मेडिकल सांइस के अनुसार दिल को बचाने के लिए खान-पान और जीवनशैली को बदलाना होगा। ये मुटठी के आकार का दिखने वाला दिल हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
सतना। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब लाइफस्टाइल के कारण कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में से एक है दिल की बीमारी। दिल शरीर में आकार के आधार पर छोटा सा अंग होगा है। अगर यही दिल धड़कना बंद कर दे तो बड़े से बड़ा शरीर बेकार हो जाता है। मेडिकल सांइस के अनुसार दिल को बचाने के लिए खान-पान और जीवनशैली को बदलाना होगा। ये मुटठी के आकार का दिखने वाला दिल हमारे शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस महत्वपूर्ण अंग को सक्रिय बनाए रखने के लिए हमे कुछ तो करना ही चाहिए। ताकि यह अधिक समय तक हमारे शरीर में स्वस्थ्य रहते हुए धड़कता रहे।
सीमित मात्रा में खाए नमक
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि अधिक मात्रा में नमक खाने से रक्तचाप बढ़ता है। रक्तचाप के बढऩे से ह्रदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। एक साधारण आदमी को दिनभर में अधिकतम 5 ग्राम नमक खाना चाहिए। हालांकि हमारे समाज में लोग तीन गुना ज्यादा 16 से 17 ग्राम रोजाना नमक खाते है। इसलिए हमे नियमित खाने में नमक की मात्रा संयमित करनी होगी।
इन खानों से करें परहेज
कहा जाता है कि भोजन के साथ ज्यादातर लोग चटनी, पापड़ व अचार का सेवन करते है। जिससे हमको बचने की आवश्यकता है। अगर इन खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल कर रहे है या फिर बहुत ज्यादा खाने का मन कर रहा है तो कभी-कभार दाल या सब्जी न लेकर थोड़ा सा उपयोग कर ले। इसी तरह चाय के साथ नमकीन का सेवन कतई नहीं करना चाहिए।
ऐसे करें रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल
- बढ़ा हुआ रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल दोनों ही हृदय के बड़े शत्रु हैं।
- जहां रक्तचाप लगातार बढ़ा तो हृदय, किडनी आदि रोग घेर लेते हैं।
- कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से हृदयाघात व पक्षाघात होने का खतरा बढ़ जाता है।
- कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हमारी रक्तवाहिनियों में वसा एकत्रित होने लगती है।
- रक्तवाहिनियां संकुचित हो जाती हैं जिससे ब्लड सर्कुलेशन हृदय तक ठीक से नहीं पहुंच पाता और दिल का दौरा पडऩे की संभावना बढ़ जाती है।
- इसके लिए हमें शारीरिक श्रम करने के साथ आहार में रेशे वाली चीजें खानी चाहिए।
- दालें, मेवे, हरा साग और फल की मात्रा नियमित आहार में बढ़ा सकते हैं।
- अपने रक्तचाप और कोलेस्ट्रोल की जांच नियमित करवाते रहें।
- थोड़ा सा भी स्तर में बदलाव आए तो अपने चिकित्सक को रिपोर्ट दिखा कर सलाह लें।