सतना

स्वच्छ राजनीति के लिए साझा प्रयास की जरूरत, व्यापारी और कर्मचारियों ने रखी अपनी बात

स्वच्छ राजनीति के लिए साझा प्रयास की जरूरत, व्यापारी और कर्मचारियों ने रखी अपनी बात

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Apr 11, 2018
satna patrika Change Makers news in hindi

सतना। हम राजनीति में शुचिता की बात करते हैं, लेकिन जब कदम बढ़ाने की बारी आती है तो वापस खींच लेते हैं। हमें समझना होगा कि कोई भी बदलाव बिना प्रयास के संभव नहीं है। इसकी शुरुआत भी खुद से करनी होगी। हम बदलेंगे, तो देश बदलेगा। और इसी प्रकार राजनीति भी स्वच्छ होगी। यह बातें पत्रिका के टॉक शो में शहर के प्रबुद्धजनों ने कही। उन्होंने साफ तौर पर कहा, राजनीति की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। इसमें मानवीय मूल्यों की लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। कारण है कि अच्छे लोग इससे दूरियां बनाए हुए हैं। जबकि समाज में समर्पित रूप से काम करने वाले लोगों की जरूरत है। अच्छे लोगों को राजनीति में आना होगा। तभी निर्भीकता से काम करने वालों को आत्मबल मिलेगा।

ज्यादातर लोग मत का प्रयोग अच्छे लोगों को चुनने की बजाय जाति, धर्म और समाज में बंटकर अपने करीबी को जिताने में करते हैं। यही वजह है कि राजनीति स्वच्छ होने की बजाय दलदल बनती जा रही है। इमानदार लोग इसमें उतरने को तैयार नहीं होते। इस स्थिति को बदलना होगा। सबसे पहले खुद को बदलना होगा। जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को बदलाव के लिए प्रेरित करना होगा। पत्रिका ने इसी उद्देश्य के साथ अभियान शुरू किया है, जो राजनीति को नई दिशा देगा।

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पार्टियां बदनाम लोगों को टिकट देती हैं। मतदाता पार्टी, जाति और धर्म के नाम पर गलत लोगों को चुनकर संसद भेज देता है। राजनीति से अच्छे लोग दूर हो रहे हैं। इसे स्वच्छ करने समाज में जागरुकता लानी होगी।
विक्रम सिंह, नागरिक

राजनीति का कोई स्तर नहीं बचा। इमानदार व समाज की सेवा करने वालों के लिए राजनीति में कोई जगह नहीं बची। पत्रिका का कदम सराहनीय है, अब खबर पालिका ही देश को बचा सकती है।
सतीष बाल्मीकि, नागरिक

चुनावी खर्च कम हो, जिससे अच्छे लोग भी चुनाव लड़ सकें। देश का हर नागरिक संकल्प ले कि आज से अच्छे व्यक्ति को ही वोट देंगे। तभी देश व राजनीति की छवि बदल सकती है।
अनुज बाल्मीकि, नागरिक

राजनीति को स्वच्छ करना है, तो अच्छे लोगों को आगे लाना होगा। लोग पार्टियों पर दबाव बनाएं, जिससे वे साफ स्वच्छ छवि के लोगों को टिकट दे। इससे ही राजनीति बेहतर हो सकती है।
नीलाम्बर झा, नागरिक

राजनीति में गिरावट आने के लिए व्यापारी व बुद्धिजीवी ही जिम्मेदार हैं। जब बदलाव का दौर था, तो वे व्यापार व अपने काम में उलझे रहे। अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी। अब भी मौका है, बदलाव हो सकता है।
रामकुमार विश्वकर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता

पत्रिका ने स्वच्छ राजनीति का मुद्दा उठाया। पत्रिका को बधाई देते हैं। वर्तमान में भ्रष्ट राजनीति का जो दौर चल रहा है इससे जनता का नेता और पार्टियों से विश्वास कम हो रहा है। एक बदलाव की जरूरत है।
विकास विश्वकर्मा, नागरिक

राजनीति स्वच्छ करने का महाअभियान शुरू होना चाहिए। पत्रिका का अभियान सराहनीय है। सभी पार्टियां आगे आकर अच्छे लोगों को पार्टी और संगठन में जगह दें। दागी से दूरी बनाएं, स्थिति बेहतर होगी।
नारायण गौतम, अध्यक्ष, जिला अधिवक्ता संघ

राजनीति में स्वच्छता के लिए सबकी भूमिका महत्वपूर्ण है। हम अपनी भूमिका इमानदारी से निभाएं, अच्छे लोगों को चुनें तो स्थिति में बदलाव होगा। राजनीति को स्वच्छ करने सबको आगे आना होगा।
रमेश मिश्रा, लोक अभिभाषक।

राजनीति में एक मापदंड तय होना चाहिए। योग्यता, अनुभव सहित कई बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए। वर्तमान में देश में मंदिर मस्जिद, जाति-धर्म के नाम पर जनता को बांट कर पर्टियां सत्ता हथियाने का कार्य कर रही है, जो गलत है।
धर्मेंद्र सेन, लायंस क्लब

भारत युवाओं का देश है, लेकिन इन्हें रोजगार देने कभी संसद में बहस नहीं होती। इन स्थितियों को हमकों समझना होगा। तभी परिवर्तन संभव है। आम आदमी की आवाज नेताओं तक पहुंचना चाहिए। तभी परिवर्तन होगा।
आशीष मोंगिया, विंध्य चेंबर ऑफ कामर्स

पत्रिका ने स्वच्छ राजनीति से जनता को जोडऩे का प्रयास किया है। यह देश और समाज हित का मुदद है। इस अभियान से जन-जन को जुडऩा चाहिए। सभी संगठन व नागरिक आगे आकर देश की राजनीति को स्वच्छ करने का संकल्प लें।
आलोक नायक, व्यापारी

हम सब अपने बीच से अच्छे लोगों को आगे करें और उन्हें वोट देकर संसद पहुंचाएं। कुर्सी के लिए वोट की राजनीति करने वालों से दूरी बनाने की जरूरत है।
राजेश खत्री, व्यापारी

बगैर विचार वाले लोगों के आने से राजनीति के स्तर में गिरावट होगी। राजनीति में इमानदार लोगों की जरूरत है। जो देश के प्रति इमानदार हैं, वह आगे आएगा तो समाज बदलेगा।
विपिन अरजरिया, समाजसेवी

राजनीति में अच्छाई के नाम पर शायद कुछ नहीं बचा। राजनीतिक पार्टियों तक सबकुछ सिमट गया है। अच्छे लोग राजनीति में आएं, तो स्थिति में बदलाव होगा। हम लोगों को भी अच्छे लोगों को सहयोग देना चाहिए।
पंकज उरमलिया, समाजसेवी

शिक्षित नेतृत्व की जरूरत है। व्यक्तिगत आधार पर राजनीति में नहीं आना चाहिए। इसके पीछे कारण महत्वपूर्ण होना चाहिए। इसलिए राष्ट्रीय सोच के व्यक्ति को आना चाहिए। तभी परिवर्तन संभव हो सकता है।
राजीव सोनी, एकेएस यूनिवर्सिटी

मतदाता को सुधार लाना होगा। हम तय कर लें कि नेता हमें नहीं खरीद सकता, तो स्थिति अपने आप बदल जाएगी। राजनीति स्वच्छ करने के लिए एक मतदाता के रूप में खुद में बदलाव लाना होगा।
राजीव खरे, आरटीआइ कार्यकर्ता

पहले लोग संतों की बातों का अनुशरण करते थे। लेकिन, अब ऐसा नहीं होता। राजनीति में बदलाव के लिए अच्छे लोगों का आना जरूरी है। माहौल बनाना होगा, ताकि पार्टियों पर दबाव बने। इससे स्थिति बदल सकती है।
रामचंद्र नथानी, आर्ट ऑफ लीविंग

खुद प्रयास करना चाहिए। अन्ना का आंदोलन जनता की आवाज बना। इसके बाद दिल्ली की राजनीति में परिवर्तन हुआ। चेंजमेकर राजनीति के दल-दल से लोगों को मुक्ति दिला सकता है।
वीरेंद्र गोस्वामी, रामाकृष्णा कॉलेज

गिनती के विकल्पों में से एक को चुनने के अलावा तीसरा विकल्प नहीं है। जनता सिर्फ पार्टी देखती है, उम्मीदवार की योग्यता नहीं देखती। प्रत्याशी की कार्य कौशल पर मुहर लगाना होगा, तभी परिवर्तन होगा।
प्रदीप सक्सेना, समाजसेवी

वोट बैंक की राजनीति के लिए नेता कथाओं का आयोजन कर रहे हैं, लाखों खर्च कर देते हैं। जमीनी स्तर पर साफ सफाई से परहेज है। समाज को समर्पित युवा चेहरे ही बदलाव का कारण बनेंगे।
अमित कुमार, दवा व्यापारी

अक्सर, जनता किसी व्यापारी या सामाजिक कार्यकर्ता को सपोर्ट नहीं करती है। वहीं पार्टियां जाति, धर्म व बल के आधार पर टिकट देती हैं। जनता इन बातों को समझे और दागी की मदद न करे। तो बदलाव हो सकता है।
धर्मेंद्र सिंह, ट्रांसपोर्टर

यह देखना होगा कि जब मौका मिलता है, तो हम नेता कैसा चुन रहे हैं। अगर, हम स्वयं दागी छवि के लोगों को चुनते हैं, तो बदलाव नहीं हो सकता। सबसे पहले अपने स्तर पर बदलाव की जरूरत है।
पंकज शुकुल, व्यापारी

राजनीति को स्वच्छ करने नीति, नियत व नैतिकता जरूरी है। हम भ्रष्टाचारी, बाहुबली व धनबली को नकारेंगे, तो स्थिति खुद बदलेगी। इसके लिए कठिन परिश्रम जरूरी है।
प्रभाकर पांडेय, शासकीय अध्यापक संघ

राजनीति के लिए दशा- दिशा बदलना है तो हमें नैतिकता व जिम्मेदारी तय करनी होगी। राष्ट्रीय नीति बनानी होगी। तभी परिवर्तन हो पाएगा। राजनीति को स्वच्छ करने वृहद स्तर पर प्रयास हों।
अशोक प्रताप सिंह, अध्यक्ष, शिक्षक कांग्रेस

जिस दिन नेता सोच लें कि उसे जनता का प्रतिनिधित्व करना है और उसे जिम्मेदारी का अहसास हो जाएगा राजनीति में बदलाव दिखने लगेगा। दोहरे मापदंड से बचना होगा।
सुनील मिश्रा, शासकीय अध्यापक शिक्षक संघ

बड़ा तबका पार्टी व जाति-धर्म के आधार पर वोट देता है। इससे हटकर सोचना होगा। पार्टियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे स्वच्छ छवि के लोगों को टिकट दें। इससे स्थिति बदल सकती है।
द्वारिका गुप्ता, पूर्व महामंत्री, विंध्य चेंबर ऑफ कामर्स

वर्तमान विधायक व पार्षद क्षेत्र की समस्या को ठीक से उठा नहीं पाते है। चेंजमेकर वही होगा, जो अपनी झोली भरने से पहले समाज की इच्छाओं को प्राथमिकता देगा।
कुलदीप सक्सेना, राष्ट्रीय संयोजक, बीपीएल

राजनीति स्वच्छ करने की महती आवश्यकता है। वर्तमान राजनीति में इसकी चर्चा नहीं होती। जब समाज जागेगा, तो राजनीतिक परिवेश खुद बदल जाएगा। इसलिए जन जागरण की जरूरत है।
रामचरण गुप्ता, मंत्री, एग्रीकल्चर मर्चेंट एसोसिएशन

जन जागरण करना होगा। आपस में चर्चा करते हुए माहौल निर्मित करना होगा। ताकि साफ-सुथरे व्यक्तित्व के लोग चुनाव में आएं। पार्टियां भी ऐसे लोगों को मौका दें। तभी राजनीति स्वच्छ करने की उम्मीद की जा सकती है।
पवन मलिक, अध्यक्ष, लायंस क्लब

व्यावहारिक हकीकत को नजरअंदाज कर स्थिति में बदलाव नहीं हो सकता। राजनीति गंदी है, तो हमें भी सोचना होगा कि हमने गलती कहां की है। इसे सुधारा कैसे जा सकता है। लेकिन, हकीकत को ध्यान में रखते हुए ही कदम उठना होगा।
विनोद तिवारी, पेट्रोलियम एसोसिएशन, सतना

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Published on:
11 Apr 2018 04:58 pm
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