सतना

MP के इस टाइगर रिजर्व में शिफ्ट की गई बाघिन टी-22 ने मचाया आतंक, अब तक कर चुकी है…शिकार

कुसमी क्षेत्र के गांवों में घुसकर पालतू पशुओं को बना रही निवाला
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Jul 11, 2018
tiger
Tigress T-22 of Sanjay Gandhi Tiger Reserve turn Aggressive

सीधी। मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से संजय गांधी टाइगर रिजर्व भेजी गई बाघिन टी-22 ने आतंक मचाना शुरू कर दिया है। करीब 6 माह तक बाड़े में कैद रहने के बाद बाघिन आदमखोर हो चुकी है। टाइगर रिजर्व एरिया को छोड़कर लगातार बाघिन का ग्रामीण क्षेत्रों में मूमेंट है। रात के समय घर के बाहर बंधे हुए पालतू पशुओ को निवाला बना लेती है।

शिकार की लगातार आ रही घटनाओं से कुसमी क्षेत्र के लोग परेशान हैं। संजय टाइगर रिजर्व को सूचित करने के बाद भी बाघिन को जंगल की ओर ले जाने का कोई खास प्रयास नहीं किया जा रहा है। गांव के इर्द-गिर्द जंगल में बाघिन अपना निवास बनाए हुई है। जिससे लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सबको अपनी जान का खतरा बना हुआ है।

ये है मामला
बता दें कि, कुछ माह पहले बाघिन टी-22 को पन्ना से सीधी लाया गया था। पन्ना में रहते हुए बाघिन ने क्षेत्र में खूब आतंक मचाया था। वहां भी वह गांव में जाकर पालतू पशुओं का शिकार बना रही थी। जिससे तंग आकर उसे बाड़े में रखने का प्रस्ताव रखा गया। लेकिन पन्ना टाइगर रिजर्व के पास बाड़े की व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण वहां से सीधी जिले के स्थित संजय टाइगर रिजर्व के बाड़ा में बाघिन टी-22 को रखा गया। 6 माह तक बाड़ा में रखने के बाद बाघिन को खुले में छोड़ दिया गया। बाड़ा से निकलने के बाद बाघिन कुछ दिन तक तो शांत रही अब फिर गांव की ओर आना-जाना शुरू कर दी है। कुसमी विकासखंड के विभिन्न गांवों में करीब एक सैकड़ा पालतू पशुओं का शिकार बाघिन कर चुकी है। यहां तक कि कुसमी मुख्यालय से करीब आधा किलोमीटर दूर पर एक हरिजन परिवार के पालतू -सुअर का भी शिकार रविवार की रात्रि में किया गया है।

आम लोगों के साथ अधिकारी भी भयभीत
बाघिन के गांव में घुसने की जानकारी को लेकर जहां आमजन भय महसूस कर रहा है, वहीं कुसमी मुख्यालय में रहने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारी भी भयभीत महसूस कर रहे हैं। जिसके कारण वे रात्रि में कुसमी रूकने की जगह जिला मुख्यालय की ओर रवाना हो जाते हैं।

सिर्फ दो कर्मचारी ले रहे हैं बाघिन का लोकेशन
बाघिन के गांव में आने-जाने की जानकारी विभागीय अमले को भी है। लेकिन लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। आलम यह है कि लोकेशन प्राप्त करने के लिए मात्र दो कर्मचारियों की तैनाती की गई है। जो एक स्थान पर बैठकर रेडियो कालर के माध्यम सें लोकेशन ले रहे हैं। वहीं ग्रामीणों के द्वारा मांग की गई है। गांव के इर्द-गिर्द पटाखों का विस्फोट कराया जाए, जिससे बाघिन गांव से दूर भागकर जंगल की ओर चली जाए।

Published on:
11 Jul 2018 06:55 pm