सतना

कोर्ट का फैसला: मासूम की हत्या कर नाले में गाड़ने वाले हत्यारे को आजीवन कारावास

एडीजे कोर्ट अमरपाटन ने सुनाया फैसला

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Nov 17, 2018
Revenue courts

सतना। मासूम की पत्थर से सिर कुचल कर नाले में गाडऩे वाले आरोपी को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार शर्मा की कोर्ट ने शुक्रवार दोपहर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन की ओर से एजीपी उमेश शर्मा ने न्यायालय में पक्ष रखा। एजीपी उमेश शर्मा ने बताया कि घटना रामनगर के करहिया गांव के हरिजन बस्ती की है।

आरोपी राजेश साकेत और रामावतार साकेत के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। पड़ोस में रहने वाला राजेश इसी बात को लेकर रंजिश रखता था। 30 मार्च 2018 की दोपहर 1.30 बजे आरोपी राजेश राम अवतार के घर पहुंचा। वहां उसके 8 वर्षीय सोनू को बेल देने का बोलकर घर से ले गया। राजेश मासूम को अपने घर लाया और सिर पर पत्थर पटक कर हत्या कर दी।

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उसने झूठ बोल दिया कि मांस लेकर जा रहा हूं

हत्या करने के बाद मासूम की लाश बोरे में भर सुघड़ा नाले में ले गया और गाड़ दी। इस दौरान रास्ते में मिले गांव के लोगों ने पूछा भी कि बोरे में क्या ले जा रहे हो तो उसने झूठ बोल दिया कि मांस लेकर जा रहा हूं। आरोपी राजेश जब मासूम की हत्या कर उसकी लाश बोरे में लेकर जा रहा था तभी गांव के दो लोगों की नजर उस पर पड़ी।

दोनों को राजेश पर आशंका हुई

दोनों को राजेश पर आशंका हुई कि उसने कुछ गड़बड़ किया गया है। दोनों व्यक्तियों ने राजेश का पीछा किया। देखा कि सुघड़ा नाले में राजेश मासूम की लाश गाड़ रहा है। दोनों ने अपने मोबाइल पर शव गाडऩे की वारदात की रिकॉर्डिंग की और आरोपी जब वहां से चला गया तो गांव वालों को मामले की जानकारी दी। सूचना पाकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे।

सोनू की लाश पड़ी हुई थी

तभी राम अवतार अपने 8 वर्षीय बेटे सोनू की तलाश करता हुआ वहां पहुंचा। ग्रामीणों ने बोरे को खोलकर देखा तो उसमें सोनू की लाश पड़ी हुई थी। उसके सिर में चोट की निशान थे। ग्रामीणों ने मामले की जानकारी रामनगर पुलिस थाना को दी। पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर मामले की विवेचना शुरू की।

विधि व्यवस्था को चुनौती देने जैसा अपराध
विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस की ओर से आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया। अपराध प्रमाणित होने पर कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त का आपराधिक कृत्य उसकी मानसिक स्थिति दर्शाता है कि उसने सोच-समझकर वारदात को अंजाम दिया है। यह एक दुस्साहसपूर्ण आपराधिक कृत्य के साथ सामाजिक सभ्यता और विधि द्वारा स्थापित नियमों को खुली चुनौती देने जैसा है। इसलिए न्यायालय का यह मत है कि अभियुक्त को एेसा दंड दिया जाना चाहिए।

पिता को 25 हजार क्षतिपूर्ति

जिससे अभियुक्त को अपराध का बोध हो और समाज में संदेश जाए कि एेसे मनोवृत्ति रखने वाले अन्य व्यक्ति इस प्रकार का अपराध न कर सकें। न्यायालय ने आरेापी राजेश उर्फ मुन्ना साकेत पिता राममिलन साकेत निवासी ग्राम करहिया हरिजन बस्ती थाना रामनगर को भादसं की धारा 302 के लिए आजीवन कारावास व 10 हजार रुपए जुर्माना, धारा 364 के लिए 10 वर्ष का कठोर कारावास व 10 हजार रुपए जुर्माना, धारा 201 के लिए 7 वर्ष का कठोर कारावास और पांच हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। कोर्ट ने मृतक के पिता को 25 हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने आदेशित किया है।

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Published on:
17 Nov 2018 03:21 pm
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