 500 के लगभग पुलिस बल तैनात है।

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Jan 03, 2018
communal clash in rimari of satna

सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिला अंतर्गत सभापुर थाना क्षेत्र के रिमारी गांव में हुए दो समुदायों के बीच हुए विवाद ने तीन जाने निगल ली है। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से दो एसएएफ कंपनी सहित 500 के लगभग पुलिस बल तैनात है। पीएचक्यू से मिले इनपुट के बाद सतना, रीवा, सीधी और सिंगरौली के जिला पुलिस बल के जवान तैनात किए गए है।

किसी भी घटना से निपटने के लिए खुफिया जानकारी के बाद छतरपुर डीआईजी केसी जैन भी मोर्चा संभाले हुए है। गांव में आने-जाने वालों के उपर पहरा लगा दिया गया है। घटना स्थल के पास सबको जाने की मनाही है। पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील है। पुलिस के आला-अधिकारी कैंप कर पूरी स्थित की जानकारी ले रहे है।

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पंचायत की जमीन में बस गया

मानेन्द्र के पिता भुवनेश्वर मिश्रा ने बताया कि एहसान मोहम्मद (पप्पू ) परिवार के साथ गांव से दूर टिकुरा (टीला) में रहता था। साल 2002 में गांव के बीच आया और पंचायत की जमीन में बस गया। साल 2003 में पंचायत की सहमति से पप्पू के पास ही रिक्त भूखण्ड में राइस मिल लगाने की अनुमति मानेन्द्र मिश्रा को मिल गई। करीब छह साल पहले कब्जे की जमीन पर पप्पू ने कच्चा घर बना लिया। मिल की धान की भूसी रखने को लेकर 2009 में पप्पू और मानेन्द्र के बीच विवाद हुआ। पप्पू ने झगड़े के बाद अपने घर में आग लगाई और थाना में रिपोर्ट कर दी।

पुलिस मानेन्द्र को जेल भेज चुकी थी

बिरसिंहपुर के कुछ प्रभावशील व्यक्तियों की मदद से पप्पू ने मानेन्द्र के खिलाफ नामजद अपराध कायम करा दिया। कुछ दिन बाद जब मानेन्द्र अनाज बेचने बिरसिंहपुर गया, तो पुलिस ने उसे अनाज की दुकान से ही पकड़ा और गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। इसकी सूचना पुलिस ने मानेन्द्र के ससुराल सेमरी गांव में दी। परिजनों के पहुंचने से पहले पुलिस मानेन्द्र को जेल भेज चुकी थी। कुछ दिन बाद जमानत कराई और फिर इस प्रकरण में राजीनामा हुआ। यहीं से दोनों के बीच खुन्नस शुरू हुई थी।

बेटियों ने किसी तरह पिता का बचाव किया

साल 2017 में पप्पू ने कब्जे की सरकारी आराजी पर दुकानें बना लीं। इसके बाद फिर भूसी रखने को लेकर पप्पू ने झगड़ा किया और मौका पाकर एक दिन उसने बेटियों को परीक्षा दिलाने बिरसिंहपुर गए मानेन्द्र को घेरकर पीट दिया। तब बेटियों ने किसी तरह पिता का बचाव किया। एक माह पूर्व फिर पप्पू ने बेटों के साथ मिलकर मानेन्द्र पर हमला कर दिया था। तब उसने कुम्हार बस्ती की ओर दौड़कर अपनी जान बचाई थी। इस घटना में ग्रामीणों ने भी पप्पू को विरोध किया था।

छोटे छोटे झगड़ों का नतीजा

इसकी शिकायत डायल 100 को की गई, तो पुलिस ने आकर दोनों पक्षों में समझौता कराते हुए झगड़ा शांत कर दिया। आए दिन झगड़ा शुरू करने वाले पप्पू को इस बात का शक भी था कि जिस सरकारी बोर में उसने अपनी निजी मशीन लगाई है उसे मानेन्द्र ने ही पाइप काटकर गिरा दिया है। इन्हीं छोटे छोटे झगड़ों का नतीजा यह हुआ कि अपराधिक मानसिकता से मानेन्द्र की हत्या कर दी गई।

मानेन्द्र के शरीर में नहीं मिले धारदार हथियार के निशान
मंगलवार सुबह 9 बजे शवों का पोस्टमार्टम किया गया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मानेंद्र मिश्रा की मौत डंडों की चोट की वजह से हुई थी। छाती की हड्डी टूट गई थी, किडनी और तिल्ली फट गई थी। एब्डोमेन में रक्त फैला हुआ था। पूरे शरीर में शार्प आब्जेक्ट (धारदार हथियार और कील आदि) के निशान नहीं मिले। हुसैन के ट्रैकिया में कार्बन के आब्जेक्ट मिले हैं। लिहाजा मौत जलने से माना गया। शरीर में मारपीट के निशान नहीं मिले।

चिकित्सकों ने मामले में कुछ कहने से इंकार कर दिया

शव का बिसरा सुरक्षित करवाया गया है तो फीमर बोन डीएनए टेस्ट के लिये भेजी गई है। अजहरु²ीन का ट्रेकिया शत प्रतिशत जला हुआ था। इसका शरीर सुपर फीशियल बर्न था। इसकी भी मौत जलने से मानी जा रही है। हालांकि असलियत पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेगी। पीएम करने वाले चिकित्सकों ने मामले में कुछ कहने से इंकार कर दिया।

डेढ़ किमी दूर पत्थरों से पीटा
मंगलवार को रिमांरी गांव में घटना स्थल की जांच करने रीवा से फॉरेंसिक टीम पहुंची। वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी आरपी शुक्ला ने अपनी टीम के साथ बारीकी से परीक्षण किया। इस दौरान पप्पू की दुकान और मानेन्द्र की मिल के अलावा दूसरा घटना स्थल डेढ़ किमी दूर चिह्लित किया गया। सूत्रों का कहना है कि मानेन्द्र की हत्या के बाद भड़की भीड़ देख एक आरोपी पश्चिम दिशा की ओर भागा था जिसे गांव वालों ने डेढ़ किमी दूर जाकर पकड़ा। वहीं पत्थरों से पीटने के बाद उसे घसीटकर लाए और फिर जलती आग में डाल दिया। दूसरे युवक को घर के पीछे ही पकड़ कर पीटने के बाद आग के हवाले कर दिया था।

डीआईजी जाने हालात
डीआईजी एनपी बरकड़े, पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर के साथ घटनास्थल पहुंचे। यहां उन्होंने एहसान मोहम्मद की दुकान व आस-पास क्षेत्र का जायजा लिया। उसके बाद मानेन्द्र मिश्रा की राइस मिल देखी। फिर दोनों भवनों के बीच पड़ी खाईं नुमा जगह पर उतरकर स्थिति समझी। लोगों के अनुसार, भूसी को लेकर दोनों के बीच विवाद होता रहता था। इसके बाद डीआईजी एहसान के घर के बगल में लगभग एक माह पहले हुए बोर स्थल पर पहुंचे।

खुराफात से बोर का सबमर्सिबल नीचे गिर गया

जिसके बारे में बताया गया था कि किसी की खुराफात से बोर का सबमर्सिबल नीचे गिर गया था। जिससे दोनों के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। डीआईजी ने जांच में जुटे पुलिस अफसरों को निर्देशित किया है कि बोर की सबमर्सिबल गिरने सहित इन्हें बिजली का कनेक्शन कहां से मिला था? जिन जमीनों में दोनों पक्षों के भवन बने हैं, उनके स्वत्व की स्थिति क्या है? किन कारणों से राइस मिल बंद हुई और कब तक चली और घटना के तात्कालिक कारण क्या हैं? की जांच करने को कहा है।

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Published on:
03 Jan 2018 12:49 pm
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