सतना

देशप्रेम का ऐसा जज्बा, पिता और चाचा हो गए शहीद, फिर भी बेटा जंग के मैदान में

एक गांव जहां 1400 मतदाताओं में से 600 कर रहे देशसेवा..
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Updated: 27 Jan 2018, 4:10 PM IST
story of choond village in satna
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सुरेश मिश्र सतना। जिले में एक ऐसा गांव भी है जहां 1400 मतदाताओं में 600 सैनिक हैं। सैनिकों की नर्सरी कहे जाने वाले चूंद गांव की वीरगाथा न सिर्फ नौजवानों को रोमांचित करती है, बल्कि उन्हें देशसेवा के लिए कुछ भी कर गुजरने की पे्ररणा भी देती है।

इस गांव की मिट्टी में देशभक्ति का ऐसा जज्ब़ा है कि सबकुछ खो देने के बाद भी गांव के युवाओं में देश-प्रेम देखते ही बनता है। यहां के कई जांबाज सिपाही देश के सरहद की सुरक्षा में योगदान देकर वीरगति को प्राप्त हो चुके है। एक ऐसी ही कहानी है गांव के श्रीपाल सिंह की।

उनके दो बेटे देश के लिए शहीद हो चुके है। पहला बेटा 1998 में और दूसरे ने 2000 में देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी। 1998 में शहीद हुए कन्हैयालाल की पत्नी तो आज भी उन जख्मों से उबर नहीं पाई है। वह तो सिर्फ आंसुओं से ही देश-प्रेम और अपने दर्द को बयां कर देती हैं। हालांकि उसे अपने पति के शहीद होने पर गर्व है।

ऐसा था श्रीपाल सिंह का परिवार
शहीद कन्हैयालाल की बेटी ने बताया, हमारे दादा का नाम श्रीपाल सिंह था। उनके 4 बेटे थे। बड़े बेटे का नाम कन्हैया लाल सिंह और दूसरे बेटे का नाम बाबूलाल सिंह था। इनमें दोनों शहीद हो चुके हैं। तीसरे चाचा का नाम चंद्रराज सिंह जो अभी भी सेना में हैं। सबसे छोटे चाचा ब्रजेन्द्र सिंह प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं।

इकलौता बेटा सेना में
जब कन्हैयालाल सिंह का निधन हुआ था, उस समय बेटा विनय सिंह करीब 8 वर्ष का था। पिता का सिर से हाथ हट गया फिर भी बेटे के अंदर देशभक्ति का जज्ब़ा उसी तरह कायम रहा। सबके मना करने के बाद भी इकलौता बेटा आज भी देश की सेवा कर रहा है। शहीद कन्हैयालाल सिंह की दो बेटियां भी हैं। सबसे बड़ी बेटी पूजा सिंह उस समय 10 वर्ष की थी, जबकि छोटी बेटी 6 साल की। वर्तमान में शहीद की पत्नी और छोटी बेटी प्रियंका सिंह घर में रहती हैं। जबकि बड़ी बेटी पूजा की शादी हो चुकी है।

ऐसा है चूंद गांव
- आबादी 2400
- मतदाता 1400
- कुल फौजी 600
- अभी सेना में 235
- रिटार्यड सैनिक 365
- देश के लिए शहीद 04
- अन्य कारणों से मौत 05

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