
सतना। बेरोजगारी, गरीबी, तनाव में नशा के कारण ब्रेन स्ट्रोक नामक बीमारी देशभर में तेजी से फैल रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के मानें तो यह बीमारी ज्यादा दबाव से शरीर में हावी होती है। जब दिमाग के एक हिस्से में ऑक्सीजन और रक्त का बहाव रुक जाता है। जिसकी वजह से उस जगह की कोशिकाएं नष्ट होने लगती है। फिर वो हिस्सा काम करना बंद कर देता है। जिसके कारण या तो व्यक्ति का वो हिस्सा अपाहिज हो जाता है या उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। आजकल ये बीमारी युवाओं में कॉफी ज्यादा देखने को मिल रही है। अगर इस बीमारी का समय पर इलाज नहीं हुआ तो ये दिमाग की कोशिकाओं और आवाज को नुकसान पहुंचाकर व्यक्ति को अपाहिज कर देता है।
ब्रेन स्ट्रोक का कारण
चिकित्सकों की मानें तो युवाओं में स्ट्रोक होने का सबसे बड़ा कारण होता है हाई ब्लड प्रेशर , कम उम्र में डाईबेटिस, कोलेस्ट्रॉल का बढऩा, ज्यादातर युवाओं में धूम्रपान, रोजाना शराब की लत भी होती है। बाहर का अनहेल्थी खाना, जंक फूड, ये सभी चीजें उनके शरीर पर असर करती है और सबसे ज्यादा तनाव, युवाओं की ये सभी चीजें उनके लिए काफी घातक साबित होती है। जिसकी वजह से विकलांग भी हो सकते हैं।
हर साल बढ़ रही मौतें
न्यूरोसर्जन डॉ. दिनेश पटेल का कहना था कि 'हर दिन ब्रेन स्ट्रोक के मामले देश के अस्पतालों में बढ़ रहे है। इस समय भारत में उम्र से पहले ही लोगों की मृत्यु का अहम कारण बनता जा रहा है। इस बीमारी से हर साल हजारों लोग पीडि़त होते हैं। जिनमें से कुछ लोगों की मृत्यु हो जाती है तो कुछ लोग अपनी पूरी जिंदगी विकलांग होकर गुजारते हैं।
कैंसर के बाद दूसरे नंबर की बीमारी
अगर देखा जाए तो कैंसर से सबसे ज्यादा लोगों की मृत्यु होती है और ब्रेन स्ट्रोक अब कैंसर के बाद मरने का सबसे दूसरा बड़ा कारण बन चुका है। स्ट्रोक के कारण हमारे दिमाग पर गहरा असर होता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके इसका इलाज करना चाहिए। वरना मरीज को अपनी जान गवानी पड़ सकती है या तो उसे जिंदगी भर अपना जीवन बिस्तर पर लेटे हुए गुजारना पड़ सकता है।
स्ट्रोक के प्रकार
ब्रेन हेमरेज का एक प्रमुख कारण हाई ब्लडप्रेशर है। इस्कीमिक स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क की धमनियां संकरी या अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह में अत्यधिक कमी हो जाती है। इसे इस्कीमिया कहा जाता है। इस्कीमिक स्ट्रोक के अंतर्गत थ्रॉम्बोटिक स्ट्रोक को शामिल किया जाता है। जब मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में से किसी एक में रक्त का थक्का (थ्रॉम्बस) बनता है तो थ्रॉम्बोटिक स्ट्रोक पड़ता है। यह थक्का धमनियों में वसा के जमाव (प्लॉक) के कारण होता है जिसके कारण रक्त प्रवाह में बाधा आ जाती है। इस स्थिति को एथेरोस्क्लीरोसिस कहा जाता है।
विंध्य के अस्पतालों के ब्रेन स्ट्रोक के आंकड़े
- रीवा: 275 से लेकर 300 तक रोजाना ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आते है।
- सतना: 100 से 15 तक ओपीडी में मरीजों की संख्या।
- सीधी: 50 से 75 तक मरीज प्रतिदिन आ रहे जिला अस्पताल।
- सिंगरौली: 75 से 100 तक ऊर्जा राजधानी में मरीजों की संख्या।
ब्रेन स्ट्रोक के कारण मस्तिक में रक्त आपूर्ति ब्लॉक हो जाती है। कभी-कभी सड़क दुर्घटनाओं में ऐसे केस आते है। ये बीमारी 15 से 35 साल के युवाओं ज्यादातर होती है। क्योंकि बेरोजगारी, गरीबी, तनाव में नशा के कारण केस बढ़ रहे है। अभी कुछ वक्त पहले तक युवाओं में स्ट्रोक के मामले कभी सुनने को नहीं मिलते थे लेकिन अब ब्रेन स्ट्रोक के, मामले ज्यादातर युवाओं में ही देखने को मिल रहे हैं।
डॉ. दिनेश पटेल, न्यूरोसर्जन, एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा