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विश्व पर्यटन दिवस: हिमालय की गोद में बसा है भराड़सर ताल, सुंदरता देख जाने को हो जाओगे मजबूर

भराड़सर को स्थानीय पर्यटन से जोड़ते हुए राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पटल पर स्थान दिलाने के लिये 10 से 14 अक्टूबर तक हिमालय दिग्दर्शन यात्रा का आयोजन होगा

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Kapil Tiwari

Sep 27, 2017

tourism

देहरादून। हिमालय की गोद में बसे उत्तराखण्ड के अनेक अनुपम सौंदर्यपूर्ण पर्यटन स्थल दुनियाभर के सैलानियों को यहां आमंत्रित करते हैं। यहां की बर्फ के आगोश में समाई पर्वत श्रृंखलाएँ, हरीतिमा और फूलों से भरे आँगन सैलानियों को सदैव आमंत्रित करते हैं। हर कोई उस पर्यटन स्थल तक तो पहुंच जाता है, जो कि पर्यटन के मानचित्र पर है, लेकिन हिमालय में कई ऐसा जगह हैं, जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से धनी ऐसा ही एक स्थल भराड़सर ताल है। यह स्थान कुछ कैलाश मानसरोवर-सा प्रतीत होता है, भराड़सर ताल तो ऐसा साक्षात मानसरोवर झील-सा ही लगता है।

देखने लायक है भराड़सर ताल
उत्तराखण्ड व हिमाचल की सीमारेखा के बीच स्थित भराड़सर ताल एक विशाल झील है, जो 14828 फुट की ऊंचाई पर नीलांग बौंधार की गोद में एक नैसर्गिक पावन स्थल है। नैटवाड़ से लगभग 17 कि.मी. पर भीतरी गांव से एक रास्ता इस झील तक है, जबकि सांकरी-जखोंल-लेक्चा-कासला-लिकड़ी दूसरा रास्ता है। इस अनुपम स्थल को आम टूरिस्ट्स के बीच लोकप्रिय करने की कोशिशों में जुटे पलायन एक चिंतन संस्था के संयोजक रतन सिंह असवाल कहते हैं कि दोनों रास्तों पर कठिन चढ़ाई है पर वहां का प्राकृतिक सौंदर्य और सुहावना मौसम थकान महसूस ही नहीं होने देता।

वो बताते हैं कि डेढ़ कि.मी. के व्यास में पसरी इस झील के चारों किनारों पर करीने के साथ तराशी गई खूबसूरत ढंग से बिछी स्लेटों को देखकर तो प्रकृति की अद्भुत संरचना पर कौतुहल हो उठता है । दुख की बात यह है कि ऐसा अद्भुत, प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थान उत्तराखंड पर्यटन विभाग के गैर जिम्मेदाराना रवैये से उपेक्षित है।

भराड़सर के स्थानीय पर्यटन से जोड़ते हुये राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पटल पर पर्यटन के मानचित्र पर स्थान दिलाने के लिये 10 से 14 अक्टूबर 2017 तक हिमालय दिग्दर्शन यात्रा का आयोजन किया जा रहा है । आयोजन से जुड़े केडी सिंह बताते हैं कि इस अभियान में दल सांकरी, जखोंल, लेक्चा, कासला, लिकड़ी होते हुये भराड़सर पहुंचेगा तथा वापसी में दूसरे मार्ग से होता हुया भितरी होते हुये मोरी पहुंचेगा। इस पूरी यात्रा का डाक्युमेंटेशन करके पर्यटन विभाग को सौंपा जाएगा। ताकि इस अद्भुत अनएक्सप्लोर्ड प्लेस को टूरिज्म मैप पर लाया जा सके। इससे न केवल दुनिया भर के टूरिस्ट्स को एक अद्भुत स्थान देखने को मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

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