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घर के बाहर खड़ी किशोरी को 3 युवकों ने किया अपहरण, फिर जानिए कार में बैठने के बाद क्या किया

पुलिस से नहीं मिली मदद, डायल 100 के स्टाफ ने कराया भर्ती

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satna

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सतना. नाबालिग लड़की के साथ मनमानी करने के बाद कार सवार उसे बुधवार की रात बीच सड़क पर छोड़कर भाग निकले। कोहरे के बीच सर्द रात में युवती ठिठुरती रही और मदद की आस में सड़क पर ही उसने वक्त गुजारा। जब किसी तरह डायल 100 को खबर मिली तो तड़के डायल 100 टीम ने बिड़ला अस्पताल के पास से उसको बरामद कर जिला अस्पताल पहुंचाया।

इस गंभीर मामले में यह बात सामने आई कि न तो बिड़ला अस्पताल और न ही जिला अस्पताल से थाना पुलिस को खबर दी गई। दूसरी ओर डायल 100 स्टाफ ने भी सक्षम अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला नहीं लाया। एेसे में जब गुरुवार की शाम पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगणकर को सूचना मिली तो उन्होंने कोलगवां थाना पुलिस को रवाना कर पीडि़ता के बयान दर्ज कराते हुए अपराध कायम कराया।

सुबह 4 बजे जिला अस्पताल में भर्ती

सूत्रों के मुताबिक, डायल 100 स्टाफ ने युवती को गुरुवार की सुबह सवा चार बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराते हुए बताया था कि चार पहिया गाड़ी से फेंकने पर चोट लगने से युवती घायल हुई है। तब ड्यूटी डॉक्टर अतीक खान ने पीडि़ता का उपचार शुरू किया और उसके परिजनों को पुलिस के जरिए सूचना कराई।

कार में थे तीन युवक
पीडि़ता ने देररात अपने बयान में पुलिस को बताया, रवि सिंह ने उसे जबरन स्कार्पियो गाड़ी में बैठाया और कुछ सुंघा दिया। उसके साथ रवि सिंह समेत दो अन्य युवक थे। बतौर पीडि़ता रवि सिंह का सेमरिया निवासी पवन सिंह के यहां आना-जाना था। एक बार मेले में रवि को धक्का लगा था तो उसने देख लेने की धमकी दी थी।

सफेद रंग की गाड़ी में जबरन बैठा लिया

बुधवार की रात करीब 10 बजे घर से बाहर निकली तो वहां पहले से मौजूद रवि सिंह ने सफेद रंग की गाड़ी में जबरन बैठा लिया। वह चिल्लाती, इससे पहले उसने कुछ सुंघा दिया। गाड़ी में जबरन बैठाने के दौरान पैर में चोट भी लग गई। वहां से उसे बिड़ला अस्पताल लेकर आए। लेकिन, पैसे न होने पर इलाज नहीं मिला। तब रवि सिंह ने घर से पैसे लाने का कहकर बीच सड़क पर छोड़ चला गया।

मुकदमा शून्य में कायम

किशोरी के बताए घटनाक्रम के बाद कोलगवां थाना पुलिस ने आईपीसी की धारा 363 के तहत अपहरण का मुकदमा शून्य में कायम कर सेमरिया थाना पुलिस को जानकारी दी है। उधर, पुलिस कह रही है कि बाद किशोरी को जब होश आया तो उसने खुद को बिड़ला अस्पताल में पाया। जहां आरोपी उसे बाहर ही यह कहकर छोड़ गए कि इलाज के लिए पैसा लेने जा रहे हैं। बिड़ला अस्पताल प्रबंधन ने बिना पैसे के इलाज भी नहीं किया और इस तरह पीडि़ता को डायल 100 के जरिए जिला अस्पताल लाया गया।

नहीं बनाई एमएलसी, पुलिस मान रही हादसे में घायल
यहां डॉक्टर की लापरवाही यह सामने आई कि पीडि़ता की एमएलसी (मेडिको लीगल केस) रिपोर्ट नहीं बनाई। इसके बाद घंटों तक लापरवाही का रवैया अस्पताल में चला। पीडि़ता को दाखिल करने के पांच घंटे बाद सुबह 9.35 बजे जिला अस्पताल के पुलिस सहायता केंद्र को सूचना भेजी गई। सूचना के साथ एमएलसी रिपोर्ट नहीं होने पर उसे संबंधित थाना नहीं भेजा गया। उधर, पुलिस का मानना है कि बीती रात सतना-सेमरिया मार्ग पर एक जीप पलट गई थी। किशोरी उसी हादसे में घायल हुई थी, जिसे उपचार के लिए युवक बिड़ला लेकर आए थे।

पुलिस थी बेखबर
सनसनीखेज अपराध के बारे में पुलिस भी बेखबर रही। युवती को कौन छोड़ गया? उसके साथ क्या हुआ और वह सेमरिया से कैसे पहुंची? इन सवालों के जवाब अगर पुलिस सक्रियता से जान लेती तो अपराधियों तक पहुंचना आसान होता।