सवाई माधोपुर

Ranthambore: फिर न हो जाए रणथंभौर जैसी हृदयविदारक घटना, यहां घूम रहे हैं 10 से अधिक बाघ-बाघिन

Ranthambore National Park: रणथंभौर बाघ परियोजना में बाघ-बाघिन की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस पर वन विभाग एक ओर अपनी पीठ थपथपा रहा है। वहीं दूसरी ओर..

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Ranthambore National Park: सवाईमाधोपुर। रणथंभौर बाघ परियोजना में बाघ-बाघिन की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस पर वन विभाग एक ओर अपनी पीठ थपथपा रहा है। वहीं दूसरी ओर रणथंभौर में बाघ-बाघिनो की संख्या अधिक होने के कारण वर्तमान में दस से अधिक बाघ-बाघिन रणथंभौर के जंगल की सीमा यानि की पैराफेरी में विचरण कर रहे हैं। ऐसे में कई बार यह बाघ-बाघिन सहित पैंथर व अन्य वन्यजीव जंगल की सीमा से निकाल कर आबादी क्षेत्र की ओर आ जाते हैं।

गत दोनों एक बाघ ने जंगल से निकाल कर शहर में भैरव दरवाजे के पास एक व्यक्ति पर हमला किया था। वहीं गत शनिवार रात को भी किसी वन्यजीव के गाय और बछड़े के शिकार का मामला सामने आया था। इसके बाद त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग भी बंद कर दिया गया है। लेकिन वन विभाग आबादी क्षेत्र में आने से बाघ-बाघिनों को नहीं रोक पा रहा है। ऐसे में श्रद्धालु तथा ग्रामीण भी भय के साए में हैं।

6 साल के बच्चे को उठा ले गई थी बाघिन

पिछले दिनों रणथंभौर के जंगल से सटे प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग में एक बाघिन 6 साल के बच्चे को उठाकर ले गई थी। यह घटना उस वक्त हुए थी जब दादी-पोता त्रिनेत्र गणेश के दर्शन करके लौट रहे थे। बार मृत अवस्था में बच्चे को छोड़कर बाघिन चली गई थी।

इन बाघ-बाघिनों का मूवमेंट रहता है पैराफेरी क्षेत्र में

वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रणथंभौर में वर्तमान में बाघिन टी-107 यानि सुल्ताना, बाघिन टी 39 यानि नूर, बाघिन टी 79 के शावक, बाघ टी-108, जय आदि शामिल हैं।

एक्सपर्ट व्यू

रणथंभौर में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक है, कई बाघ-बाघिन तो पैराफेरी क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं। ऐसे में कई बार शिकार और पानी की तलाश में जंगल से बाहर आ जाते हैं।
-मनोज पाराशर, पूर्व सीसीएफ, रणथंभौर बाघ परियोजना