सतना

पर्यटन की राह में सिस्टम के हिचकोले, सपंर्क मार्ग ही विकसित नहीं कर पाए जिम्मेदार

विश्व पर्यटन दिवस विशेष: विंध्य की हसीन वादियों में बसे रीवा-सतना में कैमूर और विंध्य पर्वत श्रृंखलाएं हैं।

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Sep 27, 2017
World Tourism Day Special in satna madhya pradesh

सतना। विंध्य की हसीन वादियों में बसे रीवा-सतना में कैमूर और विंध्य पर्वत श्रृंखलाएं हैं। कल-कल करती बीहर, बिछिया, तमस, महाना और ओड्डा जैसी नदियां हैं। जिनके जलप्रपातों के झरनों का मनमोहक संगीत हर दिल में रोमांच भर देता है। आदिमानव काल की गुफाएं प्राचीन सभ्यता से रूबरू कराती हैं। लेकिन, आज ये उपेक्षित हैं। सरकार ने पर्यटन वर्ष भले मना लिया हो पर पर्यटन की राह आसान नहीं कर सका।

पर्यटन स्थल घोषित करने के बाद सुविधाएं देना भी जिम्मेदार भूल गए। सतना जिले में मैहर और चित्रकूट जैसे राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल हैं। पड़ोसी जिले में पन्ना टाइगर रिजर्व व खजुराहो जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध स्थल हैं। इसके अलावा जिले के हर कोने में ऐतिहासिक, धार्मिक व सामाजिक महत्व की धरोहरें बिखरी पड़ी हैं। लेकिन, पर्यटन की अपार संभावना के बाद भी पर्यटक जिले में लगातार कम हो रहे हैं।

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संपर्क मार्ग जर्जर

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण सिस्टम के हिचकोले हैं। अधिकतर पर्यटन स्थल तक पहुंचाने वाले संपर्क मार्ग जर्जर हो चुके हैं। अगर, कोई व्यक्ति पर्यटन स्थल तक पहुंचने की सोचता है, तो सड़क के गड्ढे पार करना ही उसके लिए चुनौतीभरा हो जाता है। ऐसे में पर्यटन विकास की संभावना तलाशना ही बेमानी है।

जानकारी भी नहीं मिल पाती
जिले में पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए रेलवे स्टेशन में केंद्र स्थापित किया गया था। उसे भी गत वर्ष पर्यटन निगम ने बंद कर दिया। अब होटलों को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी ऐसा केंद्र नहीं है जो पर्यटन की जानकारी दे सके। पर्यटक टैक्सी व ठेले वालों से जानकारी लेकर जिले में घूमने का प्रयास करते हैं। जानकारी देने के लिए वेबसाइट आदि का भी अभाव है।

उपेक्षित भरहुत
जिले में प्राचीन भरहुत स्तूप भी स्थित है। इसका इतिहास सांची के स्तूप से भी पुराना है। इसकी अधिकतर मूर्तियां व धरोहरें कोलकाता म्यूजियम में रखी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर स्तूप का निचला हिस्सा शेष रह गया है। जिसे सहजने को लेकर गंभीरता बहुत कम है।

प्रोजेक्ट बन कर रह गए
जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोजेक्ट बने हैं। लेकिन, कागजों में सिमटकर रह गए। बौद्ध सर्किट व वाइल्ड लाइफ सर्किट से सतना-रीवा को प्रदेश के अन्य जिलों से जोड़ा जाना था पर आज तक कदम आगे नहीं बढ़ाया जा सका। जबकि केंद्र ने बजट भी स्वीकृत कर दिया है।

हर पहुंच मार्ग जर्जर
पन्ना टाइगर रिजर्व और खजुराहो को जोडऩे के लिए सतना-बमीठा मार्ग को अपग्रेड करने का निर्णय आठ साल पहले लिया गया। लेकिन, आज तक पूरी सड़क बनकर तैयार नहीं हो सकी। इसी तरह सतना-चित्रकूट मार्ग भी आधा बन सका है। कुछ ऐसी ही स्थिति गैवीनाथ, सरभंगा आश्रम व धारकुंडी आश्रम मार्ग की भी है।

इन पर्यटन स्थलों तक पहुंचना कठिन

स्थल मुख्यालय से दूरी मार्ग

- गैवीनाथ धाम ३० किमी. सतना-कोटर-बिरसिंहपुर
- कोदेश्वरनाथ ३५ किमी. सतना-नागौद-जसो
- धारकुंडी ५० किमी. सतना-कोटर-बिरसिंहपुर-धारकुंडी
- सरभंग आश्रम ५० किमी. सतना-कोटर-बिरसिंहपुर-सरभंगा
- चित्रकूट ७5 किमी. सतना-चित्रकूट
- गिद्धकूट ८० किमी. सतना-रामनगर
- मुकुंदपुर टाइगर ४५ किमी. सतना-बेला-मुकुंदपुर
- श्रेयांसगिरी ३५ किमी. सतना-नागौद-जसो
- भरहुत 20 किमी. सतना-मैहर

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Published on:
27 Sept 2017 03:16 pm
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