समय पर निर्माण न होने पर लोकोपयोगी कोर्ट में मामला विचाराधीन
सतना। एमपीआरडीसी ने सतना लोकोपयोगी कोर्ट में जिले की तीन सड़कों की स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें सड़कों के अनुबंध से लेकर समय-समय पर लिए गए निर्णय व वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया। ये रिपोर्ट अचानक प्रस्तुत नहीं की गई है, बल्कि एक याचिका के संबंध में जवाब प्रस्तुत किया गया है। सतना लोकोपयोगी कोर्ट में प्रेम नगर निवासी भूपेश कुमार पांडेय ने याचिका लगा रखी है।
इसमें उन्होंने सतना कलेक्टर, प्रमुख सचिव, एमपीआरडीसी सहित आठ को पक्षकार बना रखा है। उनकी ओर से अधिवक्ता राजीव खरे ने बताया कि याचिका में कहा गया है कि जिले से गुजरने वाले हाइवे के निर्माण में जिम्मेदार मनमानी कर रहे हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे
इसके चलते सड़कों पर हादसे हो रहे हैं, लोगों की जान तक जा रही है, जिम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हैं। इनकी जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ कार्रवाई की जानी चाहिए। इस याचिका में एमपीआरडीसी ने अपना पक्ष रखते हुए तीन सड़कों की स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की। स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर ही याचिका को खारिज करने की मांग की गई है।
निर्धारित समय के दो साल बाद नोटिस
एमपीआरडीसी की स्टेटस रिपोर्ट ही उसकी लापरवाही उजागर कर रही है। सतना-पन्ना मार्ग को लेकर कहा गया है कि कॉनकास्ट कंपनी को 20 जनवरी 2012 को जिम्मेदारी दी गई थी। जिसके लिए 11 मई 2013 को 25 साल के लिए अनुबंध किया गया। इसमें निर्माण के दो साल शामिल थे। समय पर निर्माण पूरा नहीं करने के लिए कंपनी को 22 जून 2017 में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। जबकि ये काम 2015 में ही पूरा हो जाना चाहिए था। अगर, नहीं हुआ, तभी नोटिस जारी होनी चाहिए, लेकिन एमपीआरडीसी दो साल तक सोती रही।
नाबार्ड के पैसे से बन रही चित्रकूट रोड
सतना-मझगवां रोड को लेकर एमपीआरडीसी के स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि 6 मई 2010 को इसका टेंडर एमपी टॉपवर्थ को सौंपा गया था। ठेका कंपनी द्वारा प्रथम होमोजीनियस सेक्शन (सतना-मझगवां) को पूरा किया गया, लेकिन दूसरे सेक्शन (मझगवां-चित्रकूट) को समय पर पूरा नहीं किया गया। लिहाजा 2015 में टेंडर निरस्त किया गया। इस मामले में भी तीन साल तक लापरवाही जारी रही। फिलहाल, त्रिरूपति बिल्डकॉन को ईपीसी मोड में काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। नाबार्ड से स्वीकृत राशि से सड़क निर्माण जारी है।
तीनों हाइवे मरम्मत के भरोसे
स्टेटस रिपोर्ट में सतना-बमीठा, सतना-बेला व सतना-चित्रकूट मार्ग को लेकर स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। जिस पर नजर डालें तो हकीकत ये है कि इन सड़कों का निर्माण निर्धारित समयावधि में पूरा नहीं हो सका है। वर्तमान में ये मरम्मत के भरोसे हैं। इनके मरम्मत के लिए बार-बार टेंडर किया गया है। यानि एक ओर निर्माण ठेका कंपनियों ने काम नहीं किया। वहीं दूसरी ओर एमपीआरडीसी कंपनियों पर सीधी कार्रवाई के बजाए मरम्मत के लिए टेंडर कर आम व्यक्ति के पैसों की बर्बादी कर रहा है।
2 साल बाद अनुबंध निरस्त
सतना-बेला मार्ग को लेकर स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि ठेका कंपनी एमपी टॉपवर्थ 29 मई 2017 को अनुबंध निरस्त किया जा चुका है। सड़क के मरम्मत के लिए टेंडर किया गया है। जबकि, इस सड़क को बनाने की जिम्मेदारी 9 मई 2012 को दी गई। कंपनी से 27 साल का अनुबंध 27 अगस्त 2013 को किया गया था। जिसमें निर्माण के दो साल शामिल थे। यानि सड़क को अगस्त 2015 तक पूरा हो जाना चाहिए था। उसके बावजूद एमपीआरडीसी दो साल तक सोती रही। 29 मई 2017 को अनुबंध निरस्त किया। इस दौरान विभाग चुप्पी साधे रहा। अब सड़क किस मोड से बनेगी तय नहीं है। मरम्मत के लिए टेंडर किया गया है।