आईजी ने बैठक लेकर थाना प्रभारियों को दिए निर्देश
सतना। पुलिस महानिरीक्षक रीवा जोन उमेश जोगा ने मुख्यमंत्री की सभा के बाद पुलिस कंट्रोल रूम में जिले के पुलिस अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने सभा में बेहतर कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसपी राजेश हिंगणकर समेत सभी पुलिस अधिकारियों को शाबासी दी।
इसके बाद आगामी ड्यूटी के लिए निर्देश दिए। जानकारी मिली है कि आइजी ने आगमी एक से 10 जून तक किसान आंदोलन के मद्देनजर अगाह किया है कि सभी थाना प्रभारी और राजपत्रित पुलिस अधिकारी सतर्कता बरतें, ताकि लॉ एंड आर्डर के हालात पैदा न हों।
उन्होंने सूचना तंत्र को मजबूत रखने के निर्देश देते हुए कहा कि थाना प्रभारी अपने इलाकों से जानकारी जुटाएं कि किसान आंदोनल में कहां से कितने सदस्य हिस्सा लेने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही किसान नेताओं की जानकारी रखने को भी कहा गया है।
पॉवर ग्रिड के खिलाफ सतना के किसानों में आक्रोश
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के सुभाष पाण्डेय की मानें तो सतना जिला के किसानों में पॉवर ग्रिड कंपनी के खिलाफ जमकर आक्रोश व्याप्त है। किसानों की जमीनों में बिना मुआवजा दिए मनमर्जी तरीके से कंपनी पुलिस-प्रशासन के दम पर टॉवर खड़ा कर रही है। गाइड लाइन के बावजूद मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। विरोध करने पर जेल में डालने की धमकी दी जाती है।
10,000 गावों से निकाली जा रही लाइन
बताया कि प्रदेश में वर्तमान में पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन और मप्र पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के लगभग 300 कार्य चल रहे है। जिनकी उच्च दाव विद्युत लाइन प्रदेश के लगभग 10,000 गावों से निकाली जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमानुसार जिन किसानों के खेतों में टॉवर लगाए जा रहे हैं उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों ने पूर्व में सर्वे के दौरान भी जानकारी दी थी। लेकिन मप्र सरकार किसानों की जमीन हथिया तो रही है लेकिन किसानों को मुआवजे की राशि नहीं मिल रही है।
भारतीय विद्युत अधिनियन में प्रावधान
उच्च दाव विद्युत लाइन एवं टावर निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाता लेकिन किसान को हुई क्षति के लिए इंडियन टेलीग्राफ एक्ट-1885 की धारा 10 एवं धारा 16 तथा भारतीय विद्युत अधिनियन 2003 की धारा 67 एवं 68 के अनुसार किसानों को क्षतिपूर्ति दिए जाने का प्रावधानों है। इन अधिनियमों के अनुसार दी जाने वाले क्षतिपूर्ति को पुनरीक्षित करने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 9-10 अप्रैल 2015 को देश के सभी प्रान्तों के ऊर्जा मंत्रियों एवं ऊर्जा सचिवों की संयुक्त बैठक अयोजित की थी जिसमे मध्यप्रदेश के तत्कालीन प्रमुख सचिव ऊर्जा आईसीपी केसरी भी उपस्थित थे।