ऐसा है नगर निगम: बारिश में हादसे का कारण बन सकती हैं, दो दर्जन मकान जर्जर, एक माह में सिर्फ एक पर कार्रवाई
सतना. नगर निगम प्रशासन द्वारा की गई मानसून पूर्व तैयारियों की पोल एक-एककर खुलने लगी है। बारिश से पूर्व शहर की जलभराव एवं जर्जर इमारतों को लेकर निगम प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई संतोषजनक नहीं है। इसका खामियाजा शहरवासियों को बाढ़ के रूप में भुगतना पड़ता है। निगमायुक्त ने बारिश पूर्व शहर में खड़ी जर्जर इमारतों का सर्वे कर सूची तैयार करने को इंजीनियरों को कहा था। सर्वे कर सूची तैयार की गई। निगम सूत्रों ने बताया कि नगर निगम द्वारा दो दर्जन से अधिक मकान जर्जर घोषित करते हुए मकान मालिकों को खाली करने का नोटिस दिया गया पर जर्जर भवन गिराने की कार्रवाई नोटिस से आगे नहीं बढ़ पाई। शहर के रिहायशी और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में खड़ी जर्जर इमारत बारिश के मौसम में हादसे का कारण बन सकती है। इसके बावजूद जर्जर भवनों पर कार्रवाई को लेकर निगम प्रशासन लापरवाह बना है। अनदेखी का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि बीते एक माह में नगर निगम द्वारा सिर्फ एक जर्जर भवन गिराने की कार्रवाई की गई। जबकि निगम की सूची में शहर की २५ इमारतें जर्जर व गिराने योग्य हैं।
कार्रवाई नहीं, वसूली पर नजर
निगम सूत्रों ने बताया, जर्जर भवन गिराने की कार्रवाई के नाम पर निगम के अतिक्रमण दस्ते की नजर अवैध वसूली पर रहती है। विभाग के अधिकारी रसूखदारों के इशारे पर विवादित पुरानी इमारतों को चिह्नित करते हैं और एक पक्ष से मोटी रकम लेने के बाद मकान को जर्जर बताकर गिरा दिया जाता है। जबकि जो इमारतें गिराने लायक हैं उन्हें गिराने की बजाय कार्रवाई के नाम पर हर साल मकान मालिक को नोटिस जारी कर दी जाती है।
हादसे के बाद भी नहीं चेते
स्टेशन रोड स्थित पालिका बाजार की अधिकांश दुकानों का छज्जा जर्जर है। बीते साल बारिश से पहले पालिका बाजार की दुकानों का एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया था। शाम लगभग चार बजे हुए हादसे में दुकानदार एवं राहगीर बाल-बाल बच गए थे। जबकि छज्जे का मलबा गिरने से स्कूटी सहित आधा दर्जन वाहन उसमें दबकर क्षतिग्रस्त हुए थे। हादसे के बाद जागे निगम प्रशासन ने जर्जर दुकानों का कुछ हिस्सा तोड़ दिया था। कुछ दुकानें एवं छज्जा आज भी जर्जर हैं, जिसे न तोड़ा गया और न ही उसकी मरम्मत कराई गई।