प्रशासन नहीं करा पाया विस्थापन, बिना झुग्गियां हटाए रेलिंग और फुटपाथ में तोडफ़ोड़ से खतरे की आशंका
सतना। नेशनल हाइवे-75 पर मौजूद रेलवे ओवरब्रिज के 3.48 करोड़ के मेंटीनेंस का काम अपनी धीमी गति से मजाक बन कर रह गया है। 11 माह पहले शुरू हुआ काम अब तक 30 फीसदी ही पूरा हो सका है। बीते साल जून में वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद ब्रिज की मूल ड्राइंग नहीं मिलने से काम सितम्बर में शुरू हुआ। फिर ठेकेदार की पेमेंट न होने से दो माह तक काम बंद रहा। जैसे-तैसे सर्किट हाउस चौके छोर से शुरू हुआ काम डेढ़ सौ मीटर के बाद ठहर गया है।
विस्थापन अटका
सर्किट हाउस छोर से मुख्त्यारगंज रोड तक रेलिंग व फुटपाथ तोड़ी गई है पर आगे ब्रिज के नीचे झुग्गी बस्ती होने से काम रोक दिया गया है। ब्रिज के नीचे 80 झुग्गी झोपड़ी चिह्नित करने के बाद प्रशासन आज तक इन्हें विस्थापित नहीं करा सका। एेसी स्थिति में रेलिंग व फुटपाथ की तोडफ़ोड़ के अलावा नीचे बेस की राउटिंग व जैकटिंग भी संभव नहीं होगी। ठेका कंपनी शॉपिंग काम्प्लेक्स के आगे काम नहीं करेगी और दूसरे छोर से मरम्मत शुरू करेगी।
सिर्फ मौका-मुआयना
विस्थापन की कार्रवाई के लिए बीते माह तत्कालीन एसडीएम बलवीर रमन और नगर निगम कमिश्नर प्रवीण सिंह ने मौका मुआयना किया था। सेतु विभाग के सूत्रों की मानें तो प्रशासन की ओर से पहले 24 जून फिर 11 जुलाई तक झुग्गी बस्ती विस्थापित करने की बात कही गई थी। अधिकारियों के मुआयने के बाद ठेकेदार ने काम शुरू करवा दिया था। ब्रिज के मेंटीनेंस का काम झुग्गी तक पहुंच चुका है। बिना झुग्गियां हटाए ऊपर से रेलिंग व फुटपाथ की तोडफ़ोड़ खतरे से खाली नहीं है।
नौ दिन चले अढ़ाई कोस वाला काम
बता दें कि, करीब एक साल बीत रहे है फिर भी ओवरब्रिज की स्थिति जस की तस बनी हुई है। सेतु विभाग के जिम्मेदार कार्य पर तेजी से गति नहीं ला पा रहे है। बरसात के कारण ब्रिज जीर्णसीर्ण स्थिति में है। उपरी हिस्से में कई जगह पानी भरा हुआ है। जगह-जगह खाइनुमा गड्ढे हादसे का आमंत्रण दे रहे है।