Ranthambore New Safari Park: रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बढ़ती बाघों की संख्या को देखते हुए एक नया सफारी पार्क विकसित किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने आइओसी की जमीन को मांगा है।
सवाईमाधोपुर। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बढ़ती बाघों की संख्या को देखते हुए एक नया सफारी पार्क विकसित किया जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने आइओसी की जमीन को मांगा है। अगर सब कुछ ठीक रहा और अनुमति मिल जाती है तो पर्यटकों के लिए नया पार्क मिल सकेगा। हालाकि इसमें बूढ़े और घायल बाघों को रखा जा सकेगा। उनके बीच में संघर्ष के हालात भी पैदा नहीं होते हैं। ऐसे में रिजर्व से वंचित पर्यटकों के लिए यह पार्क वैकल्पिक हो सकेगा।
रिजर्व में अभी बाघों की संख्या 76 से अधिक है। क्षमता से ज्यादा बाघों की मौजूदगी अब चुनौती बन गई है। प्रस्ताव है कि रणथंभौर से सटे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के बंद पड़े प्लांट की जमीन पर सफारी पार्क विकसित किया जाए। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने तीन माह पूर्व पेट्रोलियम मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था।
जानकारी के अनुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व 1700 वर्ग किलोमीटर में फैला है। 2015 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की स्टडी में बताया गया था कि 50 बाघों तक रिजर्व सुरक्षित रहता है। लेकिन वर्तमान संख्या अधिक होने से टेरिटोरियल फाइट बढ़ रही है। इसी कारण 100 बीघा जमीन मांगी गई है। एनओसी मिलने के बाद नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी तय करेगी कि कितने बाघ यहां रखे जाएंगे।आईओसी प्लांट क्षेत्र चारों ओर आठ फीट ऊंची दीवार से घिरा है और वर्षों से बंद रहने के कारण यहां प्राकृतिक जंगल विकसित हो चुका है। प्रस्तावित पार्क में प्राकृतिक हैबिटेट जैसा माहौल रखा जाएगा। एनक्लोजर का आकार और संख्या मंजूरी के बाद तय होंगे।
योजना है कि एक समय में दो से तीन बाघ यहां रखे जा सकें। इन्हें ट्रेंकुलाइज कर शिफ्ट किया जाएगा। मेडिकल सेवाएं रणथंभौर के वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल से उपलब्ध कराई जाएंगी। वन विभाग ने 500-500 हेक्टेयर के ग्रासलैंड विकसित किए हैं ताकि शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ सके। साथ ही मुकुंदरा टाइगर हिल्स की तरह बड़े एनक्लोजर बनाने की आवश्यकता बताई गई है।रणथंभौर में वर्तमान में सफारी सुबह और दोपहर की दो-दो शिफ्ट में होती है। एनटीसीए गाइडलाइन के अनुसार एक पारी में 144 वाहन ही सफारी पर जा सकते हैं। नए पार्क में सूर्योदय से सूर्यास्त तक सफारी कराई जा सकेगी और करीब 200 वाहन संचालित हो सकेंगे।
बाघों की बढ़ती संख्या के कारण कई बार वे जंगल से बाहर निकल जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। वन विभाग रेडियो कॉलर लगाकर उनकी निगरानी कर रहा है। हाल ही में टी-2407 बाघ को कॉलर लगाया गया है। इसके अलावा रणथंभौर-कैलादेवी और रामगढ़ विषधारी कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। अब तक 24 बाघों को रणथंभौर से सरिस्का, मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी में शिफ्ट किया जा चुका है। प्रस्तावित सफारी पार्क से घायल और बुजुर्ग बाघों की देखभाल बेहतर होगी और मुख्य रिजर्व पर दबाव कम होगा
इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। जल्द ही सफारी पार्क विसिकत कर वृद्ध बाघ बाघिनों को रखा जाएगा।
-मानस सिंह, उपवन संरक्षक रणथम्भौर।