ओलावृष्टि के बाद खेतों में उतरा राजस्व अमला, किया निरीक्षण
सतना. तेज बारिश व ओलावृष्टि से कश्मीर घाटी में तब्दील तराई के गांवों में बिना मौसम की मार पड़ी है। शनिवार की सुबह खेत पहुचे किसानों ने जमीन में बिछी फसले देख स्तब्ध रह गए। शुक्रवार की शाम मझगवां एवं सिंहपुर क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में 20 मिनट तक आसमान से ओले बरसे थे उन गांवों में खड़ी फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। किसानों ने बताया की आवले केआकार के ओला गिरने से गेहूं के पौधे टूट कर खेत में बिछ गए हैं। वहीं चना एवं मसूर की फसल भी मिट्टी में दब गई है। ओला प्रभावित गांवों की पूरी फसल चौपट हो चुकी है।
क्षेत्र के किसानों ने कलेक्टर से फसलों का सर्वे करा राहत राशि दिलाने की मांग की है। वहीं मैदानी क्षेत्र में ओलावृष्टि एवं तेज बारिश से फसलों को नुससान नहीं हुआ। शनिवार को राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारी खेतों में जाकर फसलों का निरीक्षण किया। राजस्व विभाग ने जैतवारा बिरङ्क्षसहपुर सोहावल एवं कोठी क्षेत्र के बारिश प्रभावित गांवों में जाकर फसलों का जायजा लिया। फौरी सर्वे के बाद अधिकारियों ने फलकों को किसी प्रकार के नुकसान से इनकार किया है।
चना की फसल प्रभावित
राजस्व विभाग की नजर में सब सामान्य दिख रहा है। लेकिन बिन मौसम बारिश से चना की फसल पर संकट के बादल मडऱाने लगे हैं। किसानों का कहना है की चना की फसल एक सिचाई से अधिक पानी बर्दास्त नहीं करती। लेकिन इस साल बीते दो माह में तीन बार तेज बारिश हो चुकी है। इस समय चना की फसल फूल में थी। शुक्रवार को हुई तेज बारिश व आंधी से चना की फसल जमीन में बिछ गई है। खेतों में नमी आधिक होने के कारण चना के पौधे बड़ गए हैं। इससे फलस अफलन का शिकार हो सकती है।