
भाड़ौती. ढील बांध की नहरों के निर्माण में अनियमितताओं और भाड़ौती-मखौली नवीन सड़क मार्ग के निर्माण के कुछ ही दिनों बाद क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों एवं किसानों की शिकायत पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने भाड़ौती और गंभीरा गांव पहुंचकर मौके पर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने नहरों में दरारें आने, माइनर नहरों की सफाई, चौड़ाई एवं गहराई बढ़ाने तथा सड़क निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग की शिकायत की।
ग्रामीणों ने मंत्री को बताया कि ढील बांध की नहरों के सुदृढ़ीकरण पर करीब 21 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ समय बाद ही कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगीं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से लेकर सिचांई मंत्री तक शिकायतें करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। भाजपा की ओर से भी मामले में अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप लगाए गए हैं।
भाड़ौती से मखौली तक करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से नवीन सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कई महीनों से निर्माण कार्य बंद पड़ा है। संवेदक की ओर से करीब चार किलोमीटर सड़क पर डामरीकरण किया गया था, लेकिन निर्माण के लगभग 30 दिन बाद ही सड़क पर जगह-जगह डामर उखड़ने लगा और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए।
ग्रामीणों एवं किसानों ने कृषि मंत्री को क्षतिग्रस्त सड़क दिखाते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सड़क बनने के कुछ ही समय बाद खराब होने से आवागमन में परेशानी हो रही है।
मौके पर कृषि मंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सहायक अभियंता को बुलाकर सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू करवाने तथा क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। मंत्री ने ग्रामीणों को समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। अब क्षेत्रवासियों को संबंधित विभागों की ओर से नहरों और सड़क की गुणवत्ता की जांच कराकर समस्याओं का स्थायी समाधान किए जाने का इंतजार है।
जानकारी के अनुसार, बौंली एवं मलारना डूंगर उपखंड क्षेत्र में सिचांई व्यवस्था सुधारने के लिए वर्ष 2019 में ढील बांध की करीब 43 किलोमीटर लंबी नहर के पक्के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए 21.50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे। ढील बांध की मुख्य नहर वर्ष 1911 से मिट्टी की बनी हुई थी। नहर को पक्का करने का उद्देश्य पानी की बर्बादी रोकना और अंतिम छोर तक किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना था।
नहर का काम पूरा होने के बाद करीब 36 गांवों को लगभग 6,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने ग्रामीणों से बातचीत कर ढील बांध नहर की समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता को नहर की सफाई करवाने, माइनर नहरों को चौड़ा एवं गहरा करने तथा आवश्यकता के अनुसार पाइपलाइन डलवाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही माइनर संख्या-9 पर गंभीर-सब माजरा नदी तक किसानों की आवाजाही के लिए मुख्य नहर के दोनों ओर कच्ची सड़क बनाने के निर्देश भी दिए गए, ताकि किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में परेशानी नहीं हो।