बेटों ने मारी बाजी, बेटियां रह गईं पीछे, मेधावियों की सूची में सतना के 10 छात्रों का नाम
सतना। इस बार बेटियों पर बेटे भारी पड़े हैं। जिला मुख्यालय को भेजी गई मेधावी सूची पर नजर डालें तो एक भी बेटी का नाम सूची में नहीं है। जबकि 10 नाम जारी करते हुए सभी विद्यार्थियों को भोपाल बुलाया गया है। सभी छात्र भोपाल के लिए तैयारी करना भी शुरू कर चुके हैं। अभी तक के रेकार्ड देखें तो सतना में बेटियों का दबदबा रहा है। संभवत: पहला मौका होगा जब इस संभावित सूची से जिले की बेटियां गायब होंगी।
हालांकि जिला व संभाग मैरिट पर भी सबकी नजर रहेगी। ये सूची भी 14 मई को रिजल्ट घोषणा के साथ ही जारी हो जाएगी। शिक्षा विभाग से जुड़े विशेषज्ञ कहते हैं कि सफल होने वाले विद्यार्थियों के प्रतिशत को देखा जाएगा, तो बेटियों ही भारी पड़ेंगी। लिहाजा मैरिट में नाम न आने को लेकर कमजोर नहीं आंका जा सकता। बेटियों का प्रदर्शन जिले में हमेशा ही बेहतर रहा है।
परिस्थितियों को हराकर बने विजेता
अगर, मेधावी छात्रों की सूची पर नजर डालें तो अधिकतर बच्चे मध्यमवर्गीय व कमजोर परिवार से संबंधित हैं। उनके लिए परिस्थितियां भी अनुकूल नहीं रही हैं। कोई गांव में रहकर संघर्षपूर्वक पढ़ाई करता रहा है, तो किसी के लिए पढ़ाई के संसाधन जुटाना ही चुनौती रहा है। लेकिन, तमाम परिस्थितियों को हराते हुए ये बच्चे विजेता बने हैं।
माता-पिता के प्रोत्साहन ने दिलाई सफलता
टिकुरिया टोला निवासी शोभित कुमार सोनी सरस्वती स्कूल कृष्णनगर के छात्र हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता व गुरुजन को देते हैं। लेकिन, वे कहते हैं कि माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन किया है। आइआइटी की तैयारी कर रहे हैं। बड़े भाई रोहित सोनी इंजीनियर हैं। उन्हीं को देख वे भी इंजीनियर बनाना चाहते हैं। जबकि उनके मझले भाई मोहित कुमार माइनिंग इंजीनियरिंंग कर रहे हैं।
इंजीनियर बनने का सपना
दसवीं की प्रवीण्य सूची में टिकुरिया टोला निवासी राघव सोनी का नाम भी शामिल है। वे अपनी सफलता का श्रेय भगवान, माता-पिता व गुरुजन को देते हैं। वे कहते हैं कि इंजीनियर बनने की तमन्ना है। वे आइआइटी की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि 11वीं के बाद तय करेंगे कि तैयारी के लिए किसी अन्य शहर में जाना है या फिर सतना में रहना है। अभी अपने स्तर पर ही पढ़ाई कर रहे हैं। पिता प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं, मां गृहणी हैं।
क्लर्क का बेटा मैरिट में
अमन कुमार पटेल सतना के विजय कॉन्वेंट स्कूल के १०वीं के छात्र हैं। मैरिट में उनका भी नाम है। वे अपने चाचा रमाशंकर पटेल के यहां रहकर पढ़ाई करते हैं। वे बताते हैं कि पिता उमाशंकर पटेल शासकीय स्कूल त्योंधरी में क्लर्क हैं। माता सुनीता देवी गृहणी हैं। पिता ही पढ़ाई के लिए प्रेरित करते रहे हैं। इसलिए वे सतना चाचा के पास भेजे थे। आइआइटी की तैयारी कर रहा हूं। फिलहाल राजस्थान के कोटा में हूं और तैयारी कर रहा हूं।
गांव में रहकर पढ़ाई की और अब अव्वल
हम लोग पढ़ाई के लिए गांव को अनुकूल नहीं मानते। लेकिन, कोटर के शशांक शुक्ला ने इस धारणा को खारिज कर दिया है। उन्होंने गांव में रहकर ही पढ़ाई करते हुए सूची में नाम दर्ज कराया है। उनके पिता रामभूषण शुक्ला किसान हैं और मां अंजना गृहणी हैं। जब मैरिट में आने की सूचना पहुंची, तो वे अपने चाचा के साथ भोपाल के लिए रवाना हुए। उनकी मानें तो भविष्य में वे प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहते हैं। उनकी बहन रहिकवारा नवोदय विद्यालय की विद्यार्थी है।
शिक्षक का बेटा भी
10वीं सूची में सरस्वती स्कूल के शिवांक तिवारी का नाम भी है। उनके पिता राजीव तिवारी शिक्षक हैं। संयोग से उसी स्कूल में पढ़ाते हैं। लिहाजा, वे कहते हैं कि बेटे के कारण मेरा सम्मान बढ़ा है। शिवांक इंजीनियरिंग करना चाहते हैं। तैयारी भी शुरू कर चुके हैं। माता रानू तिवारी गृहिणी हैं। बड़ा भाई शैलेष तिवारी १२वीं का छात्र है।
एक ही परिवार के दो भाई सूची में
सतना शहर में नईबस्ती क्षेत्र की पहचान पिछड़े वार्ड के रूप में होती है। लेकिन, यहां के दो बच्चों ने इस सूची में नाम दर्ज कर पूरे जिले का नाम प्रदेशस्तर पर रोशन किया है। सबसे ज्यादा खुश इनके परिजन हैं। कारण, दोनों बच्चे एक ही परिवार के हैं। पिता राजेश सोनी कहते हैं कि मेरे लिए दोहरी खुशी है। बड़ा बेटा शिवम सोनी 12वीं की मैरिट में आया है। छोटा बेटा सक्षम सोनी १०वीं की अव्वल सूची में। उल्लेखनीय है कि प्रदेश की इस अव्वल सूची में १२वीं में सतना से इकलौते शिवम सोनी शामिल हैं। शिवम कहते हैं कि मैं आइएएस बनना चाहता हूं। वहीं सक्षम की सीए बनने की तमन्ना है।
हायर सेकंडरी परिणाम कमजोर
मेधावी छात्रों की सूची में हायर सेकंडरी का परिणाम संतोष जनक नहीं है। पूरे जिले से केवल एक विद्यार्थी का नाम है। जबकि, गणित, विज्ञान, वाणिज्य व कला अलग-अलग विषय हैं। सबके लिए १० रैंकिंग जारी होती है। ऐसे में ज्यादा विद्यार्थियों को शामिल होने की संभावना थी। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।
आइआइटी पहुंचने की इच्छा
चित्रकूट के विद्याधाम स्कूल के विद्यार्थी आशुतोष त्रिपाठी का नाम भी इस सूची में आया है। वे इस सफलता का श्रेय माता-पिता व गुरुजन को देते हैं। वे कहते हैं कि ९वीं पास होने के बाद से ही गुरुजन पढ़ाई के लिए प्रेरित करते रहे। पिता रामकिशोर त्रिपाठी कथावाचक हैं। माता गृहिणी हैं। आशुतोष कहते हैं, उनकी इच्छा है कि आइआइटी से पढ़ाई करुं और भविष्य में इंजीनियर बनकर देश की सेवा करूं।
मॉडल व उत्कृष्ट पर सवाल
गुणवत्ता शिक्षा के लिए शासन स्तर से मॉडल व उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना जिले में की गई है। जहां से बड़ी संख्या में मेधावी छात्र भी निकले हैं। लेकिन, इस बार की सूची में इन स्कूलों का नाम नहीं दिख रहा है। शासकीय स्कूल की बात करें तो पूरी सूची में केवल राजीव कुशवाहा ऐसा नाम है जो शासकीय स्कूल कठहा का छात्र है। इसके अलावा कोई शासकीय स्कूल का छात्र मैरिट में नाम नहीं दर्ज करा पाया है। निराशाजनक स्थिति के लिए विद्यार्थियों से ज्यादा जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है। जो अपनी भूमिका का निर्वहन करने में कमजोर साबित हुए हैं।