सतना

5 साल से ‘तोता’ बना है मंडी बोर्ड, अध्यक्ष के रसूख के आगे सब नतमस्तक

किस्सा कुर्सी का: दो सदस्यों को किया निलंबित, तीन साल में बदले 7 सचिव

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Aug 18, 2018
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सुखेंद्र मिश्रा @ सतना। प्रदेश की ए ग्रेड मंडियों में शुमार कृषि उपज मंडी समिति सतना में पांच साल तक मंडी बोर्ड 'तोता' बना रहा। अपने राजनीतिक रसूख का फायदा उठते हुए मंडी अध्यक्ष शीला सिंह ने अध्यक्षी बचाने के लिए मंडी बोर्ड के अधिकारियों को जो दिखाया उन्होंने वही देखा। जो करवाया वही किया।

यही कारण है कि इस कार्यकाल में दो सदस्यों को निलंबित किया गया तो तीन साल में सात सचिव बदल दिए गए। मंडी सदस्यों ने भी अध्यक्ष पर कुछ इसी तरह का आरोप लगाया। सदस्यों द्वारा मंडी बोर्ड के अधिकारियों पर लगाए गए इन आरोपों की जब पड़ताल की गई तो उनके दावों में सच्चाई नजर आई।

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निष्पक्षता पर सवाल खड़ा

इस दावे की प्रमाणिकता यह है कि सदस्यों के विरोध के कारण अल्पमत में आईं सतना मंडी अध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव जीतने के लिए विपक्ष के दो सदस्यों की शिकायत मंडी बोर्ड में करते हुए उनकी सदस्यता निरस्त करा दी। मंडी अध्यक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए दबाव में मंडी बोर्ड ने तीन साल में सतना मंडी में सात सचिव भी बदले। बोर्ड की यह दोनों कार्रवाई अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर रही है। सतना मंडी समिति के सदस्यों का कहना है कि मंडी बोर्ड ने पांच साल सिर्फ मंडी अध्यक्ष को लाभ पहुंचाने का काम किया है। मंडी बोर्ड के अधिकारी पांच साल तक किसान, व्यापारी तथा सदस्यों की शिकायतों को अनुसना करते रहे।

ये आते-जाते रहे
सबसे पहले सचिव अरविंद ताम्रकार का स्थानांतरण हुआ। मंडी में प्रशासक के रूप में सहायक संचालक करुणेश तिवारी की नियुक्ति की गई। लेकिन, उनका चुस्त प्रशासन मंडी अध्यक्ष को रास नहीं आया। दबाव में मंडी बोर्ड ने एक साल में उन्हें हटाते हुए दूसरे सहायक संचालक राजेश द्विवेदी को सचिव नियुक्त किया। जब उन्होंने बाजार एवं उप-मंडियों में हो रही अवैध वसूली पर लगाम कसी तो मंडी बोर्ड ने छह माह में ही उनका स्थानांतरण कर दिया। इसके बाद काम चलाऊ सचिव के रूप में एसडी वर्मा को नियुक्त किया गया पर अध्यक्ष की तानाशाही से तंग होकर उन्होंने अपना स्थानांतरण करा लिया। इस प्रकार मंडी अध्यक्ष के लिए मंडी बोर्ड ने तीन साल में सात सचिव बदले। इसके बाद भी मंडी की सूरत नहीं बदली।

एक अपराध, दो तरह की कार्रवाई
मंडी बोर्ड के अधिकारियों ने सत्ता पक्ष की मंडी अध्यक्ष को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए अपने अधिकारों का जमकर दुरुपयोग किया। इसका बड़ा उदाहरण यह है कि जिस नियम का हवाला देकर मंडी बोर्ड ने नियम विरुद्ध जाकर निर्णय लेने के जिस मामले में औबेदुल्लागंज मंडी समिति को तत्काल प्रभाव से भंगकर वहां प्रशासक नियुक्त कर दिया था, जब अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सतना मंडी समिति द्वारा एक व्यापारी को लाभ पहुंचाने का मामला मंडी बोर्ड पहुंचा तो जांच के बाद मंडी बोर्ड ने इसे बड़ा अपराध मानते हुए सभी सदस्यों की सदस्यता भंग करने का नोटिस तो जारी किया पर जब अध्यक्ष को अपनी कुर्सी खतरे में नजर आई तो उन्होंने मंडी बोर्ड पर दबाव बनाते हुए मामले को दबा दिया। मंडी बोर्ड ने अध्यक्ष की कुर्सी बचाने अक्षम्य अपराध करने पर समिति भंग करने की बजाय सदस्यों को चेतावनी देकर फाइल में खात्मा लगा दिया।

100 से अधिक शिकायत, कार्रवाई एक में भी नहीं
मंडी अध्यक्ष की शिकायत पर बोर्ड के अधिकारियों ने हर बार त्वरित कार्रवाई की। अध्यक्ष के खिलाफ मंडी बोर्ड में 100 से अधिक शिकायतें मंडी सदस्य तथा किसानों द्वारा की गईं पर बोर्ड के अधिकारियों ने प्रमाणित होने के बावजूद कृषक प्रतिनिधियों की सभी शिकायतंे कचरेदान में डाल दिया।

पांच साल में क्या-क्या हुआ
- बोर्ड ने अध्यक्ष की शिकायत पर कोठी वार्ड 4 के कृषक प्रतिनिधि गोविंद सोनी व हम्माल प्रतिनिधि चिंतामन साकेत की सदस्यता निलंबित की।
- अध्यक्ष से तालमेल न बैठने के कारण तीन साल में मंडी बोर्ड ने सतना मंडी में 7 सचिव बदले, जो मंडी के इतिहास में एक रेकॉर्ड है।
- अध्यक्ष का विरोध करने वाले कृषक प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने मंडी बोर्ड ने आठ सदयों को सदस्यता समाप्त करने का नोटिस जारी किया।
- दो-दो माह मंडी समिति की बैठक न बुलाने एवं सदस्यों के एजेंडे शामिल न करने की शिकायतों को कूड़ेदान में डाला।


बोर्ड ने पांच साल तक सिर्फ मंडी अध्यक्ष की सुनी। हम लोग अपने क्षेत्र की मंडियों का विकास कराने मंडी समिति एवं बोर्ड में गुहार लगाते रहे पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। मंडी बोर्ड की यह मनमनी समाप्त होनी चाहिए। मंडी सदस्यों को भी कुछ अधिकार मिलने चाहिए, जिससे अध्यक्ष की तानाशाही बंद हो और मंडी में किसान हित के काम हो सकें।
अखिलेश पाण्डेय, उपाध्यक्ष मंडी समिति सतना

मंडी बोर्ड ने सतना मंडी में सिर्फ अध्यक्ष को लाभ पहुंचाने वाले काम ही किए हैं। सत्ता के दबाव में एमडी मंडी बोर्ड पांच साल तक अध्यक्ष के हाथ की कठपुतली बने रहे। इससे मंडी का बहुत नुकसान हुआ है। मंडी अध्यक्ष और बोर्ड पदाधिकारियों की मिलीभगत से सतना मंडी राजनीति का अखाड़़ा बन गई। खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
धीरेन्द्र सिंह धीरू, कृषक प्रतिनिधि

सत्ता पक्ष के दबाव में मंडी बोर्ड के संचालक ने नियम कायदों को ताक पर रखकर अपने अधिकारों का जमकर दुरुपयोग किया। मैं किसान एवं मंडी श्रमिकों के हित के लिए अध्यक्ष का विरोध करता था। इसलिए उन्होंने सत्ता का लाभ उठाते हुए पहले सचिव पर दबाव बनाकर गलत तरीके से मेरा लाइसेंस निरस्त कराया, फिर एमडी से मिलीभगत कर मेरी सदस्यता निरस्त करा दी।
चिंतामन साकेत, पूर्व तुलावटी हम्माल प्रतिनिधि

मंडी बोर्ड किसी को लाभ या हानि पहुंचाने के लिए काम नहीं करता। इसके अपने नियम कानून हैं। उसी के तहत मंडियों का संचालन किया जाता है। मंडियों में सचिवों की नियुक्ति एवं उनके स्थानांतरण बोर्ड के अधिकार क्षेत्र की बात है। सतना मंडी में भी प्रक्रिया के तहत सचिवों की नियुक्ति की गई है। इसमें किसी के दबाव जैसी कोई बात नहीं है।
फैज अहमद किदवई, प्रबंध संचालक, मंडी बोर्ड भोपाल

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Published on:
18 Aug 2018 11:50 am
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