
सतना। डीएलएड का कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के कंधों का इस्तेमाल कर डाइट को राजनीति का अखाड़ा बनाने वालों पर अब एफआईआर की तलवार लटक गई है। परीक्षा फार्म भरवाने को लेकर खड़े हुए विवाद के बाद उपस्थिति पंजी गायब करने के प्राथमिक दोषी माने गए तीन लोक सेवकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की अनुमति राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक ने दे दी है। इन लोक सेवकों में दो तत्कालीन प्री सर्विस प्रभारी और एक तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य शामिल है। इस मामले में जिला पंचायत सीईओ के बाद संबंधितों को नोटिस जारी किया गया था। जिसमें से दो ने तो नोटिस लेने से इंकार कर दिया है। एक का जवाब प्राप्त हो गया है। इस आधार पर डाइट प्राचार्य ने जिला पंचायत सीईओ को नोटशीट बढ़ा दी है।
यह था मामला
जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के उपस्थिति विवाद का मामला तूल पकड़ने के बाद तीन-तीन माह की औसत उपस्थिति सूचना संबंधी पंजी गायब कर दी गई थी। अत्यंत महत्व की इस पंजी के गायब होने की जब संस्था द्वारा आंतरिक जांच की गई तो इस मामले में तत्समय पदस्थ रहे तीन लोक सेवकों के नाम सामने आए। तत्समय में इस उपस्थिति पंजी तक पहुंच लोक सेवकों क्रमश: संजीव द्विवेदी तत्कालीन प्री सर्विस प्रभारी, रफीका सिद्दीकी तत्कालीन प्री सर्विस प्रभारी और तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य डाइट आरपी पाण्डेय के पास थी। तमाम प्रयासों के बाद भी उपस्थिति पंजी नहीं मिलने पर इनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने का निर्णय लिया गया।
राज्य शासन से मांगी अनुमति
लोक सेवकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के लिए राज्य शासन से अनुमति अनिवार्य थी। जिस पर डाइट प्राचार्य सच्चिदानंद पांडेय ने राज्य शिक्षा केन्द्र को इस संबंध में संबंधित अभिलेखों के साथ पत्र लिखा। जिस पर राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक डॉ अरुण सिंह ने संबंधितों पर एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति दे दी है। कहा है कि प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति पंजी महत्वपूर्ण दस्तावेज है। अत: संबंधितों पर नियमानुसार विधि सम्मत कार्यवाही की जाए। जिस पर डाइट प्राचार्य ने जिला पंचायत सीईओ को इससे अवगत कराते हुए मार्गदर्शन मांगा। जहां से एफआईआर के पहले संबंधितों को नोटिस देने के निर्देश दिए गए। इसके अनुक्रम में तीनों लोक सेवकों को नोटिस जारी किया गया। जिस पर संजीव द्विवेदी और रफीका सिद्दीकी ने नोटिस लेने से इंकार कर दिया और ये दोनों सेवानिवृत्त हो चुके हैं। आरपी पांडेय ने अपना जवाब दिया है जिसमें उन्होंने बताया कि संजीव और रफीका द्वारा उन्हें उपस्थिति पंजी नहीं दी गई थी।
इधर परीक्षा फार्म भरवाने के मामले में भी गर्दन फंसी
इधर तय मापदंडों के अनुरूप उपस्थिति नहीं होने पर परीक्षा फार्म नहीं भरवाए जाने से उपजे विवाद का मामला संभागायुक्त के पास पहुंचने पर कलेक्टर ने मामले की जांच करवाई। जिसमें पाया गया कि अनुपस्थिति को लेकर संबंधित छात्रों और उनके अभिभावकों को समय पर सूचित नहीं किया गया और उपस्थिति पंजी में कांट छांट, रिक्त कालम में सफेदा लगाया जाना पाया गया। जिसके आधार पर माना गया कि उपस्थिति पंजी संदिग्ध है। इस आधार पर कलेक्टर ने उपस्थिति का नया विवरण तैयार करते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव को इन छात्राध्यापकों को मुख्य परीक्षा का फार्म भरने विशेष अनुमति देते हुए पोर्टल खोलने पत्र लिखा। इस पत्र में 16 छात्राध्यापकों की उपस्थिति का प्रतिशत नये सिरे से तैयार कर भेजा गया। जो पुरानी उपस्थिति विवरण से ज्यादा था। जिसमें दो छात्राध्यापकों की अधिकतम उपस्थिति 70.3 फीसदी थी। इसके बाद तत्कालीन प्राचार्य आरपी पांडेय ने इन सभी के फार्म मंडल विनियम के विरुद्ध जाकर भरवा दिए।
यह हैं मंडल के नियम
मंडल विनियम में स्पष्ट उल्लेख है कि मंडल की परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर संस्था प्रमुख अर्थात डाइट प्राचार्य चाहें तो 3 प्रतिशत तक की छूट दे सकते हैं। इसके बाद प्रमुख सचिव 4 फीसदी की और सभापति 3 प्रतिशत की और छूट दी जा सकती है। इस तरह अधिकतम 10 फीसदी की छूट दी जा सकती है। अर्थात किसी भी स्थिति में 65 फीसदी से कम वालों को यह छूट नहीं मिल सकती थी। लेकिन यहां पर 65 फीसदी से कम वालों को भी यह छूट देते हुए परीक्षा फार्म भरवा दिए गए हैं।
"मामला संज्ञान में है। संबंधित लोकसेवकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। डाइट प्राचार्य द्वारा भेजी गई नोटशीट का अध्ययन करने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।" -शैलेन्द्र सिंह, जिला पंचायत सीईओ