Scholarship fraud: जांच के दौरान पाया गया कि कई भुगतान ऐसे खातों में किए गए हैं जो विद्यार्थियों के नाम से जुड़े ही नहीं थे।
Scholarship Fraud: आदिम जाति कल्याण विभाग में वर्ष 2017 से 2019 के बीच विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। जांच में पता चला है कि करीब 92.22 लाख रुपए की छात्रवृत्ति राशि विद्यार्थियों के खातों में जाने के बजाय अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं के खातों में जमा कर दी गई। यह मामला सतना, ग्वालियर, जबलपुर, भोपाल और सागर जिलों में सामने आया है। इस गड़बड़ी को लेकर प्रधान महालेखाकार (एजी) ने ऑडिट आपत्ति दर्ज की है।
जानकारी के अनुसार, इन दो वर्षों के दौरान आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति की राशि कोषालय से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जानी थी। लेकिन कई मामलों में संबंधित शैक्षणिक संस्थानों ने विद्यार्थियों के खातों की जगह अपने या अन्य खातों की जानकारी दे दी। इसके कारण जब कोषालय से राशि ट्रांसफर की गई तो वह छात्रों के खातों में न जाकर सीधे संस्थाओं या अन्य व्यक्तियों के खातों में चली गई। यह मामला तब सामने आया जब प्रधान महालेखाकार के दल ने छात्रवृत्ति भुगतान से संबंधित अभिलेखों और बैंक खातों का ऑडिट किया।
जांच के दौरान पाया गया कि कई भुगतान ऐसे खातों में किए गए हैं जो विद्यार्थियों के नाम से जुड़े ही नहीं थे। ऑडिट रिपोर्ट में इस पर गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए विभाग को कार्रवाई के लिए अवगत कराया गया है। मामले की जानकारी मिलने के बाद जनजातीय कार्य विभाग (पूर्व में आदिम जाति कल्याण विभाग) ने संबंधित जिलों से तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन शैक्षणिक संस्थाओं या व्यक्तियों के खातों में यह राशि गई है, उनसे वसूली की जाएगी। साथ ही दोषी संस्थानों को ब्लैकलिस्ट करने की भी तैयारी की जा रही है। विभाग का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है और जिम्मेदार अधिकारियों व संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितता दोबारा न हो सके।