सतना

दर्द से तड़पते पैदल चलती रही प्रसूता, सड़क पर डिलीवरी, कीचड़ के बीच जन्मा बच्चा

आजादी के 75 साल बाद भी हालात इतने बदतर  

2 min read
Aug 16, 2021

सतना. देशभर में जब 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाया जा रहा था तब एक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पते हुए भी पैदल चलने को मजबूर थी। आजादी के 75 साल बाद भी हालात इतने बदतर हैं कि उसे कीचड़ के बीच बच्चे को जन्म देना पड़ा। गांव का रास्ता इतना खराब था कि वहां तक एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पा रही थी। प्रसूता पैदल चलती रही और आखिरकार सड़क पर ही डिलीवरी करानी पड़ी।

हर किसी को क्षुब्ध कर देनेवाला यह घटनाक्रम जिले की कोटर तहसील के बिहरा डोंगरी गांव का है। यहां 70% आबादी आदिवासियों की है जिनके नाम पर आज भी अरबों की योजनाएं चल रही हैं। रविवार को सुबह गांव की 25 साल की नीलम को प्रसव पीड़ा प्रारंभ हो गई थी। वे दर्द से कराह उठीं लेकिन रास्ता खराब होने से एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी।

परिजनों ने 108 एंबुलेंस को कॉल कर बुला लिया था पर सड़क पर काफी कीचड़ होने से एंबुलेंस गांव के बाहर ही खड़ी रही। कोटर अस्पताल के डॉ. सर्वेश सिंह के मुताबिक महिला को लेबर पेन होने की जानकारी मिलने पर एंबुलेंस तुरंत रवाना कर दी गई थी। सुबह करीब साढ़े 7 बजे एंबुलेंस को रवाना किया था पर गांव की सड़क पर काफी कीचड़ था। एंबुलेंस कीचड़ में फंस जाती, इसलिए मेन रोड पर ही खड़ी करनी पड़ी।

कोख में पल रहे बच्चे का बोझ लिए प्रसूता पैदल चलने लगी तो पीड़ा बढ़ गई। असहनीय दर्द होने लगा और अंतत: उन्होंने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। चारों ओर पसरी कीचड़ के बीच यह डिलीवरी हुई। हालांकि ईश्वर मेहरबान था कि बच्चे को कुछ नहीं हुआ। बच्चा और प्रसूता दोनों स्वस्थ हैं और डिलीवरी के बाद दोनों को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।

Updated on:
16 Aug 2021 12:54 pm
Published on:
16 Aug 2021 09:57 am
Also Read
View All