
गाय के पेट से निकले सिक्के, कील, मैगी और कुरकुरे के पैकेट
सतना. पशु जिला अस्पताल के एक चिकित्सक ने रविवार को गाय का ऑपरेशन किया। गाय के पेट से निकले प्लास्टिक कचरे ने चिकित्सक के साथ ग्रामीणों को भी अचंभित कर दिया। सर्जरी के दौरान गाय के पेट से सिक्के, कील, मैगी, कुरकुरे, पारले-जी के पैकट सहित 32 किलो प्लास्टिक कचरा निकला। पेट में जमे प्लास्टिक कचरा निकालने में दो घंटे का समय लगा। गाय के पेट से जहरीला कचरा निकालने के बाद पेट की धुलाई की गई। गाय पूरी तरह से स्वस्थ है।
पशु चिकित्सालय के सर्जन डॉ. बृहस्पति भारती ने बताया कि मझगवां विकासखंड स्थित मोहनी गांव के पशु पालक शिवजीत त्रिपाठी की दोगला नस्ल की गाय दो माह से बीमार थी। रविवार को गांव पहुंच कर गाय की जांच की। गाय के पेट में पॉलीथिन जमा होने की पुष्टि होने पर सर्जरी की गई। सर्जरी में गाय के पेट से ३२ किलो प्लास्टिक कचरा निकला। पशु के पेट से जितना पॉलीथिन कचरा निकला, वह उम्मीद से बहुत अधिक है। सर्जरी में डॉ. बृहस्पति भारती, गौसेवक भागवत त्रिपाठी व वंृदावन कुशवाहा का विशेष योगदान रहा।
चार दिन नहीं दंेगे चारा-पानी
डॉ.भारती ने बताया कि गाय के ऑपरेशन के बाद उसे चार दिन सिर्फ डिप के सहारे रखा जाएगा। ठोस व तरल कोई भी पदार्थ खाने को नहीं दिया जाएगा। चारा-पानी देने से पेट में लगाए गए टांके खुल सकते हैं और गाय के पेट में संक्रमण हो सकता है।
पेट में भरा 2 दर्जन केला, चार किलो दही
चार दिन तक गाय बिना-चारा पानी के रह सके, इसलिए सर्जरी के बाद गाय के पेट में दो दर्जन केले, चार लीटर दही व पांच किलो पालक व मूली के पत्ते काट कर रख दिए गए हैं। चार दिन तक इनका पाचन होने से गाय को भरपूर पोष्टिक आहार मिलेगा।
दुधारू पशुओं को दें पर्याप्त मिनिरल
डॉक्टर भारती ने बताया कि दुधारू पशुओं को आहार में पर्याप्त विटामिन्स न मिलने के कारण वह प्लास्टिक कचरा व मिट्टी-पत्तल खाने लगती है। इनका पाचन न होने से वह पेट में जमा होने जगता है। अंत में पशुओं को भूख न लगने से उनकी मौत हो जाती है। इसलिए पशु पालक दुधारू पशुओं को पर्याप्त मात्रा में पोस्टिक आहार खाने को दें। साल में दो बार कीड़े मारने वाली दवा भी खिलाएं। इससे पशु पॉलीथिन कचरे का सेवन नहीं करेंगे।

Published on:
24 Feb 2020 01:06 am
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