
MGNREGA Fake job card scam: मनरेगा में डुप्लीकेट जॉब कार्ड बनाकर सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला बड़े पैमाने पर सामने आया है। मध्यप्रदेश में 1,61,904 परिवारों के नाम पर डुप्लीकेट जॉब बनाए जाने का मामल सामने आया है। इनमें से 1.60 डुप्लीकेट जॉब कार्ड का सत्यापन कर डिलीट करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अभी 2068 परिवारों का सत्यापन बाकी है। लेकिन इस फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को हुए नुकसान की न तो भरपाई की गई और न ही जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई हुई है।
जानकारी के अनुसार सतना और मैहर जिले में 5592 परिवारों के डुप्लीकेट जॉब कार्ड बनाए गए थे। इनमें से 5562 का सत्यापन कर इन्हें डिलीट कर दिया गया है। 30 का सत्यापन होना बाकी है। रीवा संभाग में देखें तो इसी तरह सिंगरौली में 1270 डुप्लीकेट जॉब कार्ड बनाए गए है। बाकी रीवा और सीधी जिले में डुप्लीकेट कार्ड के मामले सामने नहीं आए हैं।
पत्रिका की जांच में सामने आया है कि डुप्लीकेट जॉब कार्ड का मामला केवल एक ही व्यक्ति के नाम पर दो कार्ड बनने का भर नहीं है, बल्कि डुप्लीकेट कार्ड के जरिए फर्जी तरीके से रोजगार दिया जाना दिखा कर मजदूरी भुगतान करने का भी मामला सामने आया है। सतना-मैहर जिले में करीब 800 कार्डों पर 66 हजार दिवस का काम देना दिखाया गया है। इसके एवज में लगभग 1.25 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान किया गया। स्पष्ट है कि डुप्लीकेट कार्ड बना कर मनरेगा के जरिए बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है।
जॉब कार्ड बनाने का काम संबंधित पंचायत के रोजगार सहायक (जीआरएस) का होता है। ऐसे में डुप्लीकेट कार्ड बनाने के मामले में रोजगार सहायक की भूमिका सवालों में है। इतना ही नहीं इन डुप्लीकेट जॉब कार्ड पर रोजगार भी दिया जाना उनकी भूमिका साबित कर रहा है।
स्थिति देखे तो सबसे ज्यादा 11569 कार्ड धार जिले में बनाए गए हैं। बड़वानी में 10945, खरगोन में 8818, सतना में 5592 और टीकमगढ़ में 4427 कार्ड बनाए गए। सबसे कम डुप्लीकेट कार्ड वाले जिले देखे तो मुरैना में 9, उमरिया में 46, दमोह में 71, ग्वालियर में 124 और भिंड में 139 डुप्लीकेट जॉब कार्ड बनाए गए हैं।
यह मामला पीएम आवास योजना की प्रतीक्षा सूची से सामने आया। स्थायी प्रतीक्षा सूची में शामिल कुछ पात्र हितग्राहियों का पंजीयन इसलिए नहीं हो पा रहा था, क्योंकि उनका जॉब कार्ड पहले से किसी दूसरे हितग्राही के नाम पर दर्ज था। समाधान के लिए केंद्र सरकार ने जिला स्तर पर ऐसे हितग्राहियों की पहचान की तो डुप्लीकेट कार्ड बनने का मामला सामने आया।
अगर फर्जी भुगतान किया गया है तो यह मामला आपने संज्ञान में लाया है। इस मामले को चेक करवाते हैं। उसकी रिकवरी की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई भी करेंगे।- सपना त्रिपाठी, जिला पंचायत