
सतना. मैहर स्थित मां शारदा देवी के दर्शन के लिये आने वाले श्रद्धालुओं को सहज दर्शन हो सकें इसके लिये शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति ने यहां रोप-वे संचालन का निर्णय लिया था। इसके लिये दामोदर रोपवे एण्ड कन्सट्रक्शन कंपनी से समिति ने रोप-वे स्थापना के लिए एग्रीमेंट किया। लेकिन बाद में रोपवे कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिये तत्कालीन कलेक्टर ने मूल एग्रीमेंट में गुपचुप बदलाव कर नियम विरुद्ध तरीके से यात्री किराए में वृद्धि कर दी। इस फर्जीवाड़े को ज्येष्ठ संपरीक्षक ने पकड़ भी लिया और समिति को हुए करोड़ों के नुकसान की आशंका भी अपनी रिपोर्ट में जताई। लेकिन इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस नुकसान की भरपाई तो की ही नहीं गई बाद में रोपवे प्रबंधन को समय वृद्धि देकर समिति को और ज्यादा नुकसान पहुंचाया।
संपरीक्षक ने पकड़ा खेल
पत्रिका के पास मौजूद ज्येष्ठ संपरीक्षक की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि समिति क्षेत्रान्तर्गत संचालित रोपवे द्वारा समिति को माह सितंबर 2015 से यात्री रायल्टी प्रतिशत का भुगतान किया जाना पाया गया। रोवे निर्माण तथा संचालन के अनुबंध और कार्य के अवलोकन में अनियमितताएं पाई गईं जिसका सीधा असर समिति को प्राप्त आय पर पड़ रहा है। संपरीक्षक ने बताया है कि निजी पूंजी निवेश योजनान्तर्गत मां शारदा देवी पहाड़ी में रोपवे संचालन के लिये निविदा आमंत्रण उपरांत मां शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति की बैठक के निर्णय अनुसार दामोदर रोपवे एंड कन्सट्रक्शन कंपनी कलकत्ता से अनुबंध किया गया। इस अनुबंध में 4 वर्ष के बाद निर्धारित प्रतिशत दर से समिति को यात्री रायल्टी देय थी। लेकिन बाद में रोपवे निर्माण में विलंब के नाम पर तत्कालीन कलेक्टर तथा रोपवे के अधिकारियों ने संयुक्त बैठक कर अनुबंध में तमाम नियम विरुद्ध परिवर्तन कर दिये गये।
अनुबंध में यह किया गया बदलाव
इस संयुक्त बैठक में पूर्व की लागत 550 लाख के स्थान पर बढ़ा कर 750 लाख रुपये कर दी गई। यात्री किराया जो पहले 30 रुपये प्रति व्यक्ति था उसे बढ़ा कर बच्चे 35 रुपये और वयस्क 40 रुपये कर दिया गया। देय रायल्टी अवधि जो पूर्व में 5 वें वर्ष से प्रारंभ होनी थी उसे बढ़ा कर ७वें वर्ष से प्रारंभ होना तय किया गया। 70:30 का लाभांश (70 रोपवे व 30 समिति को) जो 9वें वर्ष से प्रारंभ होना था उसे बढ़ा कर 11वें वर्ष कर दिया गया।
और इस तरह किया गया खेल
ज्येष्ठ संपरीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि कलेक्टर और रोप-वे प्रबंधन के बीच बैठक के निर्णय को मां शारदा मंदिर प्रबंध समिति में रखा जाना (जो आवश्यक और अनिवार्य था) नहीं पाया गया। संपरीक्षक की रिपोर्ट का यही वह बिन्दु है जिससे साबित हो रहा है कि तत्कालीन कलेक्टर और रोप-वे प्रबंधन ने नियम विरुद्ध तरीके से दरों में संशोधन करते हुए समिति को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया है। संपरीक्षक ने यह भी कहा है कि रोपवे के निर्माण एवं संचालन के लिये मां शारदा मंदिर प्रबंध समिति का निर्णय था। आय संबंधी प्राप्त दरों का अनुमोदन समिति में होने के कारण किसी भी प्रकार का परिवर्तन या परिवर्धन की प्राधिकारी समिति ही है। लिहाजा रोपवे के प्रस्ताव को लेकर कलेक्टर और रोपवे के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में दी गई स्वीकृति अनियमित और अप्रभावी है। ऐसी स्थिति में दामोदर रोपवे और समिति के मध्य निष्पादित पूर्व अनुबंध ही प्रभावी माना जाना वैधानिक है। इस प्रकार समिति के तत्कालीन अधिकारियों ने मां शारदा मंदिर प्रबंध समिति को दरकिनार कर अनियमित रूप से स्वीकृति देकर समिति की आय में कमी कराई है।
'' प्रशासक से रोप-वे संबंधी नस्ती तलब की गई है। इसको देखने के बाद विधि सम्मत निर्णय लिये जाएंगे।'' - अनुराग वर्मा, कलेक्टर एवं अध्यक्ष शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति