
सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर में बंद जोनों में पर्यटकों के भ्रमण पर जाने का मामला उजागर होने के बाद भले ही डीओआईटी व वन विभाग के अधिकारी मामले की जांच की बात कह रहे हो, लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है कि जब रणथम्भौर पार्क भ्रमण व पर्यटन जोन बदलने में अनियमिता उजागर हुई है। इससे पहले भी कई बार पर्यटन बुकिंग में फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है, लेकिन विभागीय अधिकारी इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
समय से पहले पहुंच गई थी जिप्सी
24 अप्रेल 2018 को भी नियमों को ताक में रखकर एक जिप्सी निर्धारित समय से पूर्व ही पार्क में पहुंच गई थी। नियमानुसार सुबह की पारी में पर्यटन वाहनों को सुबह छह बजे पार्क में प्रवेश दिया जाता है, लेकिन उक्त जिप्सी सुबह पांच बजे ही रणथम्भौर के जोन चार के आडी डगर इलाके में पहुंच गई थी। उस समय भी यह जांच का विषय था कि आखिर जिप्सी चालक को जोन में प्रवेश के लिए गेट की चाबी निर्धारित समय से पहले कैसे मिली। इस मामले में भी अब तक कुछ नहीं हुआ।
इस बार भी अब तक नहीं मिली रिपोर्ट
वन विभाग की ओर से इस बार भी डीओआईटी से बंद जोन पर भ्रमण पर कई जिप्सियों के जीपीएस टे्रकिंग की लोकेशन रिपोर्ट मांगी गई है। मामला उजागर होने के करीब छह दिन बाद भी डीओआईटी की ओर से अब तक रिपोर्ट वन विभाग को नहीं सौंपी गई है। ऐसे में एक बार फिर डीओआईटी की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नहीं हो रही पूछताछ
वन विभाग ने अब तक गेंद को डीओआईटी के पाले में डालकर इतिश्री कर ली है। यह सही है कि बंद जोन में टिकट आवंटन का मामला डीओआईटी से संबंधित है, लेकिन वन विभाग की ओर से भी पार्क भ्रमण पर जाने वालों की एंट्री प्वाइंट पर जांच की जाती है। वन विभाग की ओर से जोन सात व नौ में बुकिंंग नहीं की जा रही है। ऐसे में वनकर्मियों को इस बारे में जानकारी होना स्वाभाविक है, लेकिन इसके बाद भी विभाग की ओर से वनकर्मियों से पूछताछ नहीं की जा रही है।
इनका कहना है...
रणथम्भौर टिकट बुकिंग मामले में फिलहल जांच चल रही है। जांच पूरी होने पर वन विभाग को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जहां तक पहले के मामलों की बात है तो मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। - दिनेश गुर्जर, एसीपी, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, जयपुर