वनराज की तलाश में वनाधिकारियों ने छान मारा पूरा गांव, मिले महज बाघ के पगमार्क, सिरगो पहाड़ से उसरार जंगल के बीच मूवमेंट
सतना। अमरपाटन वन रेंज के जमताल गांव में बाघ देखे जाने की खबर के दूसरे दिन गुरुवार को भी वन विभाग की तीन टीमों ने तीन गांव सहित आसपास का पूरा इलाका छान मारा। गांव में बाघ को देखे जाने के दावे के बीच ग्रामीणों में दहशत बनी रही।
सुबह से शुरू हुई सर्चिंग में बाघ तो कहीं नजर नहीं आया पर उसके 15 सेमी के करीब सवा सौ पगमार्क दो किमी के अंतराल में जमताल से लेकर सिरगो पहाड़ तक मिले।
पगमार्क के परीक्षण के बाद वन विभाग के अधिकारी इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि गांव में आया वन्यजीव वयस्क नर बाघ है। उसकी उम्र ३ से साढ़े तीन साल की हो सकती है। हालांकि शिकार की सूचना नहीं है।
तीन टीमें सिरगो पहाड़ के आसपास तैनात
ग्रामीणों के दावे और पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग की तीन टीमें सिरगो पहाड़ के आसपास सुरक्षा के लिए तैनात की गई हैं। डीएफओ के अनुसार बुधवार को बाघ जमताल गांव के बाहर किसी खेत में था। सुबह 4 बजे वह सिरगो की ओर चला गया और अब तक वहीं डेरा जमाए है। उसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। वन विभाग के दावों के अनुसार, यह बाघ संजय नेशनल पार्क सीधी का हो सकता है।
थाने की पुलिस भी तैनात
जो नई टेरिटरी व मादा की तलाश में 150 किमी. का फासला तय कर यहां तक पहुंचा है। यह बाघ की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। इलाके में सुरक्षा के मद्देनजर नादन थाने की पुलिस भी तैनात की गई है। विभाग और पुलिस का मानना है कि बाघ पहाड़ के रास्ते ही पुन: वापस चला गया है, हालांकि शुक्रवार को भी सर्च अभियान चलाया जाएगा।
संजय नेशनल पार्क ने माना-दो बाघ गायब
अमरपाटन रेंज के जमताल गांव तक आने के बाद सिरगो पहाड़ में विचरण करने वाला बाघ संजय डुबरी नेशनल पार्क सीधी का होने की पूरी संभावना है। जमताल में बाघ की पुष्टि होने के बाद संजय नेशनल पार्क सीधी के अधिकारियों ने डीएफओ मिश्रा को बताया कि पार्क से करीब 3 वर्ष की उम्र वाले दो नर बाघ गायब हैं। वे बिना कॉलर आईडी के हैं।
दो शावक अब नजर नहीं आ रहे
उनके अनुसार तीन साल पहले नेशनल पार्क की एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया था। इसमें 2 नर व दो मादा थे। बाघिन के वयस्क हुए दो शावक अब नजर नहीं आ रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, मादा बाघ शिकार का हुनर सिखाने के बाद अपने शावकों को तीन साल में अलग कर देती है।
बाघ टेरिटरी की तलाश
इसके बाद बाघ अपना इलाका खुद बनाता है। अधिकारियों की मानें तो एक बाघ टेरिटरी की तलाश में बांधवगढ़ नेशनल पार्क उमरिया की ओर निकल गया है, जबकि दूसरा सतना जिले में प्रवेश कर गया होगा। जमताल में आया बाघ संजय नेशनल पार्क की बाघिन का दूसरा शावक हो सकता है।
ग्रामीणों को दिखाई पैंथर, हाइना व बाघ की फोटो
आधा दर्जन ग्रामीणों द्वारा देखे जाने का दावा किए जाने और सवा सौ के करीब पगमार्क मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने बाघ की मौजूदगी की तसल्ली करने के लिए एक और तरीका अपनाया। दूसरे दिन जमताल पहुंचे डीएफओ राजीव मिश्रा ने भैयालाल आदिवासी सहित अन्य लोगों को बुलाकर सबसे पहले पैंथर, हाइना (लकड़बग्घा) की फोटो दिखाई। जब ग्रामीणों ने कहा कि जिस जीव को हमने देखा था वह इनमें से नहीं है। इसके बाद बाघ की फोटो दिखाने पर ग्रामीणों ने बताया कि यही जानवर आया था। डीएफओ ने बताया कि कई बार हाइना व पैंथर को भी ग्रामीण शेर-बाघ समझ लेते हैं।
जमताल तक कैसे आया
बुधवार की शाम जमताल में ग्रामीणों के बीच दहशत फैलाने वाला बाघ संजय राष्ट्रीय उद्यान से अमरपाटन तक कैसे पहुंचा? इसकी जानकारी वन विभाग जुटा रहा है। अधिकारियों के अनुसार चार दिन पहले पपरा पहाड़ पर जिस बाघ के पगमार्क मिले थे, वह इसी बाघ के हैं। बताया कि मंगलवार की रात बाघ पपरा पहाड़ से उतर कर हाइवे पार करते हुए जमताल के पहले जंगल तक पहुंचा है। इसी दौरान बुधवार को वह जमताल गांव के बाहर तक पहुंचा, जिसे ग्रामीणों ने देखते ही शोर मचा दिया।
15 सेमी. के सवा सौ पगमार्क
जमताल व सिरगो पहाड़ तक सर्चिंग में जुटी तीनों टीमों को भले ही बाघ सामने से नजर नहीं आया, लेकिन उसके द्वारा छोड़े गए करीब सवा सौ पगमार्क मिले हैं। गांव के पास एक पानी का नाला, शिवमंदिर निकट खाली प्लाट तथा गांव के बाहर पगडंडी के कई स्थानों पर बाघ के पदचिह्न मिले। करीब दो दर्जन से अधिक स्थानों पर बाघ के पैरों के निशान पाए गए।
नमीयुक्त मिट्टी होने से पगमार्क बन गए
अधिकारियों ने बताया कि जमताल गांव के बाहर से दो किमी दूर सिरगो पहाड़ तक खेत में गीली व नमीयुक्त मिट्टी होने से पगमार्क बन गए। सभी पगमार्क जमताल से सिरगो जाने की तरफ बने। बाघ कहां से गांव पहुंचा? इसके कोई पगमार्क नहीं मिले। सभी पगमार्क 15 सेंटी मीटर के हैं। इन्हीं के जरिए अधिकारी बाघ के नर होने व उसकी उम्र का अनुमान लगा रहे हैं।
पगमार्क इशारा कर रहे हैं कि यह युवा नर बाघ है। इसकी आयु तीन साल होगी। बाघ अभी सिरगो पहाड़ में है, जहां से पन्ना या बांधवगढ़ नेशनल पार्क कहीं जा सकता है। बाघ का इस तरह आना नेचुरल है।
राजीव मिश्रा, डीएफओ