
रीवा। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी दल अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगे हैं। रीवा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली में बैठी मैडम ने शिवराज सरकार को मुक्त होकर विकास कार्य नहीं करने दिया। 10 साल बीजेपी सरकार के दिल्ली में बैठी गवर्नमेंट के साथ संघर्ष में गए।
पीएम ने कहा, कांग्रेस की सरकार का मतलब भाई-भतीजावाद, जातिवाद, संप्रदायवाद और भ्रष्टाचार है। कांग्रेस का इतिहास रहा है कि एक बार जिस प्रदेश की जनता कांग्रेस को हटा देती है तो दोबारा लौटने का मौका तक नहीं देती। उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात जैसे कई प्रदेश इसका उदाहरण हैं। अब मध्यप्रदेश की जनता की बारी है कि यहां कांग्रेस की सरकार को नहीं आने दें।
किसानों को जिंदगीभर कर्ज देने से मनाही
सोनिया गांधी का नाम लिए बगैर मोदी ने कहा, दिल्ली में मैडम की सरकार ने किसानों के 6 लाख करोड़ रुपए के कर्जे में 60 हजार करोड़ का कर्ज भी माफ नहीं किया। कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिनका कर्ज माफ किया, उसमें से 30-40 लाख लोगों का कर्ज माफ करने का कोई कारण ही नहीं था, लेकिन उनके यार-दोस्तों के खातों में रुपए डाले गए। जब चोरी पकड़ी गई तो उन्होंने नया खेल किया कि करीब सवा करोड़ लोगों को सर्टिफिकेट ही नहीं दिया कि आपका कर्ज माफ हो गया।
दिल्ली में चार पीढ़ी से अधिक नहीं चलता शासन
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, दिल्ली का इतिहास रहा है, चाहे वह सतयुग, त्रेतायुग हो या मुगल सल्तनत। वहां शासन करने वालों की सल्तनत कितनी भी बड़ी रही हो, चौथी पीढ़ी के बाद समाप्त हो जाती है। कांग्रेस की भी चौथी पीढ़ी चल रही है, यह समाप्त होने की स्थिति में आ गई है।
कर्नाटक में किसानों को गुंडा कहा जा रहा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कांग्रेस ने किसान द्रोह का काम किया, जिसे कभी माफ नहीं किया जा सकता। कर्नाटक में भी उसने किसानों से कर्जमाफी का वादा किया था। वोट ले लिए, सरकार बना ली। अब किसानों को जेल भेजने के लिए वारंट निकल रहे हैं। आज कर्नाटक में किसानों का आंदोलन चल रहा है तो सरकार उन्हें गुंडा कहकर बुला रही है। पीएम ने कहा, ऐसा ही ड्रामा कांग्रेस ने 2008 में किया था। 2009 के चुनाव के पहले किसानों की कर्जमाफी का ढोल पीटा था। चुनाव जीत लिया, लेकिन कर्ज माफ नहीं किया। इसलिए अब कांग्रेस के कर्जमाफी के झांसे से बचने की जरूरत है।