
सवाईमाधोपुर. क्षेत्र के विकास के लिए सड़कें पहली सीढ़ी है, जब सड़कें ही क्षतिग्रस्त हो तो विकास की बात करना बेमानी है। जिले में मुख्य सड़क मार्गों पर कार्य पूर्ण होने से पहले ही निर्माण कार्य उखड़कर घटिया निर्माण और जिम्मेदारों की पोल खोल रहे है। कई सड़के गारंटी परियड में ही उखड़ रही है। सड़कों की मरम्मत को लेकर ना तो सरकार ध्यान दे रही है ना जनप्रतिनिध और ना ही पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारी गंभीरता बरत रहे है। इसका खामियाजा आम जनता और वाहन चालकों को उठाना पड़ रहा है।
दरअसल, जिले में सरकार व जनप्रतिनिधियों की लापरवाही व नजरअंदाज के चलते सड़को की हालत खस्ताहाल है। इसके चलते आमनागरिको का सड़को पर चलना मुश्किल हो गया। स्थिति ये है कि शहर से गांवों को जोडऩे वाले मार्ग पर जगह-जगह सड़कों में गड््ढे हो गए है और डामर उखड़ गया है। इससे लोगों व वाहन चालकों को दुर्घटना का अंदेशा बना है।
खटपुरा में बनने से पहले ही उखड़ी सड़क
सवाईमाधोपुर के नजदीक खटपुरा में सड़क ही हालत बदतर है। यहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ( Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana ) के तहत डेढ़ किलोमीटर तक सड़क बननी है। 13 जून को कार्यादेश जारी होने के बाद भी बजट के अभाव में कार्य शुरू नहीं हो सका है, जबकि 12 फरवरी 2020 तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा करना है। इस रोड की मरम्मत के लिए 15 लाख 75 हजार रुपए की राशि स्वीकृत हुई है। लेकिन पांच वर्ष के गारंटी परियड से पहले ही सड़क का डामर उखड़ गया है। कंक्रीट रोड पर राहगीरों व वाहन चालकों को भी परेशानी होती है।
ये सड़कें ज्यादा बदहाल
जिले में जमूल खेड़ा, रामसिंहपुरा, महू, सुनारी, लौधीपुरा, राईंथाकलां, पुसौदा में सड़कों की हालत खराब है। इसके अलावा मलारना स्टेशन से मलारना डूंगर, भगवतगढ़ से चौथकाबरवाड़ा, सवाईमाधोपुर से खण्डार, श्यामपुरा रोड आदि स्थानों पर जगह-जगह सड़कों से डामर उखड़ गया है। पीडब्ल्यूडी ने इन सड़कों की मरम्मत के प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दिया है लेकिन बजट के अभाव में कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
होती है कागजी खानापूर्ति
जिले में बदहाल सड़कों को लेकर सार्वनिक निर्माण विभाग ने अब तक एक भी सड़क बनाने वाले ठेकेदार को ब्लेक लिस्टेड नहीं किया है, जबकि कई ठेकेदारों ने सड़कों का काम अधूरा छोड़ रखा है, तो कई जगहों पर घटिया सामग्री लगाने से डामर उखड़ गया है। इसके बावजूद भी विभाग संबंधित ठेकेदारों को कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता है। ठेकेदारों को महज कागजी खानापूर्ति कर नोटिस थमाए जाते है।
बजट का रोते है रोना
जिले में कई नई सड़कें ऐसी है जिनका विभाग ने प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा है है लेकिन वित्तीय स्वीकृति नही मिलने व बजट के अभाव में सड़कों का काम अटका पड़ा है। हर बार संबधित अधिकारी कभी बारिश का तो कभी बजट का रोना रोते है। ऐसे में कई सड़कें बजट का इंतजार कर रहे है।
नए सड़क सुरक्षा कानून में भी प्रावधान
नए चर्चित सड़क सुरक्षा कानून में कई बड़े प्रावधान किए गए है। इसमें वाहन चालक एवं वाहनो पर विभिन्न प्रकार की जुर्माना राशि बढ़ाई गई है और कई जिम्मेदारियां तय की गई है। लेकिन इनमें एक प्रमुख जिम्मेदारों सड़क पर दुर्घटना होने पर गड््ढो या टूटी सड़को के कारण होती है तो सड़क बनाने वाले ठेकेदार पर भी जुर्माना व सजा का प्रावधान भी शामिल है।
जल्द शुरू कराएंगे सड़कों का कार्य
जिले में जर्जर सड़कों की मरम्मत का कार्य 15 सितम्बर के बाद से शुरू कराया जाएगा। सड़कों के पेचवर्क का कार्य एक महीने तक चलेगा। बजट के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। जल्द ही सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी। ठेकेदारों को पाबंद किया जाएगा।
डीके फुलवारिया, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, सवाईमाधोपुर
इनका कहना है
सड़के आमनागरिको के मूल अधिकारों में से एक है। इन पर चलते समय किसी भी कारण से दुर्घटनाएं होती है या इनके सार-संभाल या गड््ढो से किसी भी नागरिक को जन या धन हानि होती है, तो इसकी जेम्मेदारी सड़क बनाने वाले विभाग व ठेकेदारों की संयुक्त रूप से होती है। इस जिम्मेदारी से वे बच नही सकते। लेकिन दुर्भाग्य से जिले में सड़कों की बदतर स्थिति से आम नागरिक व्यथित है।
हरिप्रसाद योगी, सामाजिक कार्यकर्ता, सवाईमाधोपुर