पुलिस-दावेदारों की चिंता बढ़ी
सतना। विधानसभा चुनाव में तराई के डकैत पुलिस और उम्मीदवारों के लिए चुनौती बनने वाले हैं। सबसे ज्यादा चुनौती कुख्यात डकैत बबुली कोल व लवलेश कोल से मिलने की आशंका है। हाल ही में किया गया तिहरा अपहरण भी इसी ओर संकेत कर रहा है। जानकारों की मानें तो चुनाव से पहले यह वारदात दबाव बनाने के लिए ही की गई थी। वे चुनाव से पहले क्षेत्र में दहशत कायम करना चाहते हैं, ताकि अंतिम समय में किसी व्यक्ति विशेष व पार्टी के पक्ष में फरमान जारी करते हुए प्रभाव उत्पन्न किया जा सके।
इसके बदले संंबंधित से मोटी रकम वसूली जाएगी। सतना, रीवा व पन्ना जिले का कुछ हिस्सा दस्यु प्रभावित है। सतना की चित्रकूट विधानसभा, रीवा की सिरमौर व सेमरिया का 60-70 फीसदी हिस्सा प्रभावित है। इस कारण प्रशासन की ङ्क्षचता बढ़ी हुई है। हालांकि सीमावर्ती इलाकों में दस्यु गैंग की लोकेशन मिलने से पुलिस जंगल में सर्च ऑपरेशन चला रही है। साथ ही दस्यु प्रभावित इलाकों में कड़ी निगहबानी भी की जा रही है।
पुलिस के लिए चुनौती
साढ़े पांच लाख के इनामी कुख्यात डकैत बबुली कोल की तलाश में सतना पुलिस ने रविवार से सीमावर्ती इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। इन इलाकों में शांतिपूर्ण व निष्पक्ष मतदान कराना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। हालांकि इलाके के चप्पे-चप्पे पर पुलिस कॉम्बिंग कर रही है और उप्र पुलिस की भी मदद ली जा रही है।
तराई में उतरे रीवा रेंज के डीआईजी
साढे पांच लाख के इनामी डकैत बबुली कोल और उसके गिरोह पर नकेल कसने के लिए डीआईजी अविनाश शर्मा दल-बल के साथ तराई में कूद पड़े हैं। बगदरा घाटी से तीन लोगों के अपहरण के बाद पुलिस ने डकैतों के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी है। जिसके तहत सोमवार को डीआईजी की अगुवाई में चालीस सदस्यीय पुलिस फोर्स ने सती अनुसुईया, बनिया का बाग, ददरी माफी, खड़ेश्वर बाबा, अमरावती जंगल, खडरिया पहाड समेत उत्तरप्रदेश से लगती सीमा पर सघन सर्चिंग की। डकैतों के ठिकानों की टोह लेने के साथ ही आदिवासियों को मदद के लिए तैयार किया। सर्चिंग में मझगवां टीआई केएस टेकाम, सभापुर टीआई विनय यादव, ट्रैफिक थाना प्रभारी सुधांशु तिवारी,सब इंस्पेक्टर ओपी सिंह आदि अपनी-अपनी टीम के साथ मोर्चा संभाला।