सतना

satna: अब भारत में एक्सपोर्ट क्वालिटी का अनार तैयार करना होगा आसान

सतना के वैज्ञानिक ने देश में पहली बार की अनार की जीनोम सीक्वेंसिंग भारत में होता है विश्व का 50 फीसदी अनार, निर्यात सिर्फ 3 फीसदी
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Sep 27, 2022
satna: अब भारत में एक्सपोर्ट क्वालिटी का अनार तैयार करना होगा आसान
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सतना। भारतीय वैज्ञानिकों ने देश में पहली बार अनार की पूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग का काम पूरा कर लिया है। इस काम को पूरा करने में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केन्द्र सोलापुर और जीनोमिक्स लैब न्युक्लियोम इंफॉर्मेटिक्स ने सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत किया। इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय अनार अनुसंधान केन्द्र सोलापुर के नीलेन्द्र विक्रम सिंह ने लीड किया है और जीनोम सिक्वेंसिंग का काम जीनोम वैज्ञानिक सतना निवासी दुष्यंत सिंह ने किया। इस प्रयोग के बाद अब अनार के सभी अनुवांशिक गुणों की पहचान कर ली गई है। इसके बाद अब अनार सुधार कार्यक्रम को गति मिल सकेगी।

विश्व में सबसे ज्यादा उत्पादन पर निर्यात नाम मात्र का

दुष्यंत सिंह ने बताया कि विश्व स्तर पर अनार के उत्पादन के मामले में भारत पूरी दुनिया का 50 फीसदी से ज्यादा का अनार उत्पादन करता है। लेकिन यह अनार एक्सपोर्ट क्वालिटी का नहीं होने के कारण देश से बाहर इसका निर्यात बहुत ही कम होता है। इनकी किस्म सुधार के लिये जरूरी जीनोमिक संसाधनों की कमी होने के कारण इसका विकास तेजी से नहीं कर पा रहे थे। जबकि अनार एक बहुत ही कीमती फसल है। लेकिन अब अनार की संपूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग हो जाने से इसके सभी जीन की जानकारी मिल गई है और उनके अनुवांशिक गुणों का भी पता चल गया है। रिसर्च में भारतीय अनार की किस्म 'भगवा' का इस्तेमाल किया गया।

यहां किया गया अनुसंधान

जीनोम सीक्वेंसिंग का अनुसंधान दुष्यंत सिंह की हैदराबाद स्थित भारतीय जीनोमिक्स लैब न्यूक्लियोम इंफॉर्मेटिक्स में किया गया। न्यूक्लियोम एशिया की एकमात्र प्रयोगशाला है जो दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित जीनोमिक्स कार्यक्रम 'द वर्टेब्रेट जीनोम प्रोजेक्ट' से संबद्धित है। न्यूक्लियोम इंडो कोरियन प्रोजेक्ट के तहत रेटिनल बीमारियों के लिए भारतीय जिनोम आधारित जीनोमिक्स चिप भी विकसित कर रहा है।

यह होगा फायदा

अनार की पूरी जीनोम सीक्वेंसिंग में कामयाब होने से अब पैदावार में व्यापक सुधार होगा, इसके पोषण को बढ़ाने के लिए कई बेहतर और रोग एवं कीट प्रतिरोधक किस्मों को विकसित करने में आसानी होगी। इसके बाद किसानों के फलों की पैदावार में बढ़ोत्तरी होने, फल की गुणवत्ता बढ़ने, कम बीमारी और कीड़ा लगने तथा फ़सल की सेल्फ लाइफ ज्यादा होने से उनकी आय में बढ़ोत्तरी होगी और इससे उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। अब इस सीक्वेंसिंग से हाई क्वॉलिटी वाले अनार जल्दी विकसित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय अनार का निर्यात कई गुना बढ़ जाएगा। वहीं पौष्टिक और स्वास्थ्य की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कई तरह की अनार की किस्में उपलब्ध होंगी।

Published on:
27 Sept 2022 11:38 am