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जिला अधिकारियों ने काउंसलिंग के लिए बदल दिए शासन के नियम

शासन ने सिर्फ अतिशेष के लिए दिए थे निर्देश, जिले में सभी की करा दी काउंसलिंगव्यापक पैमाने पर हुआ फर्जीवाड़ा, कई अधिकारी और कर्मचारी सवालों के घेरे में  

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District Officials changed the rules of governance for counseling

काउंसलिंग को लेकर आयुक्त लोक शिक्षण और डीईओ के अलग-अलग आदेश

सतना. उत्कृष्ट विद्यालयों में ऑनलाइन चयन परीक्षा से चयनित शिक्षकों की विद्यालयों में उपस्थिति के बाद अतिशेष शिक्षकों की अन्यत्र पदस्थापना के लिए हुई काउंसलिंग में व्यापक पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्थिति यह है कि जिले के अधिकारियों ने शासन के नियमों के विपरीत जाकर काउंसलिंग कर ली और फर्जीवाड़े को छिपाते हुए जिपं सीइओ और कलेक्टर से भी हस्ताक्षर करवा लिए। हद तो यह हो गई कि शासन के जिस आदेश का हवाला देते हुए जिले में काउंसलिंग का आदेश जारी किया गया उसे बदलते हुए अपनी नीति जारी कर दी। इस गड़बड़झाले से कई अपात्र लोगों को उनकी चाही गई संस्थाओं में नियम विरुद्ध तरीके से भेज दिया गया। सुनियोजित तरीके से किए गए इस खेल में बड़े लेनदेन की चर्चा है।

आयुक्त लोक शिक्षण ने 29 मई 2019 को जिला शिक्षाधिकारी को आदेश जारी किया था। जिसमें जिला स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालयों में ऑनलाइन चयन परीक्षा से चयनित शिक्षकों की उपस्थिति के पश्चात अतिशेष शिक्षकों को अन्यत्र पदस्थ किया जाना था। आयुक्त लोक शिक्षण जयश्री कियावत ने स्पष्ट तौर पर विषय का उल्लेख करते हुए कहा है कि जिला स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालय (जो कि सतना में व्यंकट क्रमांक 1 है) के अतिशेष शिक्षकों को अन्यत्र पदांकित नहीं किया गया है। यह स्थिति शासन के निर्देशों के विपरीत है। जिले के ऐसे उत्कृष्ट विद्यालयों में जितने भी शिक्षक अतिशेष हैं उन्हें अन्यत्र पदस्थ करते हुए प्रमाणीकरण भेजने के निर्देश फिर दिए। यह भी कहा कि तय समयावधि में अगर अतिशेष को कार्यमुक्त नहीं किया जाता है तो इन शिक्षकों का जून के भुगतान किए गए वेतन की वसूली जिला उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य एवं डीइओ के वेतन से होगी।
डीइओ कार्यालय से हुआ यह खेल
29 मई 2019 के आयुक्त लोक शिक्षण के आदेश का हवाला देते हुए जिला शिक्षाधिकारी ने 7 जून को एक आदेश क्रमांक/ स्था./ उत्कृष्ट.मॉड./शि.पद/2019/393 जारी किया गया। इसमें 4 जनवरी को आयुक्त द्वारा पुरानी काउंसलिंग को निरस्त किए जाने और नवीन काउंसलिंग कराने का उल्लेख पहले पैरा में किया गया। फिर आगे लिखा गया कि संदर्भित पत्र (29 मई का आयुक्त का पत्र) में जिला एवं विकासखण्ड स्तरीय उत्कृष्ट उमावि एवं मॉजल स्कूलों में पूर्व से पदस्थ शिक्षकों की जिले में रिक्त पदों के विरुद्ध काउंसलिंग के माध्यम से शिक्षकों की पदस्थापना किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। अत: इन निर्देशों के अत: इन निर्देशों के अनुक्रम में जिला एवं विकासखंड स्तरीय उत्कृष्ट उमावि एवं मॉडल स्कूलों में पूर्व से पदस्थ शिक्षकों की जिले में रिक्त पदों के विरुद्ध पदस्थापना काउंसलिंग के माध्यम से की जाना है। इसे गौर से देखा जाए तो पूरा खेल स्पष्ट हो जाएगा कि 29 मई के आदेश में आयुक्त ने अतिशेष शिक्षकों की काउसंलिंग करने कहा था और जिला शिक्षाधिकारी ने पूर्व में पदस्थ सभी शिक्षकों को काउंसलिंग में शामिल कर लिया, जो कि शासन के आदेश के विपरीत है।

गड़बड़ी पर खड़े हुए सवाल

चयनित शिक्षकों के बाद जिन उत्कृष्ट और माडल विद्यालयों में पूरे पद नहीं भरे गए वहां के शिक्षक जो अतिशेष नहीं थे उन्हें जबरन काउंसलिंग में बुलाकर काउंसलिंग की गई। अगर यह भी मान लिया जाए कि उन विद्यालयों में अतिशेष थे तो पुन: उन्ही विद्यालयों में पदस्थापना कैसे कर दी गई।
अतिशेष पर कर दिया अतिशेष
जानकारी सामने आई है कि व्यंकट 2 में गणित विषय के स्वीकृत पद 3 हैं और यहां कार्यरत 6 हैं। 3 शिक्षक यहां अतिशेष होने के बाद भी एक गणित के शिक्षक को पदस्थ कर दिया गया। हालांकि इसमें सफाई दी जा रही है कि नई पदस्थापना के अनुसार यह पदांकन किया गया है। यह जांच का विषय है।

कराएंगे जांच
इस मामले में कलेक्टर सतेन्दऱ सिंह ने कहा कि अभी तक अधिकारी क्या देख रहे थे। वे इस मामले को देखेंगे। गड़बड़ी पर उचित निर्णय लेंगे। उधर सतना प्रवास पर आए स्कूल शिक्षामंत्रई प्रभुराम चौधरी ने इस मामले की जांच कराने की बात कही है।