
maihar : 9 months extension to compensate for the damage of 56 days to Damodar Ropeway
सतना. मां शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति मैहर बड़े गड़बड़झाले को लेकर विवादों में घिर गई है। कोरोना काल में 56 दिन तक यात्रियों का आवागमन बंद रहने के एवज में रोप-वे प्रबंधन को हुई आर्थिक क्षति की भरपाई समिति ने अपना नुकसान करके की है। रोपवे प्रबंधन को 56 दिनों के नुकसान के एवज में 9 माह का एक्सटेंशन (समय वृद्धि) दे दिया गया है। वह भी उस स्थिति में जब रोप-वे प्रबंधन का एग्रीमेंट समाप्त होना था और इसके बाद समिति को होने वाले लाभ का 30 फीसदी हिस्सा बढ़कर 70 फीसदी होने वाला था। लेकिन इस समय वृद्धि से अब वापस रोप-वे प्रबंधन को 70 फीसदी और समिति को 30 फीसदी ही लाभ मिलेगा।
रॉयल्टी के लिए बड़ा खेल
दामोदर रोप वेज एंड कन्स्ट्रक्शन कंपनी प्रा.लि. को 750 लाख रुपये की लागत में मैहर शारदा मंदिर में मोनो केबल स्थापित करने का ठेका मिला था। इसके एग्रीमेंट में था कि ठेका कंपनी पहले छ: साल अपना बैंक का लोन चुकाएगी। इसके बाद अगले 6 साल तक होने वाली आय से अपना मुनाफा लेगी। इस मुनाफे के लिए तय किया गया था कि यात्रियों से होने वाली आय से रॉयल्टी का भुगतान दामोदर रोपवे एक हिस्सेदारी के रूप में करेगी। जिसमें आय का 70 फीसदी हिस्सा दामोदर रोप-वे लेगी और 30 फीसदी समिति को देगी। यह समयावधि सितंबर 2021 में पूरी हो गई। लेकिन इस दौरान कोरोना महामारी के कारण रोप-वे का संचालन बंद रहा। यह अवधि लगभग 56 दिवस की थी। इसको लेकर कंपनी ने समय वृद्धि के लिए समिति को आवेदन दिया।
और हो गया कंपनी के हित में खेल
कंपनी ने गलत तरीके से एग्रीमेंट की कंडिका 25 का हवाला देते हुए कोविड काल में हुए नुकसान की भरपाई के लिये 9 माह का एक्सटेंशन मांगा। लेकिन समिति ने इस समय वृद्धि में अपनी आय की चिंता किये बिना 56 दिन के नुकसान की भरपाई के लिये 9 माह की समय वृद्धि कर दी। जबकि सितंबर 2021 से एग्रीमेंट अवधि पूरी होने के बाद समिति को 70 फीसदी हिस्सेदारी आय से होनी थी और रोप-वे प्रबंधन को सिर्फ 30 फीसदी मिलना था।
नवरात्रि में आते हैं लाखों श्रद्धालु
समिति ने अपनी आय में कितना बड़ा नुकसान किया है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस अवधि में नवरात्रि भी पड़ती है। जिसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में रोप-वे प्रबंधन को समय वृद्धि देकर शारदा प्रबंध समिति ने अपने हिस्से को लाखों लाख रुपये का नुकसान कर रोवे प्रबंधन को बैक डोर से फायदा पहुंचाया है।
टेण्डर की नस्तियां गायब
सूत्रों का कहना है कि समिति कार्यालय में जमा रोप-वे एग्रीमेंट और अन्य पत्राचार से जुड़ी नस्ती के कई दस्तावेज रोप-वे प्रबंधन ने समिति कर्मचारियों की मिलीभगत से गायब करवा दिये हैं। इमें टेण्डर फाइल सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं। इनकी जांच हो तो बड़े खुलासे हो सकते हैं क्योंकि शुरुआती दौर में यहां बाई-केबल के लिये 450 लाख रुपये का टेण्डर किया गया था जिसे बाद में मोनो केबल में बदलते हुए रेट रिवाइज के नाम पर इसकी लागत 750 लाख रुपये कर दी गई।
आज तक नहीं हुई ऑडिट
रोव-वे से होने वाले आय व्यय की आज तक आधिकारिक ऑडीटर द्वारा आडिट नहीं कराई गई। इसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि दामोदर रोप-वे कंपनी ने बीच में कई बार बिना कलेक्टर के अनुमोदन के यात्रियों का किराया बढ़ाया है। जबकि यह नियम विरुद्ध था। अगर इसकी ऑडिट हो जाएगी तो लाखों का घोटाल निकल कर सामने आएगा।
'' अगर ऐसा हुआ है तो यह गंभीर मामला है। इस मामले में समिति के प्रशासक से जानकारी ली जाएगी और पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।'' - अनुराग वर्मा, कलेक्टर एवं अध्यक्ष शारदा प्रबंध समिति
Published on:
18 Mar 2022 10:38 am
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